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अमृतसर आतंकी हमले को लेकर बड़ा खुलासा, 2016-17 से जुड़े हैं तार, कई और सच आएंगे सामने

अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 Nov 2018 02:46 PM IST
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Amritsar bomb blast happened on the pattern of Target Killing
अमृतसर बम धमाका

अमृतसर के राजासांसी स्थित निरंकारी भवन में हुए बम धमाको को लेकर अहम खुलासा हुआ है। धमाके तार साल 2016-17 में हुई वारदातों से जुड़ते दिख रहे हैं।

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Amritsar bomb blast happened on the pattern of Target Killing
अमृतसर में तैनात पुलिसबल

शुरुआती जांच में आमने आया है कि अमृतसर आतंकी हमला भी 2016 और 2017 में पंजाब को दहलाने वाली टारगेट किलिंग के पैटर्न पर ही हुआ है। इसके बाद जांच एजेंसियों की सुई एक बार फिर खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स की तरफ घूम गई है। अमृतसर में रविवार को दो नकाबपोश युवकों ने गांव अदलीवाल, राजासांसी स्थित निरंकारी सत्संग घर में हैंड ग्रेनेड फेंक कर दहशत मचा दी। 

इसमें तीन लोग मारे गए और 15 जख्मी हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर बाइक से फरार हो गए। पुलिस को कुछ सीसीटीवी फुटेज मिली है, लेकिन अब तक कुछ ठोस नहीं मिल सका है। पड़ताल से लग रहा है कि वारदात का पूरा पैटर्न टारगेट किलिंग जैसा है। सितंबर 2016 में जालंधर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजाब उप प्रमुख ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा को बाइक सवार दो युवकों ने गोलियां मार दी थीं। कुछ दिन इलाज के बाद उनकी मौत हो गई थी। पंजाब में टारगेट किलिंग का सिलसिला यहीं से शुरु हुआ है। 

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Amritsar bomb blast happened on the pattern of Target Killing
निरंकारी भवन

चुन-चुन कर आठ लोगों पर हमले किए गए। जिनमें से सात की मौत हो गई थी। इनमें हिंदू नेताओं से लेकर पादरी तक शामिल थे। सभी वारदात को दो बाइक सवार नकाबपोश युवकों ने ही अंजाम दिया था। नवंबर 2017 में पंजाब पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर इस केस को सुलझाया था। तब सामने आया कि इनके पीछे खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स का हाथ था। पाक एजेंसी आईएसआई ने केएलएफ के जरिए पंजाब में सांप्रदायिक सद्भावना को चोट पहुंचाने की साजिश रची थी। 

Amritsar bomb blast happened on the pattern of Target Killing
अमृतसर बम धमाका

जांच के दौरान टारगेट किलिंग और अमृतसर हमले में काफी समानताएं दिख रही हैं। उन आठों वारदात को हरदीप शेरा और रमनदीप कनाडियन ने अंजाम दिया था। एनआईए की जांच में सामने आया था कि हर वारदात से पहले वह बाइक चोरी करते और काम के बाद उसे कहीं छोड़ दिया जाता। वारदात के बाद जिस गाड़ी में उन्हें जाना होता, उसे तीन-चार किलोमीटर दूर खड़ा किया जाता था, ताकि नाके से बच सकें। इतना ही नहीं, पुलिस को वारदात के आसपास के मोबाइल डंप से कभी कोई मदद नहीं मिली। 

क्योंकि दोनों आरोपी वारदात से कुछ समय पहले और बाद में मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करते थे। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में अपने आकाओं से बातचीत के लिए भी उन्होंने दो सोशल मीडिया एप का प्रयोग किया था। एनआईए द्वारा दायर चार्जशीट के मुताबिक आईएसआई द्वारा कराई टारगेट किलिंग का मकसद सूबे में सांप्रदायिक गड़बड़ी पैदा करना था।

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Amritsar bomb blast happened on the pattern of Target Killing
अमृतसर बम धमाका

अमृतसर हमले का मकसद भी यही है। पिछली बार लोगों को चुना गया था, इस बार सांप्रदायों को लड़ाने की साजिश की गई है। अमृतसर हमले के बाद भी पुलिस बाइक की तलाश कर रही है। साथ ही वहां से मोबाइल डंप भी लिया गया है। लेकिन उससे कोई सुराग मिलने की उम्मीद कम ही है।

पीएचडी का हो सकता है हाथ
अमृतसर हमले की जांच कर रही एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे हरमीत सिंह पीएचडी का हाथ हो सकता है। पाकिस्तान में बैठे पीएचडी ने ही टारगेट किलिंग को सिरे चढ़ाया था। टारगेट किलिंग की योजना खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के हरमिंदर सिंह मिंटू ने बनाई थी। लेकिन 2014 में उसे थाईलैंड से गिरफ्तार कर लिया गया था। नाभा जेल तोड़ कर वह फरार हुआ, लेकिन फिर पकड़ा गया। पटियाला जेल में कार्डियक अरेस्ट से उसकी मौत हो गई थी। गिरफ्तारी से पहले मिंटू टारगेट किलिंग की योजना बना चुका था। पर उसे अंजाम हरमीत पीएचडी ने दिया था। एजेंसियों को लग रहा है कि अमृतसर हमले के पीछे भी पीएचडी का हाथ हो सकता है।

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