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इन गलतियों की वजह से मुसीबतों से घिरे अनिल अंबानी, इसलिए बिक रहीं उनकी कंपनियां

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sun, 17 Nov 2019 11:22 AM IST
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Anil Ambani facing problems due to these mistakes Reliance group in loss
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साल 2008 में रिलायंस कम्युनिकेशंस ( RCom ) के चेयरमैन अनिल अंबानी दुनिया के छठवें सबसे अमीर शख्स थे। लेकिन अब ऐसी नौबत आ गई है कि शनिवार को उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। अनिल अंबानी अरबपतियों के क्लब से भी बाहर हो गए हैं।

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दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी 

मौजूदा समय में रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही है। शुक्रवार को जारी तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी को 30 हजार करोड़ से अधिक का घाटा हुआ था। यह कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है। कर्ज चुकाने के लिए कंपनी अपनी संपत्तियों को बेच रही है। 

इन लोगों ने भी दिया इस्तीफा

अनिल अंबानी के अलावा छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने भी इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को इस्तीफा दिया। वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को इस्तीफा दिया था। 

11 साल में इतनी घटी संपत्ति

2008 में अनिल अंबानी के पास 42 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जो 11 साल बाद यानी 2019 में घटकर 5230 मिलियन डॉलर यानी करीब 3651 करोड़ रुपये हो गई है। बता दें कि इस संपत्ति में गिरवी वाले शेयर की कीमतें भी शामिल हैं। 

रिलायंस ग्रुप पर कुल 1.7 लाख करोड़ का कर्ज 

मार्च 2018 में रिलायंस ग्रुप का कुल कर्ज 1.7 लाख करोड़ रुपये था। 31 मार्च 2019 तक आरकॉम पर करीब 35,600 करोड़ रुपये का कर्ज था। 
रिलायंस पावर पर 30,200 करोड़ रुपये, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 17,800 करोड़ रुपये, रिलायंस कैपिटल पर 38,900 करोड़ रुपये और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग पर मार्च 2019 तक 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। 

आरकॉम की कुल देनदारियों में 23,327 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क और 4,987 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क शामिल है। आरकॉम और उसकी अनुषंगियों ने 1,210 करोड़ रुपये के ब्याज और 458 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय उतार-चढ़ाव के लिए प्रावधान नहीं किया है।

आइए जानते हैं कैसे अनिल अंबानी कारोबारी जिंदगी में डूबते चले गए।

Anil Ambani facing problems due to these mistakes Reliance group in loss

मुनाफे वाली कंपनी मिलने के बावजूद हुआ घाटा

साल 2005 में जब धीरूभाई अंबानी के 28,000 करोड़ रुपये के रिलायंस ग्रुप का बंटवारा हुआ था, तब मुनाफा कमाने वाला टेलिकॉम सेक्टर अनिल अंबानी को मिला था। साथ ही यह निर्णय लिया गया था कि आगामी 10 वर्षों तक बड़े भाई मुकेश इस क्षेत्र में दखल नहीं देंगे। लेकन तब भी कंपनी को घाटा होता चला गया। 

CDMA टेक्नोलॉजी थी अनिल अंबानी की गलती

जानकारों का मानना है कि साल 2002 में रिलायंस इन्फोकॉम की शुरुआत हुई थी। तब अनिल अंबानी ने सीडीएमए टेक्नोलॉजी को चुना था। इस टेक्नोलॉजी की एक बड़ी समस्या थी कि यह केवल 2G और 3G को सपोर्ट करती है। लेकिन भारत में तब 4G की शुरुआत होने वाली थी। इसलिए निवेश के बाद भी वह तकनीक में पिछड़ गए। अन्य टेलिकॉम कंपनियों ने GSM टेक्नोलॉजी को चुना था। 

इंफ्रास्ट्रक्चर व मनोरंजन में भी हुआ घाटा

इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर और मनोरंजन में भी उनको फायदा नहीं हुआ। साल 2014 में उनकी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां बड़े कर्ज में डूब गईं। कर्ज का भुगतान करने के लिए उनके पास केवल कंपनियों को बेचने का ही विकल्प बचा था। उन्होंने कंपनियों को बेचने की शुरुआत की पर बात नहीं बनी। अनिल अंबानी ने एक साथ बड़ा विस्तार किया था और उनकी मुख्य कंपनियां भी उसी दौर में घाटे में आ गईं, जिसकी वजह से वे मुसीबतों से घिर गए। 2005 में ऐडलैब्स और 2008 में उन्होंने 1.2 अरब डॉलर का करार ड्रीमवर्क्स के साथ किया था।

जियो के आने से हुआ और भी नुकसान

एक ओर अनिल अंबानी की कंपनियां घाटे में चल रही थी, वहीं दूसरी ओर उनके भाई मुकेश अंबानी ने टेलिकॉम क्षेत्र में प्रवेश किया। उन्होंने जियो कंपनी लॉन्च की, जिसकी वजह से अन्य सभी टेलिकॉम कंपनियों को झटका लगा। वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल की भी इसकी वजह से काफी नुकसान हुआ। जियो के आते ही अनिल अंबानी की मुसीबतें भी और बढ़ गईं। पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी ने बिग सिनेमा, रिलायंस बिग ब्रॉडकास्टिंग और बिग मैजिक जैसी कंपनियों को बेचा है।

7,539 करोड़ रुपये है रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण

11 जून तक रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण 7,539 करोड़ रुपये था। अनिल अंबानी की कंपनियों में से सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण रिलायंस कैपिटल का, 2,373 करोड़ रुपये था। वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण क्रमश: 462 और 1,669 करोड़ रुपये था। रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग की बात करें, तो 11 जून तक इस कंपनी का मार्केट कैप 467 करोड़ रुपये था। रिलायंस होम फाइनेंस का पूंजीकरण 860 करोड़ रुपये, वहीं रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का बाजार पूंजीकरण 1708 करोड़ रुपये था।

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