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एविएशन: महंगे ईंधन से इंडिगो को ₹1,879 करोड़ का घाटा, सीईओ बोले- किराया बढ़ाने के अलावा विकल्प नहीं

Thu, 29 Oct 2026 06:04 PM IST
कुमार विवेक बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 29 Oct 2026 06:04 PM IST
सार

  • इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने कहा कि इंडिगो की लागत संरचना पहले से ही काफी कुशल है। कंपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और पर्याप्त नकदी उपलब्धता के साथ काम कर रही है।
  • इंडिगो को सितंबर तिमाही में ₹1,879 करोड़ का घाटा क्यों हुआ? जानिए ईंधन खर्च में 67.2% की बढ़ोतरी, सीईओ विली वॉल्श के बयान और हवाई किराये पर इसके संभावित असर की पूरी जानकारी।

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IndiGo Posts ₹1,879 Crore Loss as Fuel Costs Surge; CEO Willie Walsh Says Fare Hikes Unavoidable
इंडिगो - फोटो : X-@IndiGo6E

विस्तार

हवाई ईंधन की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मुनाफे को बड़ा झटका दिया है। सितंबर तिमाही में कंपनी को ₹1,879.1 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि इस दौरान उसकी कुल आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में सवाल है कि जब टिकटों की मांग बढ़ाने के लिए कम किराया जरूरी है, तो एयरलाइन को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? 

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इंडिगो के सीईटो विली वॉल्श का कहना है कि कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और कम लागत वाला कारोबार उसे राहत देते हैं, लेकिन ईंधन पर बढ़ते खर्च की भरपाई के लिए किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है।

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क्या इंडिगो की कमाई बढ़ने के बावजूद घाटा हो गया?

इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में बढ़कर ₹24,311.9 करोड़ हो गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह ₹19,599.5 करोड़ थी। यानी कंपनी की आय में लगभग 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

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हालांकि, आय बढ़ने के बावजूद कंपनी मुनाफा नहीं कमा सकी। सितंबर तिमाही में उसका कुल खर्च बढ़कर ₹26,188.4 करोड़ पहुंच गया। इस तरह कुल खर्च, कुल आय से ₹1,876.5 करोड़ अधिक रहा। कंपनी ने इस अवधि में ₹1,879.1 करोड़ का घाटा दर्ज किया।

इसका सीधा मतलब है कि कंपनी की कमाई बढ़ रही है, लेकिन परिचालन लागत में तेज वृद्धि उस बढ़त का फायदा मुनाफे में बदलने नहीं दे रही है।

इंडिगो का घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

एयरलाइन के लिए सबसे बड़ी परेशानी विमान ईंधन की कीमतों में उछाल है। सितंबर तिमाही में IndiGo का विमान ईंधन पर खर्च 67.2 फीसदी बढ़कर ₹9,966.8 करोड़ हो गया।

ईंधन किसी एयरलाइन के लिए सबसे अहम खर्चों में से एक है। विमान जितनी उड़ानें भरते हैं, ईंधन की खपत उतनी ही बढ़ती है। जब ईंधन महंगा होता है, तो उड़ानों की लागत भी बढ़ जाती है।

इसके अलावा रुपये की कमजोरी ने भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाला। विमानन क्षेत्र में कई खर्च विदेशी मुद्रा में होते हैं। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर एयरलाइन के लिए इन खर्चों का भुगतान महंगा पड़ सकता है।

कंपनी के मुताबिक, असाधारण रूप से ऊंची ईंधन लागत और रुपये में गिरावट ने उसकी लाभप्रदता को प्रभावित किया।

क्या इंडिगो अपने खर्च में बड़ी कटौती करेगी?

अगस्त में सीईओ का पद संभालने के बाद पहली मीडिया बातचीत में विली वॉल्श ने कहा कि इंडिगो की लागत संरचना पहले से ही काफी कुशल है। कंपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और पर्याप्त नकदी उपलब्धता के साथ काम कर रही है।

वॉल्श के मुताबिक, मजबूत नकदी स्थिति इंडिगो को ऐसे विकल्प देती है, जो उसके कई प्रतिस्पर्धियों के पास उपलब्ध नहीं हो सकते। कंपनी जरूरत के अनुसार कुछ खर्च कम करने के उपायों पर विचार कर सकती है, लेकिन फिलहाल बड़े पैमाने पर लागत कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

इंडिगो ने बताया कि कि उसका कारोबार पहले से कम लागत पर चलता है। इसलिए खर्च घटाने के लिए बड़े कदम उठाने के बजाय वह दूसरी रणनीतियों से बढ़ती लागत का सामना करना चाहती है।

क्या अब हवाई टिकटों का किराया और बढ़ेगा?

ईंधन की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ी है। इसका असर हवाई किराये पर भी पड़ रहा है। इंडिगो समेत दूसरी एयरलाइंस टिकटों पर ईंधन अधिभार यानी फ्यूल सरचार्ज भी लगा रही हैं।

वॉल्श ने कहा कि इंडिगो किराये में होने वाली बढ़ोतरी को कम से कम रखने की कोशिश करना चाहती है। भारत में कम किराये ने एयरलाइन को हवाई यात्रा की मांग बढ़ाने में मदद की है। लेकिन ईंधन बिल में हुई भारी बढ़ोतरी की भरपाई के लिए किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है।

इसका अर्थ है कि एयरलाइन लागत का पूरा बोझ खुद उठाने के बजाय उसका कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल सकती है। हालांकि, वॉल्श ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किराये में कितनी बढ़ोतरी होगी।

यात्रियों और विमानन क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस पर किराया बढ़ाने का दबाव बना रह सकता है। इससे यात्रियों का हवाई सफर महंगा हो सकता है। दूसरी ओर, कम किराया हवाई यात्रा की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए एयरलाइंस के सामने लागत की भरपाई और यात्रियों को किफायती टिकट उपलब्ध कराने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

इंडिगो के लिए मजबूत नकदी स्थिति और कुशल लागत ढांचा राहत दे सकते हैं, लेकिन सितंबर तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती आय भी ईंधन खर्च के असर को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाई।



आने वाले समय में कंपनी की लाभप्रदता पर ईंधन की कीमतों, रुपये की चाल और किराये में बढ़ोतरी का असर अहम रहेगा। फिलहाल एयरलाइन का रुख साफ है- वह बड़े खर्च कटौती कार्यक्रम के बजाय परिचालन दक्षता बनाए रखते हुए बढ़ती लागत की भरपाई के लिए किराये में जरूरी बदलाव करने पर विचार करेगी।

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