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चंडीगढ़ में शिक्षा का सिंडिकेट: किताबों के नाम पर अभिभावकों से वसूली, 45 करोड़ तक पहुंचा इस धंधे का गणित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 07 Apr 2026 03:01 AM IST
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सार

चंडीगढ़ में चल रहे शिक्षा सिंडिकेट का मूलमंत्र है कि किताबें केवल चुनिंदा पब्लिशर की ही लगाई जाएं जिससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प न बचे। यह व्यवस्था यूकेजी से लेकर बारहवीं तक लागू है, जहां किताबों और कॉपियों का एक सेट 7 हजार से 10 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है।

Education syndicate: Extortion from parents in the name of books
सेक्टर 22 स्थित मॉडर्न बुक स्टोर से किताबें खरीद कर बाहर आते अभिभावक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ में शिक्षा का सिंडिकेट चल रहा है। निजी स्कूलों की मनमानी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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शिक्षा विभाग की सख्ती के चलते स्कूल भले ही सीधे किसी खास दुकान से किताबें खरीदने के लिए नहीं कहते लेकिन कोर्स में शामिल किताबें केवल एक या दो दुकानों पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका फायदा उठाकर किताब विक्रेता मनमाने दाम वसूल रहे हैं। यह धंधा अब औसतन 45 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

दुकानदारों ने स्पेशल कॉपियों के नाम पर अलग बंडल भी तैयार कर लिए हैं। इन कॉपियों पर स्कूल का नाम छपा होता है जबकि गुणवत्ता सामान्य कॉपियों जैसी ही रहती है। इसके बावजूद इन्हें दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूल अपने नाम की प्रिंटेड कॉपियां, रजिस्टर और डायरी खरीदने का दबाव बनाते हैं। हालांकि शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल सिर्फ नाम के स्टिकर उपलब्ध कराएं जिन्हें साधारण कॉपियों पर लगाया जा सके लेकिन विभाग के नियम ताक पर हैं।

वेबसाइट पर डलवाई थी लिस्ट

चंडीगढ़ पैरेंट एसोसिएशन ने इस बार किताबों और कॉपियों का मुद्दा जनवरी में ही उठा दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को नोटिस किया कि अपनी किताबों की लिस्ट वेबसाइट पर डाल दें जिससे पब्लिशर उनको छाप सकें और मोनोपोली खत्म की जा सके। लेकिन दो स्कूलों ने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद दोबारा नोटिस भेजा गया, तब जाकर दो स्कूलों ने भी किताबों की लिस्ट डाली। इसके बाद भी कुछ ऐसा पब्लिशर आ गए जिनका अता पता तक नहीं है।

हमने बदलाव का प्रयास किया

हमने इस बार बदलाव का प्रयास किया था। शिक्षा विभाग ने कार्रवाई भी की। स्कूलों को नोटिस दिया कि उनकी किताबें वेबसाइट पर डलवाईं। नतीजन दो से तीन दुकानों में यह किताबें उपलब्ध भी हो गईं पर तीन से चार स्कूलों ने किताबें नहीं डालीं, जिनको बाद में नोटिस देने पर उन्होंने भी इसको फॉलो किया। फिर भी कई किताबें ऐसी हैं जो कि एक ही दुकान पर उपलब्ध हैं। -नितिन गोयल, प्रेसीडेंट, चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन

शिक्षा के इस सिंडिकेट को तोड़ना होगा

जब लिस्ट मिली तो हमने इन किताबों को नई दिल्ली तक मंगवाने का प्रयास किया पर वहां भी कोई किताब उपलब्ध नहीं थी। यह किताबें चंडीगढ़ सेक्टर-47 की एक दुकान पर ही मिलीं। मजबूरन नौ हजार रुपये में किताबें खरीदनी पड़ीं। शिक्षा के इस सिंडिकेट को तोड़ना होगा क्योंकि हरेक अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता है। -शादाब राठी, अभिभावक

मैंने अपने बच्चों के लिए किताबें खरीदीं तो सातवीं कक्षा की किताबें 2900 रुपये में मिलीं जबकि कॉपियां हमने नहीं लीं। यही किताबें अगर किसी दूसरी दुकान से खरीदी जाएं तो कीमत करीब 3000 रुपये तक पहुंच जाती है। सबसे ज्यादा अंतर कॉपियों के दामों में देखने को मिलता है, जहां अलग-अलग दुकानों पर कीमतों में काफी वैरिएशन है। -जीशान अंसारी, अभिभावक

किताबों के धंधे का गणित

चंडीगढ़ में प्राइवेट स्कूल 83
एक प्राइवेट स्कूल में बच्चे 900 (औसत)
एक बच्चे की किताबें 6000 (औसत)
कुल धंधा 44.82 करोड़ रुपये

इस बार सभी स्कूलों को नोटिस इश्यू किए थे, जिसके बाद किताबों की लिस्ट स्कूलों ने पहले ही वेबसाइट पर डाल दी थी। लेकिन अभी भी शिकायतें आ रहीं है। हमारी इस समस्या पर नजर है। इसको खत्म करने का प्रयास किया जाएगा। -नीतिश सिंगला, डायरेक्टर, एजूकेशन, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग

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