बढ़ते विमान हादसों पर DGCA सख्त: नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स पर जीरो टॉलरेंस नीति, नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई तय
देश में बढ़ती विमान दुर्घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन नियामक (डीजीसीए) ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स पर कड़े सुरक्षा नियम लागू करने का एलान किया है। झारखंड एयर एंबुलेंस हादसे और बारामती में अजित पवार निजी जेट दुर्घटना के बाद बुलाई गई बैठक में डीजीसीए ने साफ किया कि सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। अब नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।
विस्तार
देश में विमान दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत अब एविएशन वॉचडॉग डीजीसीए ने एक आधिकारिक बयान जारी कर नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के लिए कड़े सुरक्षा उपायों और सख्त नियम लागू करने की घोषणा की है। बयान जारी डीजीसीए ने साफ कहा है कि अब सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बता दें कि यह फैसला उस बैठक के बाद लिया गया, जिसमें सभी एनएसओपी ऑपरेटर्स को बुलाया गया था। इसका बड़ा कारण है कि बीते सोमवार कोझारखंड के चतरा जिले में एक एयर एंबुलेंस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा पिछले महीने महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की बारामती में एक निजी जेट हादसे में मौत ने भी चिंता बढ़ाई थी।
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समझिए क्या होंगे नए नियम?
- अनिवार्य खुलासा नीति: अब सभी एनएसओपी ऑपरेटर्स को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, रखरखाव का रिकॉर्ड और पायलट के अनुभव जैसी अहम सुरक्षा जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
- सुरक्षा रैंकिंग सिस्टम: डीजीसीए सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स की सेफ्टी रैंकिंग तैयार करेगा और उसके मानक अपनी वेबसाइट पर जारी करेगा।
- कड़ी निगरानी और ऑडिट: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की रैंडम जांच बढ़ाई जाएगी। ADS-B डेटा, ईंधन रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग की क्रॉस-जांच होगी। इसके साथ ही गलत डेटा देने या बिना अनुमति उड़ान भरने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही: अगर किसी ऑपरेटर में लगातार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सिर्फ पायलट ही नहीं, बल्कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और मैनेजमेंट भी जिम्मेदार माने जाएंगे।
- पायलटों पर सख्ती: फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (एफडीटीएल) का उल्लंघन करने या खराब मौसम में न्यूनतम सुरक्षा मानकों से नीचे लैंडिंग की कोशिश करने पर पायलट का लाइसेंस 5 साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है।
- पुराने विमानों पर विशेष नजर: जिन विमानों की उम्र ज्यादा है या जिनका मालिकाना हक हाल में बदला है, उन पर खास निगरानी रखी जाएगी।
- एमआरओ सुविधाओं की जांच: जो एनएसओपी कंपनियां खुद की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा चलाती हैं, उनका ऑडिट होगा। यदि व्यवस्था ठीक नहीं मिली तो उन्हें अधिकृत बाहरी एजेंसियों से मेंटेनेंस कराना होगा।
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मौसम को लेकर भी सख्त निर्देश
इसके साथ ही डीजीसीए ने मौसम को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीजीसीए ने कहा कि कई हादसे मौसम की वजह से नहीं, बल्कि गलत निर्णय के कारण होते हैं। इसलिए ऑपरेटर्स को रियल-टाइम मौसम अपडेट सिस्टम लगाना होगा। पायलटों को नियमित प्रशिक्षण में मौसम से जुड़े जोखिमों पर ज्यादा ध्यान देना होगा और सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा।
कब पूरा होगा ऑडिट का पहला चरण?
जानकारी के अनुसार मार्च की शुरुआत में विशेष सुरक्षा ऑडिट का पहला चरण पूरा होगा। इसके बाद दूसरे चरण में बाकी एनएसओपी ऑपरेटर्स की जांच की जाएगी। मामले में डीजीसीए का कहना है कि इन कदमों का मकसद विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और यात्रियों का भरोसा मजबूत करना है।
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