Report: भारत की खंडित जल प्रबंधन प्रणाली के कारण बढ़ रही चुनौतियां, मूडीज की रिपोर्ट में यह दावा
मूडीज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खंडित जल प्रबंधन प्रणाली, सब्सिडी वाला मूल्य निर्धारण और धीमा पुनर्वितरण वित्तीय और ऋण जोखिम बढ़ा रहा है। डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग भी चुनौती बन रही है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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मूडीज रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत की जल प्रबंधन प्रणाली के बारे में गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। मूडीज के अनुसार, देश की खंडित जल शासन संरचना के कारण वित्तीय और ऋण जोखिम बढ़ रहा है। अत्यधिक सब्सिडी वाला मूल्य निर्धारण और क्षेत्रों के बीच धीमा जल पुनर्वितरण भी इसका प्रमुख कारण है।
मूडीज ने बताया कि जल आपूर्ति को प्राथमिकता देने, मूल्य निर्धारण और घरों, उद्योग व कृषि में वितरण के आवंटन ढांचे आर्थिक लचीलापन लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये ढांचे तय करते हैं कि पानी की कमी को कैसे संभाला जाता है। साथ ही, आपूर्ति से जुड़ा तनाव तेजी से वित्तीय दबाव में बदलता है। क्लाउड कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार से डेटा केंद्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें भी बड़े पैमाने पर पानी का इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट के अनुसार यह जल संसाधन के लिए औद्योगिक दबाव का एक नया स्रोत है।
मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार सरकारों की ओर से समय रहने जल संसाधन का प्रबंधन करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 'खंडित जल प्रबंधन ढांचा है। यह बिखरे हुए शासन और कमजोर मूल्य निर्धारण से ग्रसित है। इसके अलावा धीमी पुनर्वितरण प्रणाली और कम विश्वसनीय निवेश हालात को और बिगाड़ रहा है।
क्या है भारत की जल प्रबंधन चुनौती?
भारत में जल से जुड़ा शासन 28 से अधिक राज्यों में फैला हुआ है। जल प्रबंधन और नीतियां मुख्य रूप से अलग-अलग राज्य सरकारों की ओर से नियंत्रित होती हैं। कृषि क्षेत्र देश के ताजे पानी का लगभग 80 फीसदी उपभोग करता है। इसके लिए मूल्य निर्धारण अत्यधिक सब्सिडी वाला है। विभिन्न क्षेत्रों के बीच जल का पुनर्वितरण भी धीमा है। कई क्षेत्रों में आवश्यक अवसंरचना में निवेश के लिए संसाधनों की कमी है। यह स्थिति जल प्रबंधन को और जटिल बनाती है।
क्यों बढ़ रहा है वित्तीय और ऋण जोखिम?
मूडीज के अनुसार, ऐसे ढांचे लंबे समय तक पानी की कमी का कारण बन सकते हैं। इनसे उच्च लागत और औद्योगिक व सार्वजनिक सेवा में बड़े व्यवधान उत्पन्न होते हैं। इसका परिणाम निरंतर वित्तीय दबाव के उच्च जोखिम के रूप में सामने आता है। इससे समायोजन में देरी होती है और ऋण का तनाव लगातार बना रहता है। यह देश की आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
किन अन्य जोखिमों का सामना कर रहा है भारत?
विश्व संसाधन संस्थान की रिपोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए मूडीज ने बताया है। भारत में गर्मी के तनाव, बाढ़ और मानसून की परिवर्तनशीलता के प्रति उच्च ऋण जोखिम है। जल प्रबंधन श्रेणी में बहुत उच्च ऋण जोखिम है। यह पुरानी जल अवसंरचना और अत्यधिक भूजल दोहन के कारण है। इन कारणों से देश की जल सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।