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Punjab Year Ender 2023: विदा हुए राजनीति के बाबा बोहड़ बादल... अमृतपाल के कारण कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

पंकज शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 30 Dec 2023 11:55 AM IST
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सार

पंजाब में 2023 का साल राजनीतिक तौर पर काफी उथल पुथल वाला रहा। जहां पंजाब की राजनीति के बाबा बोहड़ कहे जाने वाले प्रकाश सिंह बादल इस दुनिया को अलविदा कह गए वहीं अमृतपाल की खालिस्तानी गतिविधियों के कारण पंजाब पूरे देश में चर्चा में आ गया। 

Faces most discussed in Punjab in Year 2023
पंजाब के चर्चित चेहरे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

2023 पंजाब के लिए मिला-जुला साल रहा। एक तरफ खालिस्तान समर्थक अमृतपाल ने आत्मसमर्पण किया तो दूसरी तरफ एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने शिअद संयुक्त को ज्वाइन कर लिया। श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी आप सांसद राघव चड्डा के शगुन कार्यक्रम में शामिल होने के कारण चर्चा में रहे।

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अमृतपाल
अप्रैल में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अमृतपाल सिंह वापिस पंजाब दी जत्थेबंदी का प्रमुख है। अमृतपाल और उसके समर्थकों ने अजनाला थाना में से अपनी एक साथी की रिहाई के लिए थाने का घेराव किया था। इसके बाद अमृतपाल भूमिगत हो गया। उसे पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस व अन्य एजेंसियों की ओर से राज्य भर में सर्च अभियान चलाया गया। आखिर अमृतपाल ने गांव रोडे में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद अमृतपाल और उसके साथियों को डिब्रूगढ़ जेल में भेजा गया।
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ज्ञानी हरप्रीत सिंह
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा के शगुन कार्यक्रम में शामिल होने के कारण चर्चा में रहे। इसी के बाद एसजीपीसी की ओर से जून 2023 में उन्हें अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पद से हटा दिया गया। ज्ञानी हरप्रीत सिंह को लेकर भी राज्य की राजनीति काफी गरमाई रही।

ज्ञानी रघबीर सिंह
एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी ने 15 जून 2023 को ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त का नया जत्थेदार नियुक्त कर दिया। ज्ञानी रघबीर सिंह पहले तख्त केसगढ़ साहिब के जत्थेदार थे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाकर ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री हरमंदिर साहिब का मुख्य ग्रंथी भी तैनात किया गया। इसी दौरान ज्ञानी सुल्तान सिंह को तख्त केसगढ़ साहिब का जत्थेदार भी नियुक्त किया गया। 

ज्ञानी जगतार सिंह
श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह का देहांत हो गया। ज्ञानी जगतार सिंह लंबा समय तक श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी के पद पर जिम्मेदारी निभाते रहे। सिख पंथ में उनका काफी मान-सम्मान था। वह ग्रंथी की भी अलग-अलग जिम्मेदारियों को अलग-अलग स्थानों पर निभाते रहे हैं।

हरजिंदर धामी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वार्षिक चुनावों के दौरान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को एसजीपीसी का मतदान के माध्यम से तीसरी बार अध्यक्ष चुन लिया गया। नवंबर 2023 में हुए एसजीपीसी के वार्षिक चुनावों में धामी ने संत बलबीर सिंह घुन्नस को भारी मतों से हराकर यह जीत हासिल की।

सुखबीर बादल
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल इस वर्ष उस वक्त चर्चा में आए जब अकाली दल के स्थापना दिवस पर दिसंबर 2023 के दौरान उन्होंने अकाली दल के कार्यकाल के दौरान हुई पंथक व अन्य गलतियों की क्षमा अकाली लीडरशिप के साथ श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास करके मांगी। इस दौरान उनकी ओर से खुद ही अपने आप को दोषी बताया, खुद ही जोड़े साफ करने और बर्तन साफ करने की सजा निभाई। इसके चलते वह विरोधियों के रडार पर आ गए।

मंजीत सिंह जीके 
वरिष्ठ अकाली नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके जो जोगो पार्टी के अध्यक्ष थे, ने दिसंबर 2023 में दोबारा अकाली दल बादल को ज्वाइन कर लिया। अकाली दल बादल की नीतियों के चलते ही जीके ने अकाली दल बादल छोड़ा था। इसके बाद लंबे समय अलग रहने के बाद मंजीत सिंह जीके ने सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई को स्वीकार करते हुए अकाली दल बादल को ज्वाइन कर लिया।

बीबी जागीर कौर
एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष और अकाली दल बादल से निलंबित चली आ रही बीबी जागीर कौर जून 2023 में दोबारा उस वक्त चर्चा में आई जब उन्होंने वरिष्ठ अकाली नेता जगमीत सिंह बराड़ ने साथ मिलकर अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींडसा की अगुवाई वाले शिअद संयुक्त को ज्वाइन कर लिया। बीबी जागीर कौर के इस फैसले से यहां अकाली दल बादल को काफी आघात लगा वहीं संयुक्त अकाली दल मजबूत हुआ और बीबी जागीर कौर एक बार फिर पंजाब की राजनीति की चर्चा में आ गई।

बिक्रम मजीठिया
शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रभावशाली नेता रहे बिक्रम सिंह मजीठिया तब चर्चा में आ गए जब करोड़ों रुपये की नशा तस्करी के मामले की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने दिसंबर में मजीठिया को पेश होने के लिए कहा। इस दौरान मजीठिया से एसआईटी ने करीब 6 घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद मजीठिया को फिर पेशी के लिए बुलाया गया लेकिन वे एसआईटी के सामने दूसरी बार पेश नहीं हुए। 

बलवंत सिंह राजोआना
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी व फांसी की सजा का इंतजार कर रहे बब्बर खालसा के आतंकवादी बलवंत सिंह राजोआना ने जेल में अनशन शुरू कर दिया। राजोआना ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में न तबदील करने के लिए अकाली दल को मुख्य दोषी एक पत्र के माध्यम से एलान किया तो राजोआना एक बार फिर पंजाब की राजनीति की सुर्खियों में आ गया।

बनवारी लाल पुरोहित
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित उस वक्त चर्चा में आ गए जब उन्होंने बार्डर एरिया में किसानों और पंचों सरपंचों के साथ बैठकें करते हुए उनसे सीमांत इलाकों की मुश्किलों को लेकर फीडबैक लेनी शुरू कर दी। राजपाल की ओर से पंजाब सरकार के समानांतर कार्यक्रम रखने के कारण पंजाब की राजनीति काफी गरमाई रही। राजपाल ने पंजाब सरकार की ओर से एसजीपीसी एक्ट संशोधित बिल को भी विधानसभा से पास किए जाने के बावजूद अन्य अलग-अलग बिलों समेत स्वीकृति नहीं दी तो उस समय भी राजपाल पंजाब की राजनीति में विशेष चर्चा में रहे।

गुरजीत औजला
अमृतसर के कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला इस वर्ष संसद की कार्रवाई में चर्चा में रहे। संसद में कुछ युवाओं की ओर से धुंआ पैदा करने वाले विस्फोट किए गए। एक बम औजला की सीट के पास गिरा जिसे उठाकर औजला ने बाहर फेंक दिया। इसके बाद उनकी ओर से आरोपी युवाओं को पकड़कर पुलिस के हवाले भी कर दिया। इसके चलते औजला मीडिया में चर्चा का विषय बन गए और सरकार ने उनको सम्मानित करने का भी एलान किया।

ओम प्रकाश सोनी
पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री और अमृतसर सेंट्रल विधानसभा से पूर्व विधायक ओम प्रकाश सोनी को जुलाई 2023 में स्त्रोतों से अधिक आमदनी के मामले में विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया। ओपी सोनी काफी समय तक ज्यूडिशियल कस्टडी में रहे। इस दौरान जायदाद की जांच के लिए कई बार सोनी के अलग-अलग स्थानों पर विजिलेंस ने दबिश भी दी और उनको जवाब देने के लिए भी विजिलेंस की टीम के समक्ष पेश होने के लिए समन भी भेजे जाते रहे।

प्रकाश सिंह बादल
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह अप्रैल 2023 में 95 वर्ष की आयु में अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर इस संसार को अलविदा कह गए। प्रकाश सिंह बादल पंजाब की पंथक व अकाली राजनीति के बाबा बोहड़ के नाम से जाने जाते थे। अकाली दल को मजबूत पार्टी बनाने और अकाली दल को पंजाब की सत्ता में लेकर आने के लिए प्रकाश सिंह बादल की राजनीतिक योजनाएं हमेशा सफलता हासिल करती रही है। वह पंजाब की राजनीति में एक जोरदार व प्रभावशाली नेता थे।

नवजोत सिद्धू
कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भी इस वर्ष राजनीतिक चर्चा में रहे। सिद्धू ने अपनी पत्नी नवजोत कौर की ओर से कैंसर जैसी नामुराद बीमारी को जब हरा दिया तो सिद्धू ने दोबारा राजनीतिक समगर्मियां शुरू करते हुए पटियाला से राजनीति शुरू कर दी। इसके चलते सिद्धू ने एक बार फिर अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए पंजाब कांग्रेस नेतृत्व के साथ सलाह किए बिना गतिविधियां अपने स्तर पर शुरू कर दी। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और प्रताप सिंह बाजवा खुलकर सिद्धू के खिलाफ मैदान में आए गए। इसके चलते अभी भी सिद्धू को लेकर विभिन्न राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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