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Tata Sons: क्या नोएल की शर्तों के कारण चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का फैसला टला? जानिए बोर्ड मीटिंग का हाल

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 24 Feb 2026 08:49 PM IST
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सार

टाटा संस की बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फैसला टला। नोएल टाटा ने कर्ज और कंपनियों के घाटे को लेकर शर्तें रखीं। पढ़ें बोर्ड मीटिंग से क्या जानकारी बाहर आई।

Tata Sons chairman, N Chandrasekaran reappointment deferred, Noel Tata conditions, Tata Group listing rules
एन चंद्रशेखरन - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के विस्तार के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। मंगलवार को समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में हुई एक लंबी बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा रखी गई शर्तों के बाद यह कदम उठाया गया, जो कंपनी के शीर्ष नेतृत्व के भीतर संभावित मतभेदों का संकेत देता है।

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नोएल टाटा की चिंताएं और शर्तें
फरवरी 2027 में 62 वर्षीय चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने कुछ समूह कंपनियों में हो रहे घाटे और टाटा संस द्वारा कर्ज (debt) बढ़ाए जाने पर चिंता जताई। उनका मानना था कि कर्ज बढ़ने से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहां समूह को शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए मजबूर होना पड़े। नोएल टाटा टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने इसके खिलाफ एक लिखित प्रतिबद्धता की मांग की।
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चंद्रशेखर के साथ कौन, विरोध किसका?
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बैठक के दौरान वेणु श्रीनिवासन, हरीश मनवानी, अनीता जॉर्ज और सौरभ अग्रवाल सहित चार अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का पूरा समर्थन किया। इन सदस्यों का मानना था कि एक कंपनी के घाटे के कारण समूह के समग्र शानदार प्रदर्शन और चंद्रशेखरन के वर्षों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, लिस्टिंग के मुद्दे पर चंद्रशेखरन ने साफ किया कि इसके न होने की पक्की प्रतिबद्धता देना मुश्किल है क्योंकि यह भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों पर निर्भर करता है। 

आरबीआई के नियमों के तहत 15 संस्थाओं (जिनमें टाटा संस शामिल है) को 30 सितंबर, 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होने की समय सीमा दी गई थी। इस नियम से बचने के लिए टाटा ने अपने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) पंजीकरण को सरेंडर करने का आवेदन किया है, जिस पर अभी केंद्रीय बैंक का अंतिम फैसला आना बाकी है। 

चंद्रशेखरन का रुख और समूह में उनका योगदान
बैठक में जब कुछ निदेशकों ने पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर मतदान  कराने का सुझाव दिया, तो चंद्रशेखरन ने खुद इस फैसले को टालने का अनुरोध किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक निदेशक के अनुरोध के कारण उन्होंने इसे टालने की सिफारिश की। 

फरवरी 2017 में चेयरमैन बनने के बाद से उन्होंने 15 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के राजस्व और मुनाफे को लगभग दोगुना कर दिया है। उनके कार्यकाल में एयर इंडिया का अधिग्रहण, भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा की योजना और टीसीएस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आगे बढ़ाने जैसे बड़े रणनीतिक कदम उठाए गए हैं।

क्या है टाटा समूह का इतिहास?
1868 में जमशेदजी नुसरवानजी टाटा की ओर से स्थापित यह समूह अपने 156 साल के इतिहास में ज्यादातर समय टाटा परिवार के नेतृत्व में ही रहा है। 2012 में रतन टाटा के पद छोड़ने के बाद साइरस मिस्त्री ने कमान संभाली थी, जिन्हें 2016 में पद से हटा दिया गया था। 2022 में मिस्त्री और 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया। 

टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है, समूह के रणनीतिक निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाता है। वहीं 18 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप सबसे बड़ा अल्पसंख्यक शेयरधारक है और वह भी लिस्टिंग की मांग कर रहा है। टाटा संस वर्तमान में करीब 30 ऑपरेटिंग कंपनियों का पोर्टफोलियो संभालती है, जिनमें जगुआर लैंड रोवर, टीसीएस और टाटा मोटर्स शामिल हैं। अगली बोर्ड बैठक की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन साफ है कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच समाधान निकलने के बाद ही नेतृत्व पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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