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IIP: औद्योगिक उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका: 2 फीसदी रह सकती है वृद्धि दर; यूनियन बैंक की रिपोर्ट में दावा

अमर उजाला ब्यूरो Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 27 Apr 2026 06:36 AM IST
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सार

विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में कमजोरी के चलते मार्च में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटने का अनुमान है। यूनियन बैंक की रिपोर्ट के अनुसार IIP ग्रोथ 2 प्रतिशत तक सिमट सकती है। बढ़ती लागत, आपूर्ति बाधाएं और कमजोर मांग इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं, जबकि कुछ संकेतकों में सुधार भी दिखा है।

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औद्योगिक उत्पादन में आ सकती है बड़ी गिरावट - फोटो : ANI
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विस्तार

विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक कमजोरी से देश के औद्योगिक उत्पादन में मार्च के आंकड़ों में बड़ी गिरावट आ सकती है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर मार्च में काफी धीमी होकर 2 फीसदी रह सकती है। यह फरवरी, 2026 में दर्ज 5.2 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले बड़ी गिरावट है। मार्च, 2025 में औद्योगिक उत्पादन 3.9 फीसदी बढ़ा था।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण पीएमआई घटकर मार्च में 53.9 पर आ गई, जो जून, 2022 के बाद इसका निचला स्तर है। विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी गिरावट ने बढ़ती इनपुट लागत एवं आपूर्ति में रुकावट के बीच उत्पादन पर बुरा असर डाला है। यह सुस्ती उत्पादन मार्जिन और मांग पर बढ़ती इनपुट लागत के असर को दिखाती है। हालांकि, कुछ उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों ने मिलीजुली मजबूती दिखाई है।
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इसके अलावा, आईआईपी में करीब 40 फीसदी का योगदान देने वाले देश के आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा उद्योगों में मार्च में 0.4 फीसदी की गिरावट आई है, जो पिछले 19 महीनों में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। यह औद्योगिक गतिविधियों में कमी का संकेत है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, इस्पात और सीमेंट के उत्पादन में सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक और बिजली क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट रही। मासिक आधार पर देखें तो सिर्फ उर्वरक उत्पादन में 25.9 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों का प्रदर्शन : उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। मार्च में ई-वे बिल जेनरेट होने की वृद्धि दर बढ़कर 12.9 फीसदी पहुंच गई। हालांकि, यह फरवरी के 18.8 फीसदी की तुलना में कम है। जीएसटी राजस्व की वृद्धि दर फरवरी के 8.1 फीसदी से बढ़कर मार्च में 8.8 फीसदी पहुंच गई, जो बताता है कि खपत में सुधार और बेहतर अनुपालन का संकेत है। टोल संग्रह में गिरावट जारी रही।

सभी प्रकार के वाहनों की बिक्री बढ़ी : मार्च के खुदरा बिक्री के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण इलाकों में वाहनों की मांग स्थिर रही। इसके बावजूद दोपहिया वाहनों की बिक्री में 28.7 फीसदी और ट्रैक्टरों में 10.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। सभी प्रकार के वाहनों की खुदरा बिक्री 25.3 फीसदी पर मजबूत बनी रही। हालांकि, कारों समेत यात्री वाहनों की बिक्री की रफ्तार धीमी होकर 21.5 फीसदी रह गई।

पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की खपत के रुझान मिलेजुले रहे। पेट्रोल और डीजल की खपत क्रमशः 7.6 फीसदी एवं 8 फीसदी तक बढ़ गई। इसकी एक वजह यह है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति में रुकावट की आशंका के चलते लोगों ने एहतियातन खरीदारी की। हालांकि, पेट्रोलियम उत्पादों की खपत फरवरी के 5.5 फीसदी से घटकर 2.2 फीसदी पर आ गई। इसकी मुख्य वजह बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने के कारण विमान ईंधन की मांग में आई भारी गिरावट रही।

बिजली की मांग सामान्य स्तर पर बनी रही, क्योंकि मार्च के शुरुआती 25 दिनों में सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण कूलिंग (ठंडा रखने) की जरूरतें कम हो गईं।

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