कर्ज देने के कारोबार से बाहर निकलेगी अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल
संकट में फंसी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस कैपिटल समूह ने ऋण देने वाली अपनी दो इकाइयों को दिसंबर तक बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। रिलायंस कैपिटल बीमा और म्युचुअल फंड आदि का भी कारोबार करती है। रिलायंस कैपिटल की इन दो इकाइयों रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की कुल संपत्ति 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इस खबर के बाद कंपनी का शेयर अपने 20 साल के इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
यह दूसरा कारोबार है, जिससे अनिल अंबानी की अगुवाई वाला समूह किनारा कर रहा है। दो साल पहले समूह ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को बंद कर दिया था और अब यह कंपनी दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है। समूह की रक्षा विनिर्माण कंपनी रिलायंस नेवल भी वित्तीय संकट का सामना कर रही है।
अंबानी ने सालाना आम बैठक में शेयरधारकों को बताया, 'कारोबार में बदलाव के हिस्से के रूप में, रिलायंस कैपिटल ने कर्ज देने के कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है। हमारी दोनों कर्ज देने वाली इकाइयां रिलायंस कॉमर्शियल और रिलायंस होम फाइनेंस निण समाधान योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए सभी ऋणदाताओं और अन्य हितधारकों के साथ काम कर रही हैं। समाधान योजना के दिसंबर अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।'
उन्होंने कहा कि ऋण कारोबार को बंद करने के बावजूद रिलायंस कैपिटल इन कंपनियों की वित्तीय शेयरधारक बनी रहेगी ताकि नए प्रबंधन के तहत शेयरधारकों की संपत्ति का मूल्य बढ़े और रिलायंस कैपिटल का कर्ज 25,000 करोड़ रुपये तक घट जाए।
अंबानी ने कहा कि समूह ने वित्तीय सेवा क्षेत्र में संकट, रेटिंग एजेंसी एवं ऑडिटरों की तर्कहीन कार्रवाई और आर्थिक सुस्ती को ऋण कारोबार से बाहर निकलने की वजह बताया। निहित स्वार्थों के लिए अफवाह फैलाने और अंधाधुंध बिकवाली ने शेयरधारकों को प्रभावित किया। अंबानी ने दावा किया है कि उनके समूह को नियामकीय एवं मध्यस्थता मामलों में 60,000 करोड़ रुपये से अधिक मिलने है , जो पिछले पांच से दस सालों से लंबित है।
पहली बार दिवाला शोधन पेशेवर के पास अध्यक्षता
अनिल अंबानी की दिवालिया कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशंस के शेयरधारकों की सालाना आम बैठक की अध्यक्षता पहली बार दिवाला शोधन पेशेवर ने की है। यह संभवत: पहला ऐसा मामला होगा जब किसी बड़ी कंपनी की सालाना आम बैठक की अध्यक्षता दिवालाशोधन पेशेवर के पास थी।
इस बार यह बैठक शहर के केसी कॉलेज में हुई। इससे पहले धीरूभाई अंबानी के समय में सालाना आम बैठक क्रिकेट स्टेडियमों में हुआ करती थी। विभाजन के बाद अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी दोनों की कंपनियों की सालाना आम बैठकें दक्षिणी मुंबई के विशाल बिरला मातोश्री ऑडिटोरियम में होती थी।
