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ईरान युद्ध वैश्विक बाजार पर भारी: वॉल स्ट्रीट धड़ाम, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदें टूटने से नरमी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Fri, 20 Mar 2026 08:43 PM IST
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सार

ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदें खत्म होने से वैश्विक बाजार प्रभावित। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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शेयर बाजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान के युद्ध के कारण इस साल फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। इससे अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया के इस भू-राजनीतिक संकट ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है और निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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शेयर बाजार का हाल और प्रमुख आंकड़े

वॉल स्ट्रीट पर शुक्रवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। प्रमुख सूचकांक एसएंडपी 500  0.9 प्रतिशत गिर गया, जो इसकी लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है और पिछले एक साल में सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला है। इसके साथ ही, डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 285 अंक (0.6 प्रतिशत) टूट गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। 
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बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों पर असर

शेयर बाजारों में इस गिरावट का एक बड़ा कारण बॉन्ड मार्केट में यील्ड का तेजी से बढ़ना है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड युद्ध से पहले के 3.97 प्रतिशत से उछलकर 4.37 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, फेडरल रिजर्व के अनुमानों को ट्रैक करने वाली दो-वर्षीय यील्ड 3.79 प्रतिशत से बढ़कर 3.92 प्रतिशत हो गई है। यील्ड में इस उछाल से अमेरिकी परिवारों और कंपनियों के लिए कर्ज (जैसे मॉर्गेज) लेना महंगा हो जाएगा, जो अंततः अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे थे और युद्ध शुरू होने से पहले व्यापारियों को भी इस साल कम से कम दो रेट कट की उम्मीद थी। लेकिन तेल और गैस की कीमतों में लंबे समय तक उछाल और महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण, व्यापारियों ने दर कटौती का दांव वापस ले लिया है। स्थिति यह है कि कुछ विशेषज्ञ 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहे हैं। फेडरल रिजर्व के अलावा यूरोप, जापान और यूके के केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखा है।

कच्चे तेल का संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान ने अपने दुश्मनों के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। यह एक बेहद अहम जलमार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। हालांकि शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की स्थिरता आई, लेकिन ब्रेंट क्रूड 0.3 प्रतिशत बढ़कर 109.02 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 95.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गौरतलब है कि युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर था। 

कॉरपोरेट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन

  • सुपर माइक्रो कंप्यूटर: इस अमेरिकी कंपनी के शेयरों में 28 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। अमेरिकी सरकार ने कंपनी के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दो अन्य पर उन्नत एनवीडिया चिप्स वाले सर्वर चीन में तस्करी करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने आरोपियों को छुट्टी पर भेज दिया है और जांच में सहयोग कर रही है।
  • फेडेक्स: उम्मीद से बेहतर तिमाही मुनाफे के कारण लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडेक्स के शेयर 2.2 प्रतिशत चढ़ गए। 
  • वैश्विक सूचकांक: वॉल स्ट्रीट के बाहर, गुरुवार की भारी गिरावट के बाद यूरोप के बाजारों में और गिरावट आई। चीन के बाजार भी लुढ़क गए, हालांकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.3 प्रतिशत बढ़ने में सफल रहा।
कुल मिलाकर, अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। केंद्रीय बैंकों के पास अब अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करने का विकल्प बेहद सीमित है, जिससे आने वाले समय में वित्तीय बाजारों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

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