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AAY: अब 'अंत्योदय' परिवारों को प्रति व्यक्ति सात किलो अनाज देने की तैयारी, जानिए सरकार के नए प्रस्ताव में क्या

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 25 Jun 2026 03:40 PM IST
सार

अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के राशन नियमों में अहम बदलाव की तैयारी है। जानिए सरकार कैसे राशन लिमिट को प्रति व्यक्ति 7 किलो करने जा रही है और इसका बड़े गरीब परिवारों पर क्या असर होगा।

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Mega Overhaul in Ration Rules: Govt Proposes 7kg Per Person for 'Antyodaya' Families to Fix Distribution
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

देश में 'गरीबों में भी सबसे गरीब' माने जाने वाले तबके के लिए राशन से जुड़ी एक अहम नीतिगत पहल होने जा रही है। सरकार 'अंत्योदय अन्न योजना' (एएवाई) के तहत मिलने वाले राशन के आवंटन नियमों में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य वितरण प्रणाली में मौजूद असमानताओं को दूर कर बड़े और गरीब परिवारों को राहत देना है।

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सरकार 'अंत्योदय अन्न योजना' में क्या नया बदलाव करने जा रही है?

खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में खाद्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा जारी करते हुए आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। मंत्रालय ने इच्छुक लोगों से 13 जुलाई तक अपने सुझाव भेजने का आग्रह किया है, जिसके बाद प्राप्त टिप्पणियों के आधार पर विधेयक के अंतिम स्वरूप पर विचार किया जाएगा।

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मौजूदा समय में सरकार अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत हर परिवार को हर महीने 35 किलो खाद्यान्न (अनाज) एकमुश्त देती है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने अब इस तय सीमा को बदलकर प्रति व्यक्ति 7 किलो प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, एक परिवार के लिए राशन की अधिकतम सीमा (कैप) अभी भी 35 किलो ही तय रहेगी।

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राशन के पुराने नियमों में सरकार को क्या खामी नजर आई?

वर्तमान कानून के अनुसार, एएवाई परिवारों को परिवार के सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना फ्लैट 35 किलो राशन दिया जाता है, जबकि इसके उलट 'प्राथमिकता वाले परिवारों' को प्रति व्यक्ति 5 किलो राशन मिलता है। सरकार का मानना है कि इस ढांचे के कारण एएवाई योजना के बड़े परिवारों को 'प्राथमिकता वाले परिवारों' की तुलना में प्रति व्यक्ति कम राशन मिल पाता था, जबकि प्राथमिकता वाले परिवार एएवाई लाभार्थियों की तुलना में कम संवेदनशील माने जाते हैं। मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पुरानी व्यवस्था सबसे कमजोर परिवारों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, लेकिन परिवार के आकार के कारण इससे भारी असमानता पैदा हो रही थी।

नए नियमों के लागू होने से परिवारों को अनाज कैसे मिलेगा?

नए प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, राशन का आवंटन परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी एएवाई परिवार में केवल दो सदस्य हैं, तो उन्हें हर महीने 14 किलो राशन मिलेगा। वहीं, यदि परिवार में पांच या उससे अधिक सदस्य हैं, तो वे मौजूदा अधिकतम सीमा यानी 35 किलो राशन के हकदार होंगे। छोटे परिवारों के लिए कुल आवंटन में शायद बहुत कम बदलाव हो, लेकिन बड़े परिवारों को इस नए नियम से सीधा फायदा होगा क्योंकि उनका राशन परिवार के आकार के हिसाब से बढ़ेगा। वर्तमान में एएवाई और प्राथमिकता वाले दोनों तरह के परिवारों को चावल और गेहूं मुफ्त में बांटा जाता है।

सरकार इस बदलाव को कानूनी रूप कैसे देगी?

इस बड़े बदलाव को लागू करने के लिए सरकार ने 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013' में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। खाद्य मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026' का मसौदा तैयार कर लिया है और 13 जुलाई तक इस पर आम जनता से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

इस पूरी कवायद के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य क्या है?

सरकार ने इस संशोधन को खाद्य और पोषण सुरक्षा मजबूत करने की अपनी व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया है। इसे "मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण"  के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि सभी को उचित मूल्य पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन की पहुंच सुनिश्चित की जा सके और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के मूल उद्देश्यों को सही मायने में हासिल किया जा सके।

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