भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बड़ा अपडेट: सरकार बोली- मार्च तक आएगा कानूनी मसौदा; 4-5 दिनों में संयुक्त बयान
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अहम प्रगति हुई है। दोनों देश अगले 4-5 दिनों में संयुक्त बयान जारी कर उस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। वहीं, व्यापार समझौते के पहले चरण का कानूनी मसौदा मार्च के मध्य तक तैयार होने की संभावना है।
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देश अगले 4 से 5 दिनों में संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
व्यापार समझौते का पहला चरण लगभग तैयार
सरकार ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण लगभग तैयार है। उन्होंने बताया कि संयुक्त बयान के बाद इस समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा और मार्च के मध्य तक फॉर्मल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जॉइंट स्टेटमेंट के जारी होने के बाद ट्रंप सरकार अमेरिकी टैरिफ को 18 फीसदी तक घटाने के लिए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करेगी।
भारत और जीसीसी ने किए टीओआर पर हस्ताक्षर
उद्योग मंत्री ने गुरुवार को भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान कहा कि अमेरिका के साथ बढ़ते कारोबारी जुड़ाव के तहत अमेरिकी विमान, इंजन और अन्य उत्पादों के लिए भारत के ऑर्डर अकेले 100 अरब डॉलर से अधिक हो जाएंगे।
गोयल ने कहा कि भारत और जीसीसी के बीच व्यापारिक रिश्ते 5,000 साल पुराने हैं और यह समझौता वस्तुओं व सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सरकार विकसित देशों के साथ एफटीए पर सक्रियता से काम कर रही है।
मंत्री के मुताबिक, इस समझौते से एमएसएमई, किसान, मछुआरे, युवा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों को इससे उल्लेखनीय फायदा होने की उम्मीद है।
भारत-अमेरिका हैं एक-दूसरे के पूरक
उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा। समझौते की प्रक्रिया पर तकनीकी स्पष्टता देते हुए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ एग्जीक्यूटिव टैरिफ हैं, जबकि भारत के टैरिफ एमएफएन (सबसे पसंदीदा राष्ट्र) श्रेणी में आते हैं। ऐसे में भारत में एमएफएन टैरिफ में कमी कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ही संभव होगी।
गोयल ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा के बाद से दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। 2 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई फोन बातचीत के बाद इस ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा हुई थी।
मंत्री ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि करीब एक साल चली वार्ताओं के दौरान दोनों पक्षों ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की। भारत ने खास तौर पर कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों को संरक्षण दिया, जबकि अमेरिका के लिए अहम क्षेत्रों पर भी संतुलन बनाया गया।
यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया था, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत-अमेरिका व्यापार को 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
