India Export: भारत ने अमेरिकी बाजारों पर निर्भरता घटाई, क्या अब पश्चिम एशिया और उभरते हुए बाजारों जोर?
भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है। भारत पर लगाए गए भारी अमेरिकी टैरिफ के बावजूद घरेलू निर्यातकों ने दूसरे बाजार तलाशकर अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम की है। रिपोर्ट बताती है, पारंपरिक यूरोपीय व्यापारिक साझेदारों ने कारोबार को स्थिर बनाए रखने मदद की है।
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भारत सरकार के वाणिज्य सचिव के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बहुत जल्द हो सकता है, लेकिन अभी इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं की जा सकती है। इस बयान से व्यापारियों और निवेशकों को काफी राहत मिली है, लेकिन अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद देश ने अमेरिका के बाजारों पर अपनी निर्भरता कम किया है और भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है। इसके लिए कई यूके, नीदरलैंड, ओमान और छोटे देशों के साथ व्यापार समझौते किए गए हैं।
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एलारा सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के महीनों में भारत ने निर्यात बाजार में टैरिफ लागू होने के बाद एक पुर्नसंतुलन देखने को मिला है, जिसमें भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम की है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के निर्यात बाजार की संरचना अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर पश्चिम एशिया, एशिया, और उभरते हुए बाजारों में अधिक विस्तारित हुई है और जो एक रणनीतिक बदलाव को भी दर्शाती है।
टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका की हिस्सेदारी घटी
रिपोर्ट के अनुसार भारत के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी टैरिफ लागू होने से पहले 22.5 थी, जो टैरिफ शुल्क लागू होने के बाद घटकर 17.8 प्रतिशत रह गई है। इसके विपरीत संयुक्त अरब अमीरात, चीन, सऊदी अरब, स्पेन और हांगकांग जैसे बाजारों में वृद्धि दर्ज की गई, जो भारतीय निर्यातकों द्वारा प्रभावी व्यापार के लिए प्रमुख बाजार बनते नजर आ रहे हैं।
यूरोपिय बाजारों ने निर्यात में वृद्धि की
रिपोर्ट बताती है, पारंपरिक यूरोपीय व्यापारिक साझेदारों ने कारोबार को स्थिर बनाए रखने मदद की है। जर्मनी, इटली, और स्पेन जैसे देशों में मामूली वृद्धि ने नीदरलैंड और ब्रिटेन में देखी गई। जिसने टैरिफ लागू होने के बाद आई नरमी को संतुलित करने में मदद की है।
वित्त वर्ष 2027 के अंत तक देश के निर्यात में मजबूती जारी रहने की उम्मीद
- वित्त वर्ष 2027 के अंत तक देश के निर्यात में मजबूती जारी रहने की उम्मीद रिपोर्ट में जताई गई है।
- वित्त वर्ष 2027 के अंत में माल-सामान निर्यात में 4.5-5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष के अंत यह वृद्धि 2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- जीसीसी (सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन) अर्थव्यवस्थाओं में जारी तेजी की वजह से सेवा निर्यात में मजबूती बनी रहेगी, जिसमें 12 से 13 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
- टैरिफ संबंधी चुनौतियों के बाद भी भारत का माल निर्यात मजबूत बना रहेगा।
इन क्षेत्रों के उत्पाद निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ी
इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, कार्बनिक रसायन और इंजीनियरिंग उत्पाद निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ी है। इसके साथ ही समुद्री उत्पादों जिन पर टैरिफ लागू है, उनके निर्यात की हिस्सेदारी में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकते देती है कि भारत का निर्यात विविधीकरण, मूल्यवर्धन और क्षेत्रीय मजबूती के जरिए बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश के अनुकूल रूप से ढल रहा है और बाहरी चुनौतियों के बाद भी विकास की गति को लगातार बढ़ा रहा है।