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Crude Oil: भारत का पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को ठेंगा, जुलाई में आयात लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड स्तर पर
Mon, 10 Aug 2026 05:44 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 10 Aug 2026 05:44 PM IST
सार
पश्चिमी देशों की ओर से रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बढ़ने के बावजूद भारत ने जुलाई में वहां से कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी। सीआरईए के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने महीने के दौरान 5.5 अरब यूरो का रूसी कच्चा तेल खरीदा। रूसी तेल भारत के कुल कच्चे तेल आयात में आधे से अधिक हिस्से तक पहुंच गया।
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चीन के बाद भारत बना सबसे बड़ा खरीदार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात जुलाई में लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध और कड़े किए हैं। इसके बावजूद भारत सस्ते रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए हुए है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय खरीदारों ने जुलाई में 5.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल आयात किया। जून की तुलना में इसमें 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
जुलाई में भारत की रूस से कुल जीवाश्म ईंधन खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही। जून में भारत ने 4.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा था। यह रूस से उसके कुल 5.5 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन आयात का 83 प्रतिशत था। 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी मात्रा के लिहाज से है, मूल्य के लिहाज से नहीं।
2022 के बाद से क्यों बढ़ी रूसी तेल पर निर्भरता?
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता तेजी से बढ़ी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूरोपीय खरीदारों के हटने के बाद रूस ने एशियाई रिफाइनरियों को भारी छूट पर तेल देना शुरू किया था।
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अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2021 में रूस भारत को प्रतिदिन एक लाख बैरल से भी कम कच्चा तेल देता था। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 2.5 प्रतिशत था। 2022 में यह मात्रा बढ़कर करीब 7.40 लाख बैरल प्रतिदिन और 2023 में लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। इसके साथ रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।
2023 में कितनी थी तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी?
2023 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत थी। यह निर्भरता अब और बढ़ गई है। जुलाई 2026 में भारतीय रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड 28 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया। यह भारत के पांच मिलियन बैरल प्रतिदिन से कुछ अधिक कुल कच्चे तेल आयात का करीब 55.5 प्रतिशत था। 2024 में भारत का औसत रूसी कच्चे तेल का आयात करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन था।
सीआरईए ने कहा, "भारत जुलाई 2026 में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था। उसने कुल 6.4 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत 5.5 अरब यूरो थी। कोयला 51.2 करोड़ यूरो और तेल उत्पाद 34.1 करोड़ यूरो के रहे।"
रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भारत
यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। सीआरईए के विश्लेषण की अवधि में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही। चीन 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। भारत की खरीद बढ़ने के बीच रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय कमजोर हुई है। जुलाई में रूसी कच्चे तेल से होने वाली निर्यात आय करीब 39.2 करोड़ यूरो प्रतिदिन रही, जो लगभग पिछले महीने के बराबर थी।
पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल से होने वाली आय में 21 प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इसकी भरपाई समुद्र के रास्ते कच्चे तेल से होने वाली आय में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी से हुई। सीआरईए के अनुसार, रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत जुलाई में तीन प्रतिशत घटकर 60.22 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इसके बावजूद यह फरवरी 2026 में लागू जी7 और यूरोपीय संघ की 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी अधिक थी।
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जुलाई में भारत की रूस से कुल जीवाश्म ईंधन खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही। जून में भारत ने 4.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा था। यह रूस से उसके कुल 5.5 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन आयात का 83 प्रतिशत था। 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी मात्रा के लिहाज से है, मूल्य के लिहाज से नहीं।
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2022 के बाद से क्यों बढ़ी रूसी तेल पर निर्भरता?
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता तेजी से बढ़ी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूरोपीय खरीदारों के हटने के बाद रूस ने एशियाई रिफाइनरियों को भारी छूट पर तेल देना शुरू किया था।
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अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2021 में रूस भारत को प्रतिदिन एक लाख बैरल से भी कम कच्चा तेल देता था। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 2.5 प्रतिशत था। 2022 में यह मात्रा बढ़कर करीब 7.40 लाख बैरल प्रतिदिन और 2023 में लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। इसके साथ रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।
2023 में कितनी थी तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी?
2023 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत थी। यह निर्भरता अब और बढ़ गई है। जुलाई 2026 में भारतीय रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड 28 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया। यह भारत के पांच मिलियन बैरल प्रतिदिन से कुछ अधिक कुल कच्चे तेल आयात का करीब 55.5 प्रतिशत था। 2024 में भारत का औसत रूसी कच्चे तेल का आयात करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन था।
सीआरईए ने कहा, "भारत जुलाई 2026 में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था। उसने कुल 6.4 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत 5.5 अरब यूरो थी। कोयला 51.2 करोड़ यूरो और तेल उत्पाद 34.1 करोड़ यूरो के रहे।"
रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भारत
यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। सीआरईए के विश्लेषण की अवधि में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही। चीन 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। भारत की खरीद बढ़ने के बीच रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय कमजोर हुई है। जुलाई में रूसी कच्चे तेल से होने वाली निर्यात आय करीब 39.2 करोड़ यूरो प्रतिदिन रही, जो लगभग पिछले महीने के बराबर थी।
पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल से होने वाली आय में 21 प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इसकी भरपाई समुद्र के रास्ते कच्चे तेल से होने वाली आय में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी से हुई। सीआरईए के अनुसार, रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत जुलाई में तीन प्रतिशत घटकर 60.22 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इसके बावजूद यह फरवरी 2026 में लागू जी7 और यूरोपीय संघ की 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी अधिक थी।