चंडीगढ़ की गोशाला में हुआ क्या?: सब ठीक का दावा करते रहे अधिकारी, भीतर मरती रहीं गायें.... अब उठे सवाल
चंडीगढ़ की गोशाला में मंगलवार देर रात सनातन टास्क फोर्स के निरीक्षण में गोशाला परिसर में 60 से अधिक गायें और बछड़े मृत अवस्था में मिले थे। अब ये मामला गरमा गया है।
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चंडीगढ़ के रायपुर कलां की गोशाला में बड़ी संख्या में गायों और बछड़ों की मौत के मामले में अब प्रशासनिक बैठकों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
सूत्रों के अनुसार नगर निगम आयुक्त अमित कुमार हर हफ्ते तीन बार गोशाला को लेकर बैठक करते थे। कई बार उन्होंने सीधे अधिकारियों से पूछा कि स्थिति कैसी है, जिस पर हर बार यही जवाब दिया गया कि सबकुछ ठीक चल रहा है।
हफ्ते में तीन बार होती थी समीक्षा बैठक
सूत्र बताते हैं कि हफ्ते में कम से कम तीन बार गोशाला को लेकर समीक्षा बैठक होती थी लेकिन बुधवार से पहले किसी भी बैठक में यह जानकारी नहीं दी गई कि गोशाला में मौतें हो रही हैं। कागजों में रायपुरकलां की गोशाला में 350 से 400 गाय थीं। यहां समय-समय पर सरकारी डॉक्टर की विजिट भी होती थी, इसके बावजूद हालात बिगड़ते चले गए।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है। वहीं, जब इस मामले में एमएचओ इंद्रप्रीत कौर को फोन किया गया तो उन्होंने फोन उठाकर बात सुनते ही काट दिया। वहीं, नगर आयुक्त अमित कुमार ने भी इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया।
बैठक में सीसीटीवी कैमरों पर दिया जाता रहा जोर
विश्वसनीय सूत्रों ने बैठकों में केवल सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी बातों पर चर्चा होती रही, लेकिन चारे की आपूर्ति, लोहे के एंगल, रख-रखाव और अन्य बुनियादी समस्याओं पर कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में गायों को पूरा चारा मिल रहा था या फिर कागजों में ही सब कुछ सही दिखाया जा रहा था। हालांकि रायपुर कलां में जिंदा गायों की स्थिति बेहद खराब है। गायों की मौत की खबर सामने आने के बाद बुधवार को विशेष बैठक बुलाई गई, जिसमें एमएचओ इंद्रप्रीत कौर भी मौजूद थीं। अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया कि यदि कोई समस्या थी तो पहले क्यों नहीं बताई गई। सूत्रों का कहना है कि हर बैठक में यही कहा जाता रहा कि कोई दिक्कत नहीं है जबकि हकीकत कुछ और थी।
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था गोशाला का उद्घाटन
रायपुर कलां की यह गोशाला लगभग पांच एकड़ जमीन में बनी है। 8 मई 2023 में इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। अब यह भी जांच का विषय है कि कितने बछड़ों को दबाया गया, उसका कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं और क्या कभी इसकी विधिवत रिपोर्टिंग हुई। प्रशासनिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
एक दिन में एक गाय को 18 से 20 किलो चारा मिलने का दावा
सूत्रों के अनुसार एक गाय को रोजाना 18 से 20 किलो चारा दिया जाना दर्शाया जाता था। एमएचओ इंद्रप्रीत से भी कई बार चारे की स्थिति को लेकर जानकारी ली जाती रही। यदि वास्तव में गोशाला में कोई दिक्कत थी तो बैठकों में इसे क्यों नहीं उठाया गया।
पहले दिन 10 गायों का पोस्टमार्टम, रिपोर्ट से खुलेगा मौत का कारण
बुधवार को 10 गायों का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा। इसके अलावा विसरा जांच के लिए सैंपल भी भेजे जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच शुरू होते ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस-किस कर्मचारी की ड्यूटी थी और किस स्तर पर लापरवाही हुई। पुलिस जल्द लापरवाही बरते वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है।