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सेबी के नए नियमों से फंड ऑफ फंड्स बने अधिक आकर्षक, जानिए बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ये कैसे लाभकारी

Media Solutions Initiative Published by: मार्केटिंग डेस्क Updated Tue, 21 Apr 2026 02:49 PM IST
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Thematic investing Mutual funds SEBI new rules 2026 ICICI Prudential FoF Market volatility
निवेशक - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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साल 2026 की शुरुआत से ही भारतीय निवेशकों के लिए शेयर बाजार भारी चुनौतियां पेश कर रहा है। बाजार में आ रही लगातार गिरावट ने निवेशकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा ली है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में बाजार के विशेषज्ञों की लंबे समय तक निवेशित रहें वाली आम सलाह का पालन करना काफी मुश्किल हो जाता है। दैनिक समाचारों की सुर्खियों से निवेशकों में घबराहट बढ़ती है, जिससे वे अक्सर भावनाओं में बहकर निचले स्तर पर बाजार से बाहर निकलने या गलत प्रवृत्तियों के पीछे भागने जैसे फैसले ले लेते हैं। इस तनावपूर्ण माहौल में थीमेटिक इन्वेस्टिंग निवेशकों के मुख्य पोर्टफोलियो के लिए एक बेहतरीन रणनीतिक विकल्प बनकर उभर रहा है।

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लंबी अवधि के रुझानों का लाभ

भल्ला फाइनेंशियल सर्विसेज के निदेशक मानस भल्ला के अनुसार थीमेटिक इन्वेस्टिंग निवेशकों को डिजिटलीकरण, ऊर्जा संक्रमण या विनिर्माण विकास जैसे लंबी अवधि के और संरचनात्मक रुझानों में भाग लेने का शानदार मौका देता है। इसके तहत निवेशकों का पैसा पेशेवरों द्वारा तैयार किए गए शेयरों के एक खास बास्केट में लगाया जाता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस तरीके से निवेशकों को किसी विशेष थीम के भीतर व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग शेयरों को चुनने के भारी झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है।

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फंड ऑफ फंड्स की नई भूमिका

भल्ला ने कहा, "जो निवेशक बाजार की बारीकियों में उलझे बिना निवेश करना चाह रहे हैं, उनके लिए 'फंड ऑफ फंड्स' यानी एफओएफ एक बहुत ही मजबूत समाधान प्रस्तुत करते हैं। एक फंड ऑफ फंड्स अन्य म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में निवेश करता है, इससे निवेशकों को तुरंत अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों, निवेश शैलियों और फंड प्रबंधकों के बीच विविधता मिल जाती है। ऐतिहासिक रूप से इन पोर्टफोलियो में कुल इक्विटी (शेयर) निवेश आम तौर पर 80 से 100 प्रतिशत तक होता था। इतनी अधिक इक्विटी हिस्सेदारी होने के कारण स्वाभाविक रूप से इनकी प्रकृति काफी अस्थिर होती थी।"

जोखिम कम करने के लिए डेट फंड का सुरक्षा कवच

मानस भल्ला के अनुसार हाल ही में नियामक की ओर से हुए बदलावों के बाद इनमें से कुछ फंड्स को अब एग्रेसिव हाइब्रिड एक्टिव फंड ऑफ फंड्स के रूप में फिर से वर्गीकृत किया गया है। नए नियमों के तहत अब इन फंड्स में इक्विटी का आवंटन 65 से 80 प्रतिशत के बीच रखा जा सकता है। इस इक्विटी आवंटन में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में किया जाने वाला सामरिक निवेश भी शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस इक्विटी हिस्सेदारी के साथ अब 20 से 35 प्रतिशत के दायरे में बढ़ा हुआ डेट (ऋण) आवंटन भी जोड़ा गया है। ऋण बाजार में किया गया यह बढ़ा हुआ निवेश बाजार के झटकों के खिलाफ एक कुशन (सुरक्षा कवच) प्रदान करता है, जिससे निवेशकों की निवेश यात्रा आसान हो जाती है।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फंड का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड

भल्ला ने बताया कि इस नए बदलाव और शानदार प्रदर्शन के एक प्रमुख उदाहरण के तौर पर आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एग्रेसिव हाइब्रिड एक्टिव फंड ऑफ फंड्स को देखा जा सकता है। यह फंड पहली बार दिसंबर 2003 में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल थीमेटिक एडवांटेज फंड ऑफ फंड्स के नाम से बाजार में उतारा गया था। मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए तीन साल में 15.11 प्रतिशत, पांच साल में 14.91 प्रतिशत और दस साल में 14.47 प्रतिशत का चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रिटर्न दिया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ सेबी का नया ढांचा

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 'फंड ऑफ फंड्स' के लिए बनाए गए नए ढांचे के अनुरूप यह फंड 1 अप्रैल, 2026 से काम करना शुरू कर देगा। इस नए नियम के तहत यह अपनी कुल पूंजी का 65 से 80 प्रतिशत हिस्सा सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी योजनाओं में और 20 से 35 प्रतिशत हिस्सा सक्रिय रूप से प्रबंधित ऋण योजनाओं में निवेश करेगा। चूंकि पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय, विषयगत और मार्केट कैप-आधारित इक्विटी योजनाओं में निवेशित रहेगा, इसलिए यह फंड पहले की तरह ही विकासोन्मुखी बना रहेगा। हालांकि, अब इसके पास बाजार की अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच भी मौजूद होगा।

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