अमेजन के मालिक बेजॉस से तलाक लेकर दुनिया की 22वीं सबसे अमीर महिला बनीं उनकी पत्नी मैकेंजी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति व अमेजन कंपनी के संस्थापक जेफ बेजॉस और उनकी पत्नी मैकेंजी बेजॉस के बीच 38 सौ करोड़ डॉलर यानी करीब 2,60,110 करोड़ रुपये में तलाक समझौता हुआ। इसके तहत अमेजन के 1.97 करोड़ शेयर मैकेंजी को मिलेंगे। इसके जरिए मैकेंजी न केवल कंपनी में चार प्रतिशत की हिस्सेदार हो जाएंगी, बल्कि 2.62 लाख की संपत्ति विश्व का 22वां सबसे अमीर व्यक्ति भी बना देगी।
55 साल के जेफ और 49 साल की मैकेंजी के अलग होने के लिए हो रहे इस समझौते को वॉशिंगटन के किंग काउंटी जज ने अंतिम रूप दिया। लेखिका मैकेंजी के अनुसार वे तलाक की रकम में से आधी रकम दान करने जा रही हैं। खास बात है कि ऐसा करके वे दुनिया के गिने चुने सबसे अमीर दानदाताओं में भी शुमार हो जाएंगी। वहीं अमेजन स्टॉक में अपने वोटिंग के अधिकार को जेफ को देंगी। दूसरी ओर तलाक के बाद भी कंपनी में जैफ की 12 हिस्सेदारी रहेगी जो उन्हें विश्व का सबसे अमीर व्यक्ति बनाए रखेगी।
25 साल पहले शादी की, अगले ही वर्ष अमेजन बनाई
दोनों का विवाह 1993 में हुआ था, उन्हें चार बच्चे हुए। जेफ ने 1994 में सिएटल में अपने गैराज में अमेजन की स्थापना की थी। तब इसे उन्होंने कैडबरा नाम दिया, लेकिन बाद में दक्षिण अमेरिकी नदी अमेजन पर इसका नामकरण किया। इसे उन्होंने ऑनलाइन बुक स्टोर के रूप में शुरू किया और फिर अन्य उत्पाद बेचते हुए आगे बढ़े, इसे विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी बनाया, खुद भी सबसे अमीर व्यक्ति बने।
वो वाकया, जिसने जेफ बेजोस का नजरिया बदल दिया
साल 2010 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में उन्होंने एक भावुक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने अपने सफर के बारे में वहां के छात्रों को बताया था कि अमेजन की शुरुआत कैसे हुई थी और कैसे वो दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई। जेफ बेजोस ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से ही अपनी पढ़ाई पूरी की थी।
यहां उन्होंने अपने बचपन का एक किस्सा सुनाया था, जिसने जीवन के प्रति उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया। जेफ बेजोस उस वक्त 10 साल के थे, जब वो अपने दादा-दादी के साथ एक कार ट्रिप पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इंसान की जिंदगी पर तंबाकू के असर का लेखा-जोखा किया था।
उन्होंने यह लेखा-जोखा अपनी दादी को यह बताने के लिए किया था कि सिगरेट की वजह से उन्होंने अपने जीवन का कितना वक्त नष्ट कर दिया है। यह सुनकर उनकी दादी रो पड़ीं। इसके बाद उनके दादा ने सड़क के किनारे गाड़ी रोकी, उससे बाहर उतरे और जेफ बेजोस के लिए गाड़ी का दरवाजा खोल दिया।
बेजोस ने कहा, "वो एक बुद्धिमान और शांत व्यक्ति थे। उन्होंने कभी मुझे नहीं डांटा था, लेकिन शायद यह पहली दफा था जब उन्होंने मुझे फटकार लगाई और वो चाहते थे कि मैं अपनी दादी से माफी मांगू। मेरी दादा ने मेरी ओर देखा और कुछ देर बाद प्यार से कहा- जेफ एक दिन तुम यह समझ पाओगे कि विनम्र होना, एक बुद्धिमान होने से कहीं कठिन है।" जेफ बेजोस तब से यह नहीं भूल पाए हैं कि हर फैसले की अहमियत होती है, जो हम अपनी सोच समझ से लेते हैं।
