Budget 2026: 'रियल एस्टेट से जुड़ी पॉलिसी सुधरे, होम लोन की लागत घटे', जानिए सेक्टर को बजट में क्या चाहिए
रियल एस्टेट उद्योग बजट 2026 के बजट में सरकार से उद्योग को बढ़ावा देने के लिए होम लोन की लागत को कम करने पर ध्यान देने की मांग कर रहा है। इससे रुके हुए प्रोजेक्ट को गति मिलेगी। आइए जानते हैं उद्योग ने क्या-क्या सुझाव दिए।
विस्तार
बजट 2026 में सरकार को रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ी पॉलिसी पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आवास की मांग को पुनर्जीवित करने और रुके हुए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उद्योग का कहना है कि बढ़ती हुई जमीनों की कीमतों के साथ ही निर्माण लागत की वजह से महानगरों में आवासीय मांग प्रभावित हो रही है।
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रेपो रेट में कटौती से आवासीय बाजार को सहारा मिला
नारेडको महाराष्ट्र की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और नाहर ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन मंजू याज्ञिक ने कहा रियल एस्टेट सेक्टर को बजट 2026 में ऐसे ठोस उपायों की उम्मींद है, जो घर के स्वामित्व को सार्थक रूप से बढ़ावा दे और आवासीय इकोसिस्टम को मजबूत करें। विशेष रूप से पहली बार घर खरीदने वाले और मध्यम आय वर्ग के खरीदार बढ़ती आवासीय कीमतों और होम लोन की लागत से लगातार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, हाल ही में आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती ने आवासीय बाजार के लिए सकरात्मक संकेत दिया है और किफायती आवास बाजार की धारणा में सुधार भी हुआ है। ऐसे में बजट के जरिए जरूरी वित्तीय समर्थन देकर इस गति को बढ़ाया जा सकता है।
पहली बार घर खरीदने वालों और मध्यमवर्ग पर हो फोकस
याज्ञिक का कहना है, इस बजट से एक प्रमुख अपेक्षा होम लोन की प्रभावी लागत को कम करने पर नए सिरे से ध्यान देने की है। साथ ही बढ़ी हुई ब्याज सब्सिडी, लंबे ओर अधिक लचीले लोन टेन्योर और पहली बार घर खरीदने वालों को प्रोत्साहित करने, नीतिगत ब्याज दरों में कटौती से वास्तविक मासिक ईएमआई को राहत में बदलने में मदद कर सकते हैं। खासकर बड़े शहरों में जहां आवास की वहन क्षमता अब भी चुनौती बनी हुई है।
डेवलपर्स पहली बार घर खरीदने वालों के लिए, विशेष रूप से मध्यम आय वर्ग के उन लोगों के लिए, जो वर्तमान में किफायती आवास लाभों के दायरे से बाहर हैं, मजबूत प्रोत्साहन चाहते हैं। मध्यम आय वर्ग की आवास परियोजनाओं में उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा 45 लाख रुपये की वहनीय सीमा से ऊपर है और इसलिए उन्हें 1 प्रतिशत जीएसटी और कर प्रोत्साहनों का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीमा को बढ़ाकर लगभग 90 लाख रुपये करने, धारा 80EEA के तहत अतिरिक्त ब्याज कटौती को फिर से शुरू करने और डेवलपर्स के लिए ऋण को आसान बनाने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, इन कदमों से संपत्ति की कीमतें और खरीदारों के लिए मासिक ईएमआई दोनों कम हो सकती हैं।
किफायती आवास सीमाओं पर ध्यान देने की मांग
इस क्षेत्र की प्रमुख मांगों में से एक किफायती आवास के लिए निर्धारित 45 लाख रुपये की सीमा में संशोधन करना है , जिसके बारे में डेवलपर्स का कहना है कि यह अब अधिकांश शहरी क्षेत्रों में बाजार की स्थितियों को नहीं दर्शाता है। बजट 2026 के नजदीक आने के साथ ही रियल एस्टेट क्षेत्र सरकार से शहरी आवास की कीमतों की वास्तविकताओं के अनुरूप कर नीतियों के संबंध में स्पष्ट संकेत की प्रतीक्षा कर रहा है। किफायती आवास श्रेणी के लिए मौजूदा 45 लाख रुपये की सीमा और उससे जुड़ा 1 प्रतिशत जीएसटी लाभ अधिकांश विकास क्षेत्रों में भूमि और निर्माण लागत के अनुरूप नहीं है। इसलिए उद्योग मूल्य सीमा को बढ़ाकर 80-90 लाख रुपये करने और निर्माण अनुबंधों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत करने से रुकी हुई परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है और आवास की नई आपूर्ति को बढ़ाने की मांग कर रहा है।
स्क्वायर यार्ड्स के संस्थापक और सीईओ तनुज शोरी कहते हैं कि 2026 के आम बजट से मध्यम आय वाले घर खरीदारों के लिए अधिक कर छूट, उच्च ब्याज कटौती सीमा और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेशक के जरिए किफायती घरों को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है। रियल एस्टेट के लिए नीतिगत समर्थन की अपेक्षा हम इस बजट में कर रहे हैं, जो किफायती और मिड मार्केट में सप्लाई को बढ़ावा दे, क्योंकि हाल के दिनों में अधिकतर ऐसे प्रोजेक्ट पेश किए गए हैं, जो महंगे हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर अर्थव्यवस्था की ग्रोथ देने वाला सेक्टर बनकर उभरा है
अजमेरा ग्रुप के डायरेक्टर, कॉर्पोरेट अफेयर्स धवल अजमेरा कहते हैं, रियल एस्टेट सेक्टर अर्थव्यवस्था की ग्रोथ देने वाला सेक्टर बनकर उभरा है, इसी गति को तेज बनाए रखने के लिए हमें उम्मींद है कि सरकार आगमी बजट में पॉलिसी सुधारों और उपचारात्मक उपायों की घोषणा करेगी। जिससे घर खरीदने वालों और डेवलपर्स दोनों को फायदा होगा। इसके साथ ही सेक्टर को उम्मीद है कि होम लोन की प्रभावी लागत को कम करने पर नए सिरे से ध्यान दे और खरीदारों के दिए जाने वाले ब्याज पर टैक्स बेनिफिट मिले, चाहे लोन कितना भी बड़ा हो। यह अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित होगा और भारतीय रियल एस्टेट इकोसिस्टम पर इसका सकरात्मक असर होगा।
सरकार से इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम शुरू करने की अपील
धवल ने बताया कि भारत को नेट जीरो (इसका लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है) में बदलने की दिशा में तेजी लाने की जरूरत भी उतनी ही जरूरी है। इस बारे में, हम मंत्रालय से एक इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम शुरू करने की अपील करते हैं- खासकर ग्रीन-रेटेड रियल एस्टेट डेट के लिए। जबकि डेवलपर्स सस्टेनेबल,आईजीबीसी (भारतीय हरित भवन परिषद) और एलईईडी (ऊर्जा और डिजाइन में नेतृत्व) सर्टिफाइड प्रोजेक्ट बनाने के लिए उत्सुक हैं, जिसमें पूंजी की अधिक लागत एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। इस एक सुधार उपाय के तौर पर, ग्रीन बॉन्ड पर सरकार की तरफ से 200-300 आधार अंकों की सब्सिडी सीधे तौर पर उधार लेने की लागत को कम कर सकती है, जिससे ग्रीन प्रोजेक्ट्स केवल उम्मीदों पर खरे उतरने के बजाय आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं।