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अधेड़ दंपती को IVF की अनुमति: HC ने कहा-सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम के तहत आयु सीमा सिर्फ व्यक्ति पर लागू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 30 Jan 2026 10:37 AM IST
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सार

जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि एआरटी अधिनियम की धारा 21 (जी) के तहत किसी क्लिनिक के लिए यह अनिवार्य है कि वह 21 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम आयु की महिला को और 21 वर्ष से अधिक और 55 वर्ष से कम आयु के पुरुष को ए.आर.टी सेवाएं प्रदान करे।

Highcourt says age limit under Assisted Reproductive Technology Act applies only to individuals
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 2024 में अपने इकलौते बेटे को गंवाने वाले दंपती को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) सेवाएं देने से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। 
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एआरटी अधिनियम, 2021 में किसी भी दंपति के लिए आयु सीमा निर्धारित नहीं है और यह स्पष्ट रूप से दाता अंडों के उपयोग की अनुमति देता है।
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याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य अपीलीय प्राधिकरण द्वारा पारित दिनांक 6 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उम्र, रजोनिवृत्ति, चिकित्सा जोखिम और लिंग निर्धारण की आशंका के आधार पर दंपती के आईवीएफ के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था।

जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि एआरटी अधिनियम की धारा 21 (जी) के तहत किसी क्लिनिक के लिए यह अनिवार्य है कि वह 21 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम आयु की महिला को और 21 वर्ष से अधिक और 55 वर्ष से कम आयु के पुरुष को ए.आर.टी सेवाएं प्रदान करे। इस न्यायालय ने माना कि यह कानून किसी व्यक्ति विशेष पर आयु प्रतिबंध लागू करता है, न कि किसी दंपती पर। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एआरटी प्रक्रिया से गुजरने में शामिल जोखिम और संतान में आनुवंशिक असामान्यता की संभावना एआरटी अधिनियम के तहत इस प्रक्रिया से गुजरने पर रोक नहीं है। 

याचिकाकर्ता, जो 47 और 56 वर्ष से अधिक आयु के विवाहित दंपती हैं, के विवाह से दो बच्चे थे। उनकी बेटी का विवाह 2020 में हुआ था, जबकि उनके बेटे की 7 जुलाई 2024 को पीलिया के कारण मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद, दंपति ने आई.वी.एफ उपचार के लिए एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया। हालांकि, उन्हें इस आधार पर एआरटी सेवाएं देने से इनकार कर दिया गया कि पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक हो गई थी, जो कथित तौर पर सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत वर्जित है।
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