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आरबीआई बुलेटिन: भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है जीडीपी की मौजूदा स्थिति, सुधारों से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था की गति
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
Published by: लव गौर
Updated Thu, 22 Jan 2026 04:15 AM IST
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सार
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि के प्रारंभिक अनुमान भारतीय जीडीपी की मजबूती को दर्शाते हैं। ये आंकड़े भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की तरफ भी इशारा करते हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति भविष्य के लिए खुशनुमा उम्मीद जगाती है। साथ ही, वैश्विक जोखिम और नीतिगत अनिश्चितताओं के बावजूद देश सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
आरबीआई ने बुधवार को जारी जनवरी बुलेटिन में कहा, वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से हुई। इनमें वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप, पश्चिम एशिया में तनातनी, रूस-यूक्रेन शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और ग्रीनलैंड विवाद शामिल हैं। इन घटनाओं से वैश्विक जोखिम एवं नीतिगत अस्थिरता बढ़ी, लेकिन भारत की मौजूदा स्थिति आगे के लिए उम्मीद जगाती है।
बुलेटिन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि के प्रारंभिक अनुमान भारतीय जीडीपी की मजबूती को दर्शाते हैं। ये आंकड़े भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की तरफ भी इशारा करते हैं।
दिसंबर, 2025 के उच्च-आवृत्ति संकेतकों से पता चला कि घरेलू मांग में मजबूती और वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। खुदरा महंगाई दिसंबर में थोड़ा बढ़ी, लेकिन आरबीआई के संतोषजनक स्तर के निचले स्तर से नीचे ही रही। बुलेटिन में कहा गया है, भारत ने निर्यात विविधीकरण और मजबूती के प्रयास तेज किए हैं। भारत 14 देशों या समूहों के साथ व्यापार वार्ता में शामिल है।
वित्तीय संसाधनों में बढ़ा प्रवाह, कुल कर्ज में वृद्धि
ये भी पढ़ें: आरबीआई की रिपोर्ट: महंगे प्रीमियम के चलते बीमा पॉलिसी सरेंडर कर रहे लोग, मैच्योरिटी तक सिर्फ 35% पॉलिसीधारक
सुधारों का वर्ष रहा 2025
बुलेटिन के मुताबिक, 2025 में देश में कई बड़े आर्थिक सुधार भी हुए, जिनमें कर ढांचे का तर्कसंगत बनाना, नए श्रम कानूनों को लागू करना और वित्तीय क्षेत्र में उदारीकरण शामिल हैं। इनसे दीर्घकालिक वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
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आरबीआई ने बुधवार को जारी जनवरी बुलेटिन में कहा, वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से हुई। इनमें वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप, पश्चिम एशिया में तनातनी, रूस-यूक्रेन शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और ग्रीनलैंड विवाद शामिल हैं। इन घटनाओं से वैश्विक जोखिम एवं नीतिगत अस्थिरता बढ़ी, लेकिन भारत की मौजूदा स्थिति आगे के लिए उम्मीद जगाती है।
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बुलेटिन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि के प्रारंभिक अनुमान भारतीय जीडीपी की मजबूती को दर्शाते हैं। ये आंकड़े भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की तरफ भी इशारा करते हैं।
दिसंबर, 2025 के उच्च-आवृत्ति संकेतकों से पता चला कि घरेलू मांग में मजबूती और वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। खुदरा महंगाई दिसंबर में थोड़ा बढ़ी, लेकिन आरबीआई के संतोषजनक स्तर के निचले स्तर से नीचे ही रही। बुलेटिन में कहा गया है, भारत ने निर्यात विविधीकरण और मजबूती के प्रयास तेज किए हैं। भारत 14 देशों या समूहों के साथ व्यापार वार्ता में शामिल है।
वित्तीय संसाधनों में बढ़ा प्रवाह, कुल कर्ज में वृद्धि
- वित्तीय संसाधनों के प्रवाह में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- अप्रैल-दिसंबर 2025 तक वाणिज्यिक क्षेत्र में कुल वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़कर 30.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।
- जो पिछले साल 21.3 लाख करोड़ रुपये था। बैंक स्रोतों के अलावा गैर-बैंक स्रोतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- दिसंबर, 2025 के अंत तक वाणिज्यिक क्षेत्र का कुल कर्ज 15 फीसदी बढ़ा, जिसमें गैर-बैंक स्रोतों ने 16.4 फीसदी की बढ़त दर्ज की।
- अप्रैल-नवंबर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में सालाना आधार पर तेजी रही।
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सुधारों का वर्ष रहा 2025
बुलेटिन के मुताबिक, 2025 में देश में कई बड़े आर्थिक सुधार भी हुए, जिनमें कर ढांचे का तर्कसंगत बनाना, नए श्रम कानूनों को लागू करना और वित्तीय क्षेत्र में उदारीकरण शामिल हैं। इनसे दीर्घकालिक वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।