Punjab News: ड्रग्स केस में बिक्रम मजीठिया से पूछताछ, मीडिया से बोले- बदले की राजनीति में फंसाया जा रहा
दिसंबर 2021 को मजीठिया के खिलाफ तत्कालीन सरकार ने नशे की तस्करी के आरोप में केस दर्ज किया था। इस केस में 24 फरवरी 2022 को वह जेल भी गए थे। पांच महीनों की जेल काटने के बाद वह अगस्त 2022 में जमानत पर रिहा हुए थे।
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ड्रग्स केस में पूर्व मंत्री व शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया बुधवार को पटियाला के पुलिस लाइन में विशेष जांच दल (एसआईटी) के सामने पेश हुए। इस दौरान मजीठिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह 11 साल पुराना केस है। यहां तक की अदालतों ने भी इसमें फैसले सुना दिए हैं लेकिन मान सरकार बदले की राजनीति के तहत उन्हें जानबूझ कर इस केस में फंसाना चाहती है, क्योंकि वह पंजाब के हितों के लिए सरकार की कारगुजारियों पर अक्सर सवाल उठाते रहते हैं। मजीठिया ने कहा कि वह कानून को मानने वाले नागरिक हैं, इसलिए अब तक सात बार एसआईटी के सामने पेश हो चुके हैं।
गौरतलब है कि दिसंबर 2021 को मजीठिया के खिलाफ तत्कालीन सरकार ने नशे की तस्करी के आरोप में केस दर्ज किया था। इस केस में 24 फरवरी 2022 को वह जेल भी गए थे। पांच महीनों की जेल काटने के बाद वह अगस्त 2022 में जमानत पर रिहा हुए थे।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की तरह नहीं हैं कि ईडी उन्हें करोड़ों के शराब घोटाले में पूछताछ के लिए आठ बार समन भेज चुकी है, परंतु वह एक बार भी ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। मजीठिया ने आरोप लगाया कि इससे साफ है कि केजरीवाल के मन में चोर है। जिस शराब घोटाले में केजरीवाल सरकार के मंत्री व यहां तक की डिप्टी सीएम भी जेल में हैं, उसमें अब केजरीवाल की गिरफ्तारी भी नजदीक ही लगती है।
मजीठिया ने कहा कि पंजाब विधानसभा में मंगलवार को जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मजीठिया ने चुटकी लेते कहा कि जिस तरह से मान विस सेशन में उछल रहे थे, उन्होंने तो बिग बॉस को फेल कर दिया। साथ ही कहा कि एक सीनियर नेता को कहना कि उनका बेटा फिल्मों में आने का चाहवान है। यह बात आम जनता से क्या संबंध रखती है, मान इसको साफ करें।
चट्टोपाध्याय के डीजीपी कार्यकाल में हुए कामों की जांच हो
मजीठिया ने कहा कि आज वह एसआईटी के सामने पंजाब के पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के खिलाफ जांच की मांग करने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ गैरकानूनी ढंग से झूठा केस दर्ज करने के लिए चट्टोपाध्याय को पंजाब का डीजीपी लगाए गया और उसे करोड़ों रुपये भी दिए थे। मजीठिया ने मांग की है कि चट्टोपाध्याय के बतौर डीजीपी कार्यकाल में हुए सभी कामों की जांच होनी चाहिए।