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स्टार्टअप्स के लिए खुशखबरी: फंड फॉर फंड्स के लिए सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

एएनआई, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 25 Apr 2026 11:16 PM IST
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सार

सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की फंडिंग योजना के दूसरे चरण के नियम जारी किए हैं। सिडबी के साथ मिलकर एक अन्य एजेंसी इसे लागू करेगी, जिसमें डीप-टेक और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 

govt issues detailed guidelines for second tranche of fund of funds scheme for startups
स्टार्टअप (सांकेतिक) - फोटो : amar ujala
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विस्तार

केंद्र सरकार ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) योजना की दूसरी किस्त को मंजूरी दे दी है। यह पूरी किस्त 10,000 करोड़ रुपये की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इसके संचालन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।
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इन नियमों का उद्देश्य पूंजी प्रवाह को बेहतर बनाना है। सरकार भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र में निवेश की दक्षता बढ़ाना चाहती है। इसके लिए शासन और निगरानी के कड़े तंत्र बनाए गए हैं। यह योजना सीधे निवेश नहीं करेगी। यह सेबी (एसईबीआई) के साथ पंजीकृत श्रेणी-I और श्रेणी-II के वैकल्पिक निवेश कोषों के माध्यम से काम करेगी। इस फंड के जरिए केवल उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में ही निवेश होंगे।
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पारदर्शिता और विकास पर जोर
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से निवेश में अनुशासन आएगा। इससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। नए नियमों से अलग-अलग क्षेत्रों और चरणों के स्टार्टअप्स को फंडिंग मिल सकेगी। साथ ही, अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के स्टार्टअप्स तक पहुंच आसान होगी। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक शुरुआत में इसे लागू करने वाली एजेंसी होगी। सिडबी फंड चयन और निगरानी की पूरी प्रक्रिया को संभालेगी।

डीपीआईआईटी एक और अतिरिक्त एजेंसी को भी शामिल करेगा। इसका उद्देश्य योजना की पहुंच को और बढ़ाना है। नई एजेंसी के आने से तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ेगी। स्टार्टअप इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए फंड को चार हिस्सों में बांटा गया है। इसमें डीप टेक, माइक्रो वेंचर कैपिटल, प्रौद्योगिकी-आधारित विनिर्माण और सेक्टर-एग्नोस्टिक फंड शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: Digital Wallet Rules: RBI ने डिजिटल वॉलेट्स के लिए कड़े नियमों का रखा प्रस्ताव, जानें कितना रखा जा सकेगा पैसा?

विशेषज्ञों की समिति करेगी जांच
फंड आवंटन से पहले कड़ी जांच होगी। कार्यान्वयन एजेंसी शुरुआती स्क्रीनिंग और ड्यू डिलिजेंस करेगी। इसके बाद एक वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। यह समिति टीम के अनुभव और निवेश रणनीति की जांच करेगी। इस समिति में वल्लभ भंसाली, अशोक झुनझुनवाला, रेणु स्वरूप, चिंतन वैष्णव और राजेश गोपीनाथन जैसे दिग्गज शामिल हैं।

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