कठिन फैसला
1964 में जन्में बेजोस पढ़ाई में तेज थे और अपने दोस्तों और सहकर्मियों की तरह उन्होंने नौकरी की शुरुआत मैकडोनल्ड्स से की थी। न्यू जर्सी के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के महज आठ साल बाद वो डीई शॉ एंड कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट बन गए थे।
डीई एंड शॉ एक वॉल स्ट्रीट इवेंस्टमेंट बैंक है, जहां से उन्होंने रिजाइन करके अमेजन की शुरुआत की थी। 2010 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में दिए अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ रही थी और मैंने एक ऑनलाइन बुकस्टोर खोलने का फैसला किया, जहां हजारों किताबें होती।
पहला नाम नहीं था अमेजन
जेफ ने सबसे पहले कंपनी का नाम अमेजन नहीं सोचा था। वो आबरा का डाबरा नाम से इतने आकर्षित थे, कि कंपनी का नाम काडाबरा रखना चाहते थे। हालांकि उनके वकील ने ऐसा करने से मना किया था। इसके बाद उनको RELENTLESS नाम पसंद आया, लेकिन बात नहीं बनी। फिर उन्होंने इसका नाम अमेजन रखा।
सपने को था पूरा करना
जेफ बेजोस ने कहा, "मैं अपना जॉब छोड़ना चाहता था और कुछ अलग करना चाहता था। मेरी पत्नी मुझे प्रोत्साहित करती थी और वो चाहती थी कि मैं अपने सपने को पूरा करूं। मेरे एक बॉस थे, जिन्हें मैं काफी मानता था। मैंने उन्हें अपने आइडिया के बारे में बताया। वो मुझे पार्क ले गए, जहां उन्होंने मुझे आराम से सुना और कहा कि यह एक बेहतरीन आइडिया है, पर यह उनके लिए है, जिनके पास कोई काम नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरे पास अच्छी नौकरी है।"
"इस बात पर मैंने बहुत सोचा और काफी सोचने के बाद मैंने फैसला किया कि मुझे अपने सपने को पूरा करना है। मैं इस बात पर पछतावा नहीं करना चाहता था कि मैंने प्रयास ही नहीं किया, लेकिन अगर मैं प्रयास ही नहीं करता तो मुझे पछतावा जरूर होता और मुझे अपने फैसले पर गर्व है।" नई कंपनी की शुरुआत के लिए जेफ के मां-बाप ने अपनी जमा पूंजी उन्हें दी थी। 25 साल बाद आज अमेजन का नाम पूरी दुनिया में है। किताब बाजार में कंपनी का बोलबाला है।
भारत में भी सक्रिय
भारत में भी अमेजन तेजी से अपना नाम और स्थान बना रहा है। एक समय अमेजन ने डेटिंग एप टिंडर पर इंजीनियर्स की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया था।
कुछ रोचक तथ्य
- एप्पल करता है हर महीने अमेजन को 30 मिलियन डॉलर का भुगतान।
- कंपनी में बैन है पावरप्वाइंट प्रजेंटेशन।
- किसी भी कर्मचारी को कंपनी के छोड़ने पर मिलते हैं पांच हजार डॉलर। यह तब होता है जब कंपनी चाहती है। अगर कर्मचारी अपनी मर्जी से कंपनी को छोड़ेगा, तो उसे यह पैसे नहीं मिलेंगे।
- अमेरिका में स्थित कंपनी के वेयरहाउस में 45 हजार रोबोट कार्य कर रहे हैं।
- 3 अप्रैल, 1995 को कंपनी ने बेची थी पहली किताब। पहले महीने में कंपनी ने 45 देशों में किताबें बेची थीं।
- पहला लाभ कंपनी को अपने जन्म के छह साल बाद 2001 में हुआ।
- 2004 में कंपनी ने पहली बार अपने वार्षिक लाभ के बारे में बताना शुरू किया था।
- प्रत्येक टीम का साइज इतना बड़ा है कि उसका पेट केवल दो लार्ज साइज पिज्जा में भर जाए।