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युद्ध की मार: बर्बाद हो गया ट्राइसिटी का छोटा कारोबार, हजार से ज्यादा दुकानें बंद; फास्ट फूड कारोबार ठप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 17 Mar 2026 09:14 AM IST
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सार

गैस सिलिंडर की सप्लाई रुकने से कई जगहों पर दुकानों के शटर गिर गए हैं, तो कई दुकानदार लकड़ी, कोयले या डीजल की भट्टियों के सहारे काम चला रहे हैं।

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चंडीगढ़ सेक्टर 25 गैस एजेंसी से सिलिंडर लेने के लिए पहुंचे हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अंतरराष्ट्रीय तनाव और गैस आपूर्ति में आई बाधा का असर अब ट्राइसिटी के छोटे कारोबार पर साफ दिखने लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की किल्लत के कारण चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में रेहड़ी-फड़ी, फास्ट फूड स्टॉल और छोटे रेस्टोरेंट चलाने वाले कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 
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हालात यह हैं कि ट्राइसिटी में एक हजार से अधिक छोटी दुकानें और फास्ट फूड स्टॉल बंद हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों दुकानदार सीमित संसाधनों के सहारे किसी तरह काम चला रहे हैं। गैस की कमी ने हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर सीधा असर डाला है।
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सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है जो रेहड़ी-फड़ी या छोटे ढाबों के जरिए परिवार का पालन-पोषण करते हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस स्थिति में न तो पूरा मेन्यू तैयार हो पा रहा है और न ही ग्राहकों की मांग पूरी की जा रही है।

पंचकूला में 400 से अधिक रेहड़ी-फड़ी बंद

पंचकूला जिले में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई प्रभावित होने के कारण फास्ट फूड मार्केट में लगने वाली करीब 400 दुकानें बंद हो गई हैं। सेक्टर-15, 17, 11, 7, 8 और 9 की रेहड़ी मार्केट के अलावा कालका, पिंजौर, मोरनी, बरवाला और रायपुरानी की बाजारों में भी यही हाल है। ढाबे, फास्ट फूड स्टॉल और चाय-नाश्ते की रेहड़ियां चलाने वाले दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सेक्टर-15 रेहड़ी मार्केट के अध्यक्ष रिपुदमन का कहना है कि गैस की नियमित सप्लाई बंद होने से कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। वहीं बूथ संचालक शीला रानी का कहना है कि सिलिंडर की कमी के कारण कारोबार लगभग 50 प्रतिशत तक घट गया है और ग्राहकों की मांग पूरी नहीं हो पा रही।

चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले अरविंद राम बताते हैं कि गैस न होने के कारण उन्होंने चाय और स्नैक्स बनाना बंद कर दिया है और केवल पानी बेचकर गुजारा कर रहे हैं। वहीं स्नैक्स बेचने वाले राजीव का कहना है कि पहले रोजाना सौ लोगों के ऑर्डर मिलते थे लेकिन अब सिलिंडर न मिलने के कारण काम बंद करना पड़ा है।

पंचकूला जिले में करीब 14 गैस एजेंसियां हैं और लगभग 1.25 लाख उपभोक्ता हैं। प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है और जल्द ही कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई भी बहाल की जाएगी।

मोहाली में भी सैकड़ों छोटे विक्रेता प्रभावित

मोहाली में भी गैस सिलिंडर की कमी ने 300 से 400 छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। शहर के विभिन्न इलाकों में फास्ट फूड की रेहड़ी लगाने वाले सैकड़ों विक्रेताओं को काम बंद करना पड़ा है। बर्गर की रेहड़ी लगाने वाले फेज-1 निवासी राजू ने कहा कि कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिला है। कई एजेंसियों के चक्कर लगाने के बाद भी सिलिंडर उपलब्ध नहीं हुआ जिससे रोज की कमाई बंद हो गई है। इसी तरह फेज-10 में मोमोज और स्प्रिंग रोल बेचने वाले बीर बहादुर का कहना है कि सिलिंडर न मिलने के कारण उन्हें भी अपनी रेहड़ी बंद करनी पड़ी है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द गैस की सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा।

चंडीगढ़ में बढ़ी बुकिंग, सप्लाई वही

चंडीगढ़ में स्थिति कुछ अलग लेकिन उतनी ही गंभीर है। यहां घरेलू गैस की सप्लाई पहले जितनी ही है लेकिन अचानक बुकिंग बढ़ने से संकट की स्थिति बन गई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 12,500 सिलिंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 20,000 तक पहुंच गई है। शहर में करीब दो लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं और 26 गैस एजेंसियां काम कर रही हैं। गैस कंपनियों के अनुसार रोजाना लगभग 15,000 सिलिंडरों की सप्लाई हो रही है लेकिन अफवाहों और पैनिक बुकिंग के कारण मांग अचानक बढ़ गई है।

ढाई हजार से चार हजार रुपये तक में बेचे जा रहे कॉमर्शियल सिलिंडर

कॉमर्शियल गैस की कमी के चलते कालाबाजारी भी बढ़ने लगी है। सामान्य तौर पर जहां कॉमर्शियल सिलिंडर की खपत प्रतिदिन करीब 3000 होती थी, वहीं अब सप्लाई घटकर लगभग 500 सिलिंडर तक रह गई है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर कॉमर्शियल सिलिंडर ढाई हजार से चार हजार रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। कुछ रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें महंगे दामों पर सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ इलाकों में अवैध रूप से घरेलू सिलिंडरों से गैस निकालकर छोटे दुकानदारों को बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। बताया जाता है कि 14 किलो के सिलिंडर से दो-दो किलो गैस निकालकर लगभग पांच सौ रुपये में बेची जा रही है।

लकड़ी के चूल्हों पर बनने लगा लंगर

गैस की कमी का असर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। सेक्टर-27 के एक मंदिर में अब लंगर लकड़ी के चूल्हों पर पकाया जा रहा है। वहीं सेक्टर-29 के एक मंदिर में पहले 1200 लोगों का लंगर बनता था लेकिन अब यह घटकर लगभग 500-600 लोगों तक सीमित हो गया है। पीजीआई के बाहर चलने वाली लंगर सेवा में भी रोटी की जगह केवल कढ़ी-चावल और राजमा-चावल ही परोसे जा रहे हैं।

प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई

मोहाली प्रशासन ने गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी है। डीसी कोमल मित्तल ने खाद्य आपूर्ति अधिकारियों को नियमित जांच के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि जमाखोरी या नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, अधिकारियों का कहना है कि गैस की सप्लाई व्यवस्था को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि छोटे कारोबारियों का कहना है कि जब तक कॉमर्शियल गैस की नियमित सप्लाई शुरू नहीं होती तब तक ट्राइसिटी में छोटे कारोबार की स्थिति संभलना मुश्किल है।
 
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