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अमर उजाला पड़ताल: चंडीगढ़ के 12 रैन बसेरों में परीक्षा लेती है ठंड, कहीं फटे कंबल तो कहीं गंदे पड़े शौचालय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 07 Jan 2026 11:39 AM IST
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सार

अमर उजाला के सात संवाददाताओं ने चंडीगढ़ में अलग-अलग शेल्टर होम में पहुंचकर बेघर लोगों के साथ रात गुजारी। इस दौरान 18 में से 12 शेल्टर होम का निरीक्षण किया गया, जिनमें करीब 75 फीसदी स्थानों पर व्यवस्थाएं बेहद खराब पाई गईं। एक भी शेल्टर ऐसा नहीं मिला, जहां सभी सुविधाएं संतोषजनक हों।

Amar Ujala investigation Cold weather Chandigarh 12 night shelters
चंडीगढ़ में रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कड़कड़ाती ठंड में बेघर और बेसहारा लोगों को राहत देने के चंडीगढ़ प्रशासन के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आए। जमीनी हकीकत यह है कि रैन बसेरों में ठहरने वाले लोग बदबूदार कंबलों और गंदगी के बीच रात काटने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह कंबल ओढ़ना सुकून नहीं, बल्कि एक मजबूरी बन गया है। अमर उजाला की विशेष पड़ताल में शहर के रैन बसेरों की पोल खुली है।

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कंबलों में से आती है बदबू

अधिकतर जगहों पर कंबल हफ्तों से धुले नहीं थे और उनसे तेज बदबू आ रही थी। कई कंबल फटे हुए थे, जिससे ठंडी हवा सीधे अंदर आ रही थी। कुछ शेल्टरों में मोबाइल टॉयलेट की हालत इतनी खराब थी कि उनका इस्तेमाल करना मुश्किल था। सेक्टर-15 पीजीआई के सामने बने आठ शेल्टर होम के शौचालय सबसे बदहाल मिले। न पर्याप्त रोशनी थी और न नियमित सफाई। कर्मचारियों ने बताया कि दिन में केवल एक बार सफाई की जाती है, जबकि शेल्टर 24 घंटे संचालित होते हैं और यहां करीब 200 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है।

सेक्टर-16 और 32 में नहीं रुकने दिया

अमर उजाला की टीम को दो शेल्टर होम में रुकने से साफ इनकार कर दिया गया। सेक्टर-16 अस्पताल के पास बने शेल्टर में यह कहकर जगह नहीं दी गई कि स्थानीय पते वालों को यहां ठहरने की अनुमति नहीं है। वहीं, सेक्टर-32 अस्पताल के पास बने शेल्टर में केवल अस्पताल का गेट पास रखने वालों को ही रुकने दिया गया। चोरी की आशंका का हवाला देकर वहां अपने ही नियम बना लिए गए थे। 


गर्म पानी नहीं, फटे कंबलों से ठंठ रोकने की कोशिश

सेक्टर-20 और सेक्टर-29 के शेल्टरों में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगात्मक रहा, लेकिन व्यवस्थाएं नाकाफी थीं। सेक्टर-20 में गर्म पानी नहीं था और कंबलों में छेद थे। सेक्टर-29 में शौचालय की व्यवस्था बाहर बाजार में थी, जो रात 11 बजे के बाद बंद हो जाता है। इसके बाद लोगों को अंधेरे में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

रख-रखाव व सफाई पर खर्चे हैं 1.53 करोड़ रुपये

निगम ने रैन बसेरों के संचालन और रखरखाव के लिए करीब 1.53 करोड़ रुपये का टेंडर दिया है। यह टेंडर सर्दियों के पूरे सीजन यानी करीब तीन महीने की अवधि के लिए किया गया है। नियमों के मुताबिक कंबलों की नियमित धुलाई, शेल्टर और शौचालयों की दिन में कम से कम दो बार सफाई और साफ-सफाई का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। जबकि यहां ऐसा नहीं हो रहा।

450 पुरुषों-महिलाओं के ठहरने की है व्यवस्था

शहर में कुल 18 नाइट शेल्टरों में 325 पुरुष और 125 महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। सबसे बड़ा क्लस्टर पीजीआई के सामने बनाया गया है, जहां एक ही स्थान पर आठ शेल्टर होम हैं। इसके अलावा सेक्टर-43 बस स्टैंड के पीछे, सेक्टर-16 अस्पताल, जीएमसीएच-32, सेक्टर-29, 20, 19 और सेक्टर-34 में भी शेल्टर बनाए गए हैं। अमर उजाला की इस पड़ताल ने प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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