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Chandigarh News: लैंड पूलिंग पॉलिसी पर आमने-सामने किसान और प्रशासन

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 03:05 AM IST
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Farmers and administration face to face on land pooling policy
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ओर शहर के किसान पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं चंडीगढ़ प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस नीति को लागू करना संभव नहीं है। प्रशासन का कहना है कि शहर में बची हुई जमीन के उपयोग को लेकर मास्टर प्लान में पहले से ही स्पष्ट प्रावधान किए जा चुके हैं।
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सोमवार को किसानों ने सारंगपुर-मुल्लापुर बैरियर के पास एकत्र होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि यदि लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू की जाती है तो उन्हें अपनी जमीन के बदले विकसित क्षेत्र में प्लॉट या अन्य लाभ मिल सकते हैं।
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दूसरी ओर मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने शहर में उपलब्ध जमीन की स्थिति का विस्तृत आकलन करते हुए प्रशासन का रुख साफ किया है। उनके अनुसार चंडीगढ़ में कुल करीब 38 हजार एकड़ जमीन है और इसमें से लगभग पूरी जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है। केवल करीब 2500 एकड़ जमीन ही ऐसी बची है जो अभी अधिग्रहण से बाहर है।
मुख्य सचिव के मुताबिक इस बची हुई जमीन के उपयोग को लेकर भी मास्टर प्लान में पहले से ही योजनाएं तय की गई हैं। ऐसे में नई लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करना प्रशासन के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता।
ग्रीन एरिया और संस्थानों के लिए जमीन आरक्षित
प्रशासन के अनