स्वर कोकिला को श्रद्धांजलि: सतिंदर सरताज ने लिखा- कोई बता दे गर किसी को भी पता हो... दुनिया में कहीं कोई ऐसी लता हो
लताजी ने भारत देश की सभी भाषाओं में लाखों गाने गाए। उनके गाए भजन सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। घर में हर सुबह लताजी के भजन बजते हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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अकीदत है ये इक संगीत को, रूह से अता हो तो... मुआफी दीजिए सरताज से कोई खता हो तो, हमें कोई बता दे गर किसी को भी पता हो तो.. कि दुनिया में कहीं पर भी कोई ऐसी लता हो तो। पंजाबी गायक सतिंदर सरताज ने इंस्टाग्राम पर इन पंक्तियों के साथ स्वर कोकिला लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि दी।
लता दीदी के निधन के बाद ट्राइसिटी और पंजाबी संगीत जगत से जुड़े कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें याद किया। उन्होंने लिखा कि वह हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और अपनी आवाज के जरिए हमेशा सबके बीच रहेंगी। गायक और अभिनेता गुरदास मान, गुरप्रीत घुग्गी आदि ने भी लता जी को श्रद्धांजलि दी है।
आप मेरी ताउम्र प्रेरणा, हमेशा सीखते रहेंगे
मैं आपके बारे में कुछ लिखने जितना बड़ा कभी हो ही नहीं सकता। लता जी संगीत में आप मेरी ताउम्र प्रेरणा हो, हमेशा आपसे सीखते रहेंगे। भारत की स्वर कोकिला को विनम्र श्रद्धांजलि। - बी प्राक, पंजाबी और बॉलीवुड गायक
गीतों के जरिए हमेशा हमारे बीच रहेंगी
लताजी अपने गीतों के जरिए हमेशा हमारे बीच प्रेरणा बनकर रहेंगी। गायिका ने अनंत के साइन के साथ स्वर कोकिला को श्रद्धांजलि दी। - निमरत खैरा, पंजाबी गायिका व अदाकारा
काश! ये अफवाह होती
संगीत जगत में लता जी का होना बिल्कुल वैसा ही था जैसे किसी घर में बुजुर्ग का होना। मुझे नहीं लगता कि कोई भी ऐसा संगीतकार होगा जिनकी प्रेरणास्रोत लता जी नहीं रही हो। अभी तक विश्वास नहीं हो रहा, काश! उनके जाने की खबर सिर्फ अफवाह होती। - नीलम पाल, चेयरपर्सन, संगीत विभाग पंजाब यूनिवर्सिटी
लताजी का जाना एक अपूरणीय क्षति
लताजी का गया हुआ गाना ‘ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी’ मरणासन्न किसी भी इंसान में भी नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। लताजी का जाना अपूरणीय क्षति है। लताजी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की आंखों को नम कर गई हैं। -डॉ. अनिल कुमार शर्मा, संगीत विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी
स्कूल से बंक मारकर गया था लताजी के गीत सुनने, पड़ी थी मार
बात वर्ष 1962-63 की है। तब मैं नाभा (पंजाब) के पास अपने गांव कमेली में रहता था। पढ़ाई के लिए रोज नाभा शहर जाता था। जब पता लगा कि नाभा के देवी मंदिर चौक पर स्थानीय लोगों द्वारा लता जी के गानों पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है तो अपने सहपाठियों के साथ स्कूल जाने के बजाय उस कार्यक्रम देखने के लिए चला गया और वहां लताजी के गीतों का आनंद लिया।
कार्यक्रम के देखने के कारण घर देरी से पहुंचा। अगले दिन जब स्कूल पहुंचा तो शिक्षक ने मुर्गा बनाने के साथ पिटाई की। वहीं, स्कूल से बंक मारने की खबर लगी तो घर पर भी पिटाई हुई। ये बातें रविवार को हरियाणा सचिवालय से सेवानिवृत्त सेक्टर 40 निवासी वीएन शर्मा ने सुर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर शोक जताते हुए बताईं। उन्होंने कहा कि उस दिन से लेकर आज तक मैं लताजी का फैन हूं। लताजी के अचानक निधन की खबर से बहुत दुख हुआ। लताजी के गीत आज भी उतने ही अच्छे लगते हैं, जितने स्कूल के दिनों में लगते थे।
मेरे ससुर हर रोज सुनते थे लता जी का गाना: प्रज्ञा शारदा
मेरे ससुर स्वतंत्रता सेनानी थे। वह हर रोज लताजी का गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा...’ हर दिन सुनते थे। आज भी हमारे घर में यह गाना बहुत सुना जाता है। यह गीत देश के जवानों में नई ऊर्जा भर देता है। यह कहना है लेखिका प्रज्ञा शारदा का। उन्होंने कहा कि ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हों हमारे करम...’ गीत भला किसके दिल को नहीं छूता।
विद्यालयों में आज भी यह गीत सुबह की प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। प्रज्ञा शारदा ने बताया कि उनके पति केके शारदा इस गाने को सोते समय जरूर सुनते हैं। उनके फोन की कॉलर ट्यून भी इसी गाने की है। कहा कि लताजी ने भारत देश की सभी भाषाओं में लाखों गाने गाए। उनके गाए भजन सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। घर में हर सुबह लताजी के भजन बजते हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मेरे व मेरे परिवार की ओर से लताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
गुलजार साहब के जरिए लता दीदी से हुई थी पहली मुलाकात: मोहम्मद सलीम
टीएफटी रंग संवाद के 48वें ऑनलाइन संस्करण में स्वर कोकिला लताजी को याद किया गया। वेबिनार का आरंभ टीएफटी निर्देशक सुदेश शर्मा ने पूरे टीएफटी परिवार एवं समस्त रंगमंच परिवार की ओर से भारतीय संगीत की शान लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया। सुदेश शर्मा ने कहा कि देश के संगीत एवं गायकी के स्वर्णिम युग का अंत हो गया है।
जाने-माने लेखक, निर्देशक, अभिनेता एवं डिजाइनर मोहम्मद सलीम आरिफ लताजी के साथ बिताए पलों को याद किया। उन्होंने बताया कि दरअसल जब वह मुंबई में नए-नए आए थे और गुलजार साहब ने मिर्जा गालिब की डिजाइनिंग के लिए उन्हें बुलाया तो उसी दौरान गुलजार साहब फिल्म ‘लेकिन’ की तैयारियों में व्यस्त थे, जिसे खुद लता दीदी प्रोड्यूस कर रही थीं। इस तरह गुलजार जी के माध्यम से उनकी लता दीदी से पहली मुलाकात हुई।
आरिफ जी के मुताबिक वह लता जी की शख्सियत से इतने प्रभावित थे कि वह सहमे शर्माते हुए किसी तरह पहली बार उनसे मिल पाए, बात कर पाए। परंतु अपने स्वभाव के मुताबिक लताजी ने उनका मुस्कुरा कर स्वागत किया और चंद ही पलों में वह उनकी जमीनी शख्सियत के कायल हो गए। सलीम जी ने बताया कि ‘माचिस’ के निर्माण के दौरान उन्हें लता जी की अद्भुत प्रतिभा को करीब से जानने का मौका मिला, जब एक ही शिफ्ट में लताजी ने तीन बेमिसाल गाने बगैर रिटेक के रिकॉर्ड कर दिए। उन्होंने कहा कि वह हर गीत की पुख्ता तैयारी अपने घर से ही करके आती थीं। उनके जैसी शख्सियत के साथ काम करना किसी भी कलाकार के कला जीवन को संपूर्ण कर देता था।