{"_id":"6988faee21f322db390b3681","slug":"encroachment-of-8-to-10-feet-in-the-markets-the-system-helpless-encroachment-could-not-be-removed-even-in-the-mayors-ward-chandigarh-news-c-16-pkl1091-944407-2026-02-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: बाजारों में 8 से 10 फीट तक कब्जा, सिस्टम बेबस... मेयर के वार्ड में भी नहीं हट पाया अतिक्रमण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: बाजारों में 8 से 10 फीट तक कब्जा, सिस्टम बेबस... मेयर के वार्ड में भी नहीं हट पाया अतिक्रमण
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर के बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करने के नगर निगम के दावे जमीनी हकीकत में फेल नजर आ रहे हैं। बीते एक महीने से लगातार चल रहे अभियान के बावजूद शहर के प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण एक फीट भी कम नहीं हो पाया है। सेक्टर-15, 22, 22बी और 22सी जैसे व्यस्त इलाकों में हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं। वेंडिंग जोन में किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अतिक्रमण फल-फूल रहा है। निगम की कार्रवाई भी सिर्फ चालान काटने और सामान जब्त करने तक सीमित रह गई है।
निगम सूत्रों के अनुसार अभियान के दौरान इतना सामान जब्त किया गया कि स्टोर तक भर चुके हैं लेकिन बाजारों में दुकानदारों और अवैध वेंडरों का कब्जा जस का तस है। कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ही दुकानदार दोबारा तय सीमा से बाहर सामान सजा लेते हैं। कई मामलों में निगम की टीम के पहुंचने से पहले ही अतिक्रमणकारियों को सूचना मिल जाती है जिससे वे अस्थायी रूप से सामान हटा लेते हैं।
मेयर के वार्ड में भी कम नहीं हुआ अतिक्रमण
मेयर सौरभ जोशी के वार्ड में आने वाले सेक्टर 15 और पटेल मार्केट में भी अतिक्रमण कम नहीं हुआ। यहां कई दुकानदार 7 से 10 फीट तक सार्वजनिक स्थान पर कब्जा किए हुए हैं। तीन महीने पहले नगर आयुक्त अमित कुमार के दौरे के दौरान दुकानों को तय सीमा में लाया गया था, लेकिन उनके जाते ही अतिक्रमण दोबारा फैल गया।
राजनीतिक दबाव बना सबसे बड़ी बाधा
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक पूर्व मेयर की ओर से हाल ही में अभियान को धीमा करने का दबाव बनाया गया जिसके बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई बंद हो गई। कई बाजारों में वोट बैंक की राजनीति के चलते पार्षद ही अभियान चलाने से मना कर देते हैं। जब टीम मौके पर पहुंचती है तो दबाव बनाकर उसे वापस लौटने पर मजबूर कर दिया जाता है।
स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा निगम
नगर आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के लिए स्टाफ की भारी कमी है। वर्तमान में पुलिस बल और निगम कर्मचारियों को मिलाकर करीब 90 लोगों की टीम काम कर रही है जो शहर के सभी बाजारों के लिए नाकाफी है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन दल में कर्मचारियों और इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
तीन बाजारों की जमीनी तस्वीर
सेक्टर 15 और पटेल मार्केट
यहां स्थायी दुकानदार और वेंडर 7 से 10 फीट तक अतिक्रमण कर रहे हैं। निगम की कार्रवाई अस्थायी साबित हो रही है। मेयर सौरभ जोशी का वार्ड है, यहां पर अतिक्रमणकारियों को किसकी परवाह।
सेक्टर 22बी: पार्किंग पर कब्जा
मार्केट की पार्किंग जमीन पर ढाबे और दुकानें चल रही हैं। कई दुकानदारों के लाइसेंस खत्म हो चुके हैं या हैं ही नहीं। प्रधान गोपाल वाधवा के अनुसार, शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सेक्टर 22सी: किरण सिनेमा से शास्त्री मार्केट तक
यहां वेंडिंग जोन में स्थायी और अस्थायी निर्माण खुलेआम हो रहे हैं। जेसीबी से कुछ निर्माण हटाए गए, लेकिन आगे की कार्रवाई ठप है। नगर निगम की लाख कोशिश फेल नजर आती हैं।
नियम कागजों में, बाजारों में मनमानी
नगर निगम के नियम के मुताबिक वेंडिंग जोन में किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बाजारों में अतिक्रमण फल-फूल रहा है। क्या निगम की सख्ती सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी या कभी बाजार वास्तव में अतिक्रमण मुक्त हो पाएंगे?
Trending Videos
निगम सूत्रों के अनुसार अभियान के दौरान इतना सामान जब्त किया गया कि स्टोर तक भर चुके हैं लेकिन बाजारों में दुकानदारों और अवैध वेंडरों का कब्जा जस का तस है। कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ही दुकानदार दोबारा तय सीमा से बाहर सामान सजा लेते हैं। कई मामलों में निगम की टीम के पहुंचने से पहले ही अतिक्रमणकारियों को सूचना मिल जाती है जिससे वे अस्थायी रूप से सामान हटा लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेयर के वार्ड में भी कम नहीं हुआ अतिक्रमण
मेयर सौरभ जोशी के वार्ड में आने वाले सेक्टर 15 और पटेल मार्केट में भी अतिक्रमण कम नहीं हुआ। यहां कई दुकानदार 7 से 10 फीट तक सार्वजनिक स्थान पर कब्जा किए हुए हैं। तीन महीने पहले नगर आयुक्त अमित कुमार के दौरे के दौरान दुकानों को तय सीमा में लाया गया था, लेकिन उनके जाते ही अतिक्रमण दोबारा फैल गया।
राजनीतिक दबाव बना सबसे बड़ी बाधा
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक पूर्व मेयर की ओर से हाल ही में अभियान को धीमा करने का दबाव बनाया गया जिसके बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई बंद हो गई। कई बाजारों में वोट बैंक की राजनीति के चलते पार्षद ही अभियान चलाने से मना कर देते हैं। जब टीम मौके पर पहुंचती है तो दबाव बनाकर उसे वापस लौटने पर मजबूर कर दिया जाता है।
स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा निगम
नगर आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के लिए स्टाफ की भारी कमी है। वर्तमान में पुलिस बल और निगम कर्मचारियों को मिलाकर करीब 90 लोगों की टीम काम कर रही है जो शहर के सभी बाजारों के लिए नाकाफी है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन दल में कर्मचारियों और इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
तीन बाजारों की जमीनी तस्वीर
सेक्टर 15 और पटेल मार्केट
यहां स्थायी दुकानदार और वेंडर 7 से 10 फीट तक अतिक्रमण कर रहे हैं। निगम की कार्रवाई अस्थायी साबित हो रही है। मेयर सौरभ जोशी का वार्ड है, यहां पर अतिक्रमणकारियों को किसकी परवाह।
सेक्टर 22बी: पार्किंग पर कब्जा
मार्केट की पार्किंग जमीन पर ढाबे और दुकानें चल रही हैं। कई दुकानदारों के लाइसेंस खत्म हो चुके हैं या हैं ही नहीं। प्रधान गोपाल वाधवा के अनुसार, शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सेक्टर 22सी: किरण सिनेमा से शास्त्री मार्केट तक
यहां वेंडिंग जोन में स्थायी और अस्थायी निर्माण खुलेआम हो रहे हैं। जेसीबी से कुछ निर्माण हटाए गए, लेकिन आगे की कार्रवाई ठप है। नगर निगम की लाख कोशिश फेल नजर आती हैं।
नियम कागजों में, बाजारों में मनमानी
नगर निगम के नियम के मुताबिक वेंडिंग जोन में किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बाजारों में अतिक्रमण फल-फूल रहा है। क्या निगम की सख्ती सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी या कभी बाजार वास्तव में अतिक्रमण मुक्त हो पाएंगे?