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Chandigarh News: नीड बेस्ड चेंज पर केंद्र से आएगी टीम, चंडीगढ़ में घरों का करेगी दौरा
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के 65 हजार मकानों में नीड बेस्ड चेंज को लेकर लंबे समय से समाधान का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए अहम कदम उठाया जा रहा है। चंडीगढ़ में दिल्ली मॉडल लागू करने की संभावनाएं परखने के लिए केंद्र सरकार की टीम दिवाली के बाद शहर का दौरा करेगी। टीम सेक्टर-40, 41, 29, 28, 44, 48, 49 समेत अन्य सेक्टरों में हाउसिंग बोर्ड के मकानों का निरीक्षण करेगी।
टीम मकानों के मौजूदा स्ट्रक्चर, अतिरिक्त निर्माण, कमरों के आकार में बदलाव और अन्य आंतरिक व बाहरी परिवर्तनों का आकलन करेगी। स्ट्रक्चरल सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके आधार पर दिल्ली के मानकों को चंडीगढ़ में लागू करने पर विचार किया जाएगा।
सीएचबी के सीईओ डी कार्तिकेयन ने बताया कि लोगों ने अपनी जरूरतों के अनुसार मकानों में कई बदलाव किए हैं। इनके नियमितीकरण को लेकर निवासी लंबे समय से नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार और मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स से मंजूरी मिलने पर बदलावों को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत मामूली फीस लेकर रेगुलराइज किया जा सकता है।
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सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बनेगी नीति
दिल्ली मॉडल लागू करने से पहले यह जांचा जाएगा कि मकानों में किए गए बदलाव निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। सर्वे से तय करने में मदद मिलेगी कि किन बदलावों को अनुमति दी जा सकती है और किन पर प्रतिबंध जरूरी होगा। अंतिम निर्णय सर्वे रिपोर्ट, संबंधित अधिकारियों की मंजूरी और प्रस्तावित नीति की शर्तों पर निर्भर करेगा।
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टीम मकानों के मौजूदा स्ट्रक्चर, अतिरिक्त निर्माण, कमरों के आकार में बदलाव और अन्य आंतरिक व बाहरी परिवर्तनों का आकलन करेगी। स्ट्रक्चरल सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके आधार पर दिल्ली के मानकों को चंडीगढ़ में लागू करने पर विचार किया जाएगा।
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सीएचबी के सीईओ डी कार्तिकेयन ने बताया कि लोगों ने अपनी जरूरतों के अनुसार मकानों में कई बदलाव किए हैं। इनके नियमितीकरण को लेकर निवासी लंबे समय से नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार और मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स से मंजूरी मिलने पर बदलावों को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत मामूली फीस लेकर रेगुलराइज किया जा सकता है।
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सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बनेगी नीति
दिल्ली मॉडल लागू करने से पहले यह जांचा जाएगा कि मकानों में किए गए बदलाव निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। सर्वे से तय करने में मदद मिलेगी कि किन बदलावों को अनुमति दी जा सकती है और किन पर प्रतिबंध जरूरी होगा। अंतिम निर्णय सर्वे रिपोर्ट, संबंधित अधिकारियों की मंजूरी और प्रस्तावित नीति की शर्तों पर निर्भर करेगा।