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Jewelry Exports: अलग-अलग देशों से व्यापार समझौतों का आभूषण उद्योग को मिला फायदा, जानकार क्या कह रहे समझें

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Fri, 09 Jan 2026 04:21 PM IST
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सार

देश के रत्न और आभूषण का निर्यात अमेरिकी टैरिफ की वजह से प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से 30 प्रतिशत के निर्यात गिरा है। इसके बावजूद भारत द्वारा नए देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की वजह से भारत का रत्न और आभूषण निर्यात 2025 में स्थिर बना रहा।

The jewellery industry has benefited from trade agreements with various countries; what experts are saying
सोना - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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रत्न आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपी ) का कहना अमेरिका के टैरिफ के दबाव और चीन से कमजोर मांग के बाद भी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के समर्थन की वजह से भारत का रत्न और आभूषण निर्यात 2025 में स्थिर बना रहा। नवंबर तक निर्यात 19 अरब डॉलर रहा। जीजेईपीसी के अध्यक्ष  किरीट भंसाली ने बताया कि हमें नए बाजारों की वजह से निर्यात को 19 अरब डॉलर का बनाए रखा है। इसमें एफटीए से उद्योग को उल्लेखनीय समर्थन मिला है।

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नए मार्केट ने चीन की मंदी की भरपाई की

उन्होंने बताया कि चीन में आर्थिक मंदी देखी गई है, लेकिन डाइवर्सिफिकेशन से इसका असर कम किया गया है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पश्चिम एशइया, यूरोप और अफ्रीका जैसे देशों से चीन की मंदी की भरपाई की है। यूनाइटेड अरब अमीरात, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और ओमान जैसे देशों में एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है, और इस साल यूनाइटेड अरब अमीरात को शिपमेंट में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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अमेरिका से निर्यात 30 प्रतिशत से अधिक गिरा

उन्होंने बताया कि टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी बाजारों में हमारा निर्यात लगभग 30 प्रतिशत से अधिक कम हुआ है। भंसाली ने कहा कि अमेरिका और चीन में अनिश्चितता के बीच 2026 मुश्किल हो सकता है, लेकिन एफटीए से मार्केट डाइवर्सिफिकेशन और पॉलिसी सपोर्ट इस इलाके की एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी के लिए जरूरी बने रहेंगे। यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका हमारे लिए काफी बढ़ा बाजार है और उसे हम खोना नहीं चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमें उम्मींद है कि जल्द ही व्यापार वार्ता आगे बढ़ेगी।

 

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ओमान भारत के लिए नया व्यापार हब  

ओमान एक मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग हब के तौर पर उभर रहा है, जिसे अफ्रीका और जीसीसी ।(सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, बहरीन) के आसपास के देशों के लिए गेटवे के तौर पर देखा जा रहा है। भंसाली ने कहा कि जमीन, ह्यूमन रिसोर्स और लेबर वीजा की मदद से फैक्ट्री लगाने में दिलचस्पी बढ़ रही है।  इसके साथ कई और श्रेणियों जैसे कि पॉलिश किए गए हीरे और सोने के आभूषणों की मजबूत मांग बढ़ी है। यह भारतीय आभूषण निर्माताओं और निर्यातकों के लिए विविध प्रकार के बाजारों के अवसर प्रदान कर सकती है। इस इलाके में प्लेन गोल्ड ज्वेलरी की डिमांड 80 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

सोने की मांग बनी रहेगी

उद्योग का कहना है कि सोने की मांग देश में बनी हुई है, ग्राहकों ने सोने और चांदी की उच्च कीमतों को स्वीकार कर लिया है। बावजूद इसके सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है, इसलिए खरीदारी थोड़ी सतर्कता से की जा रही है। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच शादी ब्याह का मौसम होने से घरेलू मांग बढ़ सकती है। हालांकि कीमतें उच्च बनी रहने की उम्मीद है। मात्रा के हिसाब से देखें तो ऊंची कीमतों की वजह से निर्यात स्थिर रह सकता है, लेकिन वजन के आधार पर मात्रा इस कैलेंडर वर्ष में 15 से 20 प्रतिशत तक गिर सकती है।

प्राकृति हीरों की मांग ग्रोथ नजर आ रही है

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक हीरों की मांग 11 से 15 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है। फिलहाल अभी की कमजोरी के बाद हीरों की कीमतें स्थिर होती दिख रही हैं। मुझे यहां से कीमतों में गिरावट की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। यदि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार में गति आती है तो कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

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