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Rupee Vs Dollar: डॉलर के मुकाबले 119 पैसे मजबूत हुआ रुपया, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद आई तेजी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रिया दुबे
Updated Tue, 03 Feb 2026 11:44 AM IST
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सार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत टैरिफ घटकर 18% होने से रुपये में तेज मजबूती आई और यह डॉलर के मुकाबले 119 पैसे चढ़कर 90.30 पर खुला। इस कदम से भारत की सापेक्ष स्थिति मजबूत हुई है और एफआईआई की वापसी की उम्मीद बढ़ी है।
डॉलर बनाम रुपया
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत टैरिफ घटकर 18 फीसदी होने के बाद मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपये में तेज मजबूती देखने को मिली। रुपया 119 पैसे चढ़कर डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में यह पिछले बंद 91.49 से बड़ी बढ़त मानी जा रही है।
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फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि 18 फीसदी टैरिफ ने कहानी बदल दी है, जिससे भारत की सापेक्ष स्थिति बेहतर हुई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी की संभावना बढ़ी है।
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फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, करीब नौ महीने की देरी के बाद घोषित यह व्यापार समझौता,जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषित किया और प्रधानमंत्री मोदी ने समर्थन दिया भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में निर्यात में बढ़त देता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बिकवाली करने वाले FII अब भारतीय शेयरों में खरीदारी कर सकते हैं। हालांकि, आगे की दिशा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के रुख पर नजर जरूरी होगी।
वैश्विक मोर्चे पर डॉलर इंडेक्स 0.20 फीसदी फिसलकर 97.43 पर रहा, जबकि ब्रेंट कच्चा तेल 0.41 फीसदी गिरकर 66.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी रही। सेंसेक्स 2,138 अंक (2.62%) उछलकर 83,804.54 पर और निफ्टी 607 अंक (2.42%) बढ़कर 25,695.40 पर पहुंच गया।
हालांकि, हालिया दबाव भी कम नहीं रहा है। 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा, साल भर में करीब 5% और सिर्फ जनवरी में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अगस्त के अंत में वाशिंगटन द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद से भारतीय शेयर और रुपया दबाव में रहे, जिससे 2025 में उभरते बाजारों में ये कमजोर प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल रहे। विश्लेषकों के मुताबिक, यह व्यापार समझौता अमेरिका-भारत व्यापार विवाद से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कम करता है और नए निवेश के लिए माहौल बेहतर बनाता है।
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