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प्रथम नागरिक बनने के बाद शहर के लिए पहली जिम्मेदारी भी बन गई है : सौरभ जोशी

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:26 AM IST
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After becoming the first citizen, the first responsibility towards the city has also become: Saurabh Joshi
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चंडीगढ़। मेयर चुनाव जीतने के बाद चंडीगढ़ के नवनिर्वाचित मेयर सौरभ जोशी वीरवार शाम अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। उन्होंने शहर के भविष्य, नगर निगम की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक चुनौतियों पर खुलकर बात की।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सौरभ जोशी ने कहा कि नगर निगम की असल जिम्मेदारी नल, गटर और सड़कों से जुड़ी होती है और इन बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना ही उनकी प्राथमिकता रहेगी। डड्डूमाजरा के कूड़े से निकलने वाले लीचेट, शहर की सड़कों की हालत और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने बेबाक राय रखी। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
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सवाल : आप चंडीगढ़ के प्रथम नागरिक बन गए हैं, कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब : प्रथम नागरिक बनना सम्मान की बात है लेकिन इसके साथ ही अब प्रथम जिम्मेदारी भी बन गई है। यह जिम्मेदारी है कि चंडीगढ़ की भलाई और बेहतरी के लिए ईमानदारी से काम किया जाए।
सवाल : वर्ष 2002 में छात्र राजनीति से शुरुआत कर मेयर बनने तक का सफर कैसा रहा?
जवाब : यह सफर संघर्षपूर्ण रहा है। छात्र जीवन में छात्रों के हितों के लिए काम करने का अवसर मिला। इसके बाद अधिवक्ता के रूप में काम किया। वर्ष 2011 में पहली बार नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ा, तब मेरी उम्र 31 वर्ष थी। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव लड़ने की जानकारी भी मुझे अमर उजाला की खबर से ही मिली थी। निगम की राजनीति में मेरी पहली खबर भी अमर उजाला में ही छपी थी। लोगों ने बताया कि मेरी फोटो के साथ खबर लगी है तभी पता चला कि मुझे चुनाव लड़ना है।
सवाल : मेयर बनने के बाद अब आप एक वार्ड नहीं बल्कि पूरे शहर की नुमाइंदगी कर रहे हैं। मौजूदा चुनौतियों से कैसे निपटेंगे?
जवाब : मेरा जन्म इसी शहर में हुआ है। पढ़ाई से लेकर मेयर बनने तक का सफर चंडीगढ़ में ही रहा। यह मेरे अपने घर को ठीक करने जैसा है। हमें चंडीगढ़ की बुराई नहीं करनी बल्कि उसकी खामियों को दूर करना है। आज भी जब आप बाहर जाते हैं तो महसूस होता है कि चंडीगढ़ कितना बेहतर शहर है। बस इसकी नियमित मेंटेनेंस की जरूरत है। नगर निगम का मतलब ही नल, गटर और सड़क है, इन्हीं जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाना होगा।
सवाल : डड्डूमाजरा में कूड़े का पहाड़ खत्म होने के बावजूद बदबू और लीचेट की समस्या बनी हुई है। इसे लेकर आपकी योजना क्या है?
जवाब : डड्डूमाजरा में कूड़े का पहाड़ भले खत्म हो रहा हो लेकिन वहां लगे प्लांट से स्थानीय लोगों की स्थिति खराब हुई है। बारिश के दौरान कूड़े से निकलने वाला लीचेट जमीन में जाता है जो बेहद खतरनाक है। आसपास खेतों में उगने वाली सब्जियों और पानी पर इसका असर पड़ता है। प्रशासक से मेडिकल कैंप लगाने की बात हुई है, लेकिन यदि यहां के लोगों का मेडिकल रिकॉर्ड तैयार हो तो यह और बेहतर होगा। अगर यह समस्या किसी वीआईपी सेक्टर में होती तो अब तक कई एजेंसियां सक्रिय हो चुकी होतीं। ऐसा पक्षपात नहीं होना चाहिए।
सवाल : चंडीगढ़ में नौकरशाही के दबदबे और 74वें संशोधन के पूरी तरह लागू न होने पर आपकी क्या राय है?
जवाब : हमें कानून के अनुसार ही काम करना होता है। चंडीगढ़ से जुड़ा कानून संसद से पारित हुआ है और यहां पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट लागू किया गया। सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ से जुड़े कई मुद्दे संसद में उठाए हैं। उनसे आग्रह करूंगा कि इस विषय पर भी पहल करें और आवश्यक संशोधन करवाएं।
सवाल : मेयर के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
जवाब : मेरी सभी प्राथमिकताएं शहर से जुड़ी हैं। चंडीगढ़ के नागरिकों की सेवा करना और हर चुनौती में उनके साथ खड़ा रहना मेरा लक्ष्य है। गटर, सीवर और सड़क सभी मुद्दे अहम हैं। कोई एक मुद्दा नहीं है, हर समस्या हमारी जिम्मेदारी है।
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