Chandigarh: दूसरों की समस्याएं सुलझाने वाली यूटी पुलिस अपनी व्यवस्था में फेल, 9.81 करोड़ रुपये फंसे
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि 6.57 करोड़ रुपये की एडवांस राशि वर्षों से बिना समायोजन अटकी हुई है, वहीं आधुनिकीकरण के लिए मिले 4.07 करोड़ में से 3.24 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके।
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आम जनता की शिकायतें सुलझाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली चंडीगढ़ पुलिस खुद अपनी व्यवस्था और आधुनिकीकरण के मामलों में कितनी लापरवाह है, इसका बड़ा खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 6.57 करोड़ रुपये की एडवांस राशि वर्षों से बिना समायोजन अटकी हुई है, वहीं आधुनिकीकरण के लिए मिले 4.07 करोड़ में से 3.24 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके। कुल मिलाकर 9.81 करोड़ रुपये सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गए।
ऑडिट के अनुसार यूटी पुलिस ने विभिन्न एजेंसियों को बड़े पैमाने पर एडवांस भुगतान किए लेकिन न तो समय पर कार्य की प्रगति देखी गई और न राशि का समायोजन किया गया। 2022 से मार्च 2025 तक 6.57 करोड़ की एडवांस राशि लंबित पाई गई। सबसे गंभीर मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड का है जहां डेटा फ्यूजन प्रोजेक्ट के लिए अप्रैल 2024 में 9.57 लाख रुपये एडवांस दिए गए, बावजूद इसके कोई प्रगति नहीं हुई और मार्च 2025 में प्रोजेक्ट बंद हो गया।
गृह मंत्रालय की एएसयूएमपी/एमपीएफ योजना के तहत 2022-23 और 2023-24 में जारी 4.07 करोड़ का बड़ा हिस्सा समय पर खर्च नहीं हुआ। मार्च 2024 तक 3.24 करोड़ विभागीय खातों में पड़े रहे, जिसे ऑडिट ने फंड ब्लॉकेज और वित्तीय अनियमितता माना।
डिजिटल सिस्टम और हेल्पलाइन फंड भी अटका
डैशबोर्ड कैमरे, कमांड एंड कंट्रोल वाहन, बुलेटप्रूफ जैकेट, प्रिजन वैन और फॉरेंसिक किट के लिए फंड जारी हुआ, लेकिन खर्च आंशिक रहा। डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए 2.94 करोड़ स्वीकृत हुए, लेकिन एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। 1930 साइबर हेल्पलाइन के 33.45 लाख में केवल 12.62 लाख खर्च हुए और वर्कस्टेशन, सर्वर व कॉल सेंटर के लिए 20.83 लाख बिना उपयोग पड़े।
ईंधन और अन्य खर्चों में लापरवाही
217 विभागीय वाहनों का ईंधन औसत तय नहीं, जिससे खर्च पर नियंत्रण नहीं। सेक्टर-18 स्थित पुरानी सरकारी प्रेस बिल्डिंग की बिजली हिस्सेदारी 3.92 लाख लंबित।
कुल फंड और अटकी राशि का विवरण
कमांड एंड कंट्रोल वाहन, कैमरे और जैकेट: 25 लाख में सिर्फ 2.35 लाख खर्च।
प्रिजन वैन और फॉरेंसिक किट: 30 लाख में 20.50 लाख खर्च, 9.50 लाख बचे।
1930 साइबर हेल्पलाइन: 33.45 लाख में 12.62 लाख खर्च।
डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम: 2.94 करोड़ में एक रुपया भी खर्च नहीं।
कई मद में मिले बजट उसकी कार्य योजना से काफी कम हैं, इसलिए उसे अब तक खर्च नहीं किया जा सका। जैसे फोरेंसिक किट की खरीद के लिए पैसे कम थे, उतने बजट में तय संख्या में किट नहीं खरीदी जा सकती थी। वहीं डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए 20 करोड़ का बजट तय है, जिसमें 17 करोड़ प्रशासन ने दिए हैं, बाकी बजट हमारा है। अन्य कार्यों के लिए मिले बजट को भी संशोधित कर उसका बढ़ा बजट मांगा गया है। केंद्र से मिलते ही इसे तय योजना के अनुसार खर्च किया जाएगा। -मंजीत श्योराण, एसएसपी हेडक्वार्टर