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GDP: ऊर्जा संकट और कमजोर मॉनसून से भारत की वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान, जानिए एसएंडपी ने और क्या कहा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 24 Jun 2026 04:18 PM IST
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सार

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की वित्त वर्ष 2027 की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। ऊर्जा तनाव, कमजोर मॉनसून और वैश्विक मंदी इसके मुख्य कारण हैं। महंगाई बढ़ने और नीतिगत दर में बढ़ोतरी की भी आशंका है।

India's FY27 Growth Forecast to Slow to 6.6% Amid Energy Stress, Sub-Par Monsoon: S&P
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार, 24 जून 2026 को एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में धीमी रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि दर 6.6 फीसदी तक गिर सकती है। ऊर्जा तनाव, कमजोर मॉनसून और वैश्विक आर्थिक वृद्धि में कमी इसके प्रमुख कारण होंगे।



एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी। वित्त वर्ष 2025 में यह 7.1 फीसदी रही थी। अब मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है।
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भारतीय रिजर्व बैंक का वृद्धि दर के लिए अनुमान भी 6.6 फीसदी ही है। अल नीनो के प्रभाव से मॉनसून की बारिश कमजोर हुई है। 22 जून तक बारिश की कमी 43 फीसदी तक बढ़ गई है। सरकार ने कमजोर मॉनसून से निपटने के लिए राज्य-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में कम बारिश की स्थिति के अनुकूल वैकल्पिक फसलों की सिफारिश की गई है।

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क्या ऊर्जा संकट एक बड़ी चुनौती है?

भारत अपनी कच्चे तेल की 88 फीसदी जरूरतें आयात करता है। वैश्विक कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे देश में महंगाई भी बढ़ती है। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा तनाव का असर दिख रहा है। उद्योग को कच्चे माल की लागत में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। आपूर्तिकर्ताओं के वितरण समय में भी देरी हो रही है।

मॉनसून और महंगाई का क्या असर होगा?

उर्वरक की ऊंची कीमतें खाद्य उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ रही हैं। बढ़ती महंगाई लोगों की क्रय शक्ति को कम कर रही है। यह आर्थिक वृद्धि को भी धीमा कर रही है। एसएंडपी ने कहा कि तीसरी तिमाही में उपभोक्ता महंगाई 0.5-0.6 प्रतिशत अंक अधिक रहेगी। चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5.1 फीसदी हो सकती है।

क्या नीतिगत दरें बढ़ेंगी?

विनिर्माता बढ़ी हुई ऊर्जा लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। हाल ही में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। इन सभी कारकों से महंगाई पर दबाव बढ़ रहा है। एसएंडपी को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीतिगत दर में बढ़ोतरी हो सकती है। यह महंगाई को नियंत्रित करने का एक उपाय हो सकता है।

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