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जलवायु बचाने की लड़ाई में भारत की बड़ी कोशिश: खर्च बढ़कर जीडीपी का 5.6% हुआ, जानिए क्या बोलीं वित्त मंत्री

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 14 Feb 2026 09:02 PM IST
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सार

Nirmala Sitharaman: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख में कहा कि भारत ने जलवायु परिवार्तन पर अपने खर्च को बढ़ा कर जीडीपी का 5.6% कर दिया है। उन्होंने कहा कि बजट 2026-27 में कार्बन उत्सर्जन से जुड़ी लक्ष्यों पर विशेष जोर दिया गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

Nirmala Sitharaman Climate Action Investment Munich Security Conference India GDP Carbon Capture Strategy
निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के वैश्विक मंच से भारत ने जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में अपनी गंभीरता और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत संदेश दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को साफ-साफ संदेश दिया दिया भारत क्लाइमेट एक्शन के लिए बाहरी वित्तपोषण का इंतजार नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में भारत ने इस दिशा में अपना खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.6 प्रतिशत कर दिया है, जो देश की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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आत्मनिर्भरता और निवेश में भारी उछाल
एक पैनल चर्चा में भाग लेते हुए वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए भारत की बदलती रणनीति को सामने रखा। उन्होंने कहा, "छह साल पहले, हम अपनी जीडीपी का लगभग 3.7 प्रतिशत क्लाइमेट एक्शन पर खर्च कर रहे थे। आज यह आंकड़ा बढ़कर 5.6 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है"।
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सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने खुद निवेश किया है। उन्होंने विकसित देशों की ओर इशारा करते हुए कहा, "हम पैसे या तकनीक के कहीं और से आने का इंतजार नहीं कर रहे, हालांकि उन्हें आना चाहिए"। वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ग्लोबल साउथ लगातार क्लाइमेट फाइनेंसिंग में देरी का मुद्दा उठा रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति का ब्योरा देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि भारत ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताओं' का दो-तिहाई हिस्सा लक्ष्य तिथि से चार साल पहले ही हासिल कर लिया है।

भविष्य की रूपरेखा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में कार्बन कैप्चर रणनीतियों को वित्तपोषित किया गया है। इसका मकसद पूरे देश में इन रणनीतियों को लागू करना है और इसके लिए प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
 
जिन देशों में प्रदूषण में कम योगदान दिया उनके लिए क्लाइमेट एक्शन के लिए कम भुगतान वाजिब
सीतारमण ने जलवायु कार्रवाई की लागत को लेकर एक महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दा उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि जिन देशों ने प्रदूषण में कम योगदान दिया है, उन्हें क्लाइमेट एक्शन के लिए कम भुगतान करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल उत्सर्जन नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। "हमें लचीलेपन और अनुकूलन पर भी ध्यान देना होगा। अन्यथा, हमें बहुत कुछ बलिदान करना पड़ेगा," उन्होंने कहा। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नहीं हो सकता कि कम उत्सर्जन करने वाले देशों को भी बराबर भुगतान करने के लिए कहा जाए; इसके लिए विभेदित उपचार की आवश्यकता है।

वित्त मंत्री का यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत जलवायु परिवर्तन को केवल मुद्दा नहीं, बल्कि एक आर्थिक जरूरत मान रहा है। जीडीपी के 5.6% का बड़ा निवेश और कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों को बजट (2026-27) में शामिल करना यह साबित करता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल वादों को नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई को तरजीह दे रहा है।

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