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Chandigarh News: आयुष्मान-हिमकेयर मरीजों से पैसे मांगे तो कार्रवाई
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चंडीगढ़। आयुष्मान भारत, हिमकेयर और अन्य कैशलेस स्वास्थ्य योजनाओं के मरीजों के इलाज में पैकेज, दवा, कंज्यूमेबल और इंप्लांट को लेकर पीजीआई प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। 13 अगस्त को जारी दो सर्कुलर में मरीजों से सीधे पैसे लेने, महंगे ब्रांड बाहर से मंगाने और अनधिकृत खरीद पर रोक लगाई गई है। पैकेज की सीमा के कारण मरीज को जरूरी इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा लेकिन अतिरिक्त प्रक्रिया या महंगे इंप्लांट की जरूरत होने पर निर्धारित मंजूरी प्रक्रिया अपनानी होगी।
निदेशक की ओर से जारी निर्देश सभी क्लीनिकल विभागों, विभागाध्यक्षों, एएमआरआईटी फार्मेसी, स्टोर और संबंधित कर्मचारियों के लिए हैं। पीजीआई के अनुसार कई मामलों में वास्तविक इलाज खर्च स्वीकृत पैकेज की प्रतिपूर्ति सीमा से अधिक हो जाता है। अतिरिक्त प्रक्रिया, इंप्लांट, स्टेंट और कंज्यूमेबल के कारण ऐसी स्थिति बनती है। अब सभी विभाग कम प्रतिपूर्ति वाले पैकेज और मौजूदा पैकेज में शामिल नहीं प्रक्रियाओं की पहचान करेंगे ताकि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पैकेज में शामिल कराया जा सके।
पैकेज से बाहर प्रक्रिया तो तुरंत सूचना
इलाज के दौरान पैकेज में शामिल नहीं कोई जरूरी प्रक्रिया सामने आने पर संबंधित डॉक्टर को जल्द से जल्द आयुष्मान सेल को सूचना देनी होगी। अतिरिक्त प्रक्रिया या पैकेज बढ़ाने की मंजूरी की कार्रवाई बिना देरी शुरू करनी होगी। जहां पूर्व अनुमति जरूरी है, वहां निर्धारित दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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दवा-इंप्लांट के लिए सीधे पैसे नहीं
कैशलेस मरीजों को कवर दवा, कंज्यूमेबल और इंप्लांट अमृत फार्मेसी या अधिकृत संस्थागत व्यवस्था से ही मिलेंगे। फार्मेसी कर्मचारी, प्रतिनिधि, वेंडर या अन्य व्यक्ति मरीज-तीमारदार से सीधे पैसे नहीं ले सकेंगे। नियमानुसार भुगतान होने पर भी अधिकृत माध्यम, बिल और रसीद जरूरी होगी।
एल-1 आइटम को प्राथमिकता, ब्रांड की मनमानी बंद
जहां चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होगा, भारतीय और जेनेरिक ब्रांड इस्तेमाल किए जाएंगे। खरीद निर्धारित नियमों के तहत न्यूनतम लागत पर होगी। तकनीकी और चिकित्सकीय रूप से स्वीकार्य एल-1 आइटम उपलब्ध होने पर सामान्यतः वही इस्तेमाल होगा। किसी कंपनी या ब्रांड को प्राथमिकता नहीं दी जा सकेगी।
महंगा विकल्प जरूरी तो अनुमति अनिवार्य
डॉक्टर, रेजिडेंट, नर्सिंग अधिकारी, फार्मेसी कर्मचारी या अन्य स्टाफ अधिक कीमत वाला ब्रांड अधिकृत व्यवस्था के बाहर से नहीं मंगा सकेंगे। चिकित्सकीय कारण से महंगा या वैकल्पिक आइटम जरूरी होने पर कारण दर्ज कर सक्षम अधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इंप्लांट, स्टेंट और हाई-वैल्यू आइटम में कंपनी का नाम नहीं, तकनीकी-चिकित्सकीय स्पेसिफिकेशन देना होगा। सीधे पैसे मांगने, मरीज पर दबाव डालने, खास ब्रांड को प्राथमिकता देने या अनधिकृत खरीद कराने पर प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। एएमआरआईटी फार्मेसी को स्वीकृत एल-1 दवाओं, कंज्यूमेबल और इंप्लांट की उपलब्धता, स्टॉक-सप्लाई की निगरानी करनी होगी। विभागाध्यक्ष पालन सुनिश्चित करेंगे और आयुष्मान सेल पैकेज बढ़ाने के अनुरोधों की निगरानी व रिकॉर्ड रखेगा।
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निदेशक की ओर से जारी निर्देश सभी क्लीनिकल विभागों, विभागाध्यक्षों, एएमआरआईटी फार्मेसी, स्टोर और संबंधित कर्मचारियों के लिए हैं। पीजीआई के अनुसार कई मामलों में वास्तविक इलाज खर्च स्वीकृत पैकेज की प्रतिपूर्ति सीमा से अधिक हो जाता है। अतिरिक्त प्रक्रिया, इंप्लांट, स्टेंट और कंज्यूमेबल के कारण ऐसी स्थिति बनती है। अब सभी विभाग कम प्रतिपूर्ति वाले पैकेज और मौजूदा पैकेज में शामिल नहीं प्रक्रियाओं की पहचान करेंगे ताकि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पैकेज में शामिल कराया जा सके।
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पैकेज से बाहर प्रक्रिया तो तुरंत सूचना
इलाज के दौरान पैकेज में शामिल नहीं कोई जरूरी प्रक्रिया सामने आने पर संबंधित डॉक्टर को जल्द से जल्द आयुष्मान सेल को सूचना देनी होगी। अतिरिक्त प्रक्रिया या पैकेज बढ़ाने की मंजूरी की कार्रवाई बिना देरी शुरू करनी होगी। जहां पूर्व अनुमति जरूरी है, वहां निर्धारित दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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दवा-इंप्लांट के लिए सीधे पैसे नहीं
कैशलेस मरीजों को कवर दवा, कंज्यूमेबल और इंप्लांट अमृत फार्मेसी या अधिकृत संस्थागत व्यवस्था से ही मिलेंगे। फार्मेसी कर्मचारी, प्रतिनिधि, वेंडर या अन्य व्यक्ति मरीज-तीमारदार से सीधे पैसे नहीं ले सकेंगे। नियमानुसार भुगतान होने पर भी अधिकृत माध्यम, बिल और रसीद जरूरी होगी।
एल-1 आइटम को प्राथमिकता, ब्रांड की मनमानी बंद
जहां चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होगा, भारतीय और जेनेरिक ब्रांड इस्तेमाल किए जाएंगे। खरीद निर्धारित नियमों के तहत न्यूनतम लागत पर होगी। तकनीकी और चिकित्सकीय रूप से स्वीकार्य एल-1 आइटम उपलब्ध होने पर सामान्यतः वही इस्तेमाल होगा। किसी कंपनी या ब्रांड को प्राथमिकता नहीं दी जा सकेगी।
महंगा विकल्प जरूरी तो अनुमति अनिवार्य
डॉक्टर, रेजिडेंट, नर्सिंग अधिकारी, फार्मेसी कर्मचारी या अन्य स्टाफ अधिक कीमत वाला ब्रांड अधिकृत व्यवस्था के बाहर से नहीं मंगा सकेंगे। चिकित्सकीय कारण से महंगा या वैकल्पिक आइटम जरूरी होने पर कारण दर्ज कर सक्षम अधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इंप्लांट, स्टेंट और हाई-वैल्यू आइटम में कंपनी का नाम नहीं, तकनीकी-चिकित्सकीय स्पेसिफिकेशन देना होगा। सीधे पैसे मांगने, मरीज पर दबाव डालने, खास ब्रांड को प्राथमिकता देने या अनधिकृत खरीद कराने पर प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। एएमआरआईटी फार्मेसी को स्वीकृत एल-1 दवाओं, कंज्यूमेबल और इंप्लांट की उपलब्धता, स्टॉक-सप्लाई की निगरानी करनी होगी। विभागाध्यक्ष पालन सुनिश्चित करेंगे और आयुष्मान सेल पैकेज बढ़ाने के अनुरोधों की निगरानी व रिकॉर्ड रखेगा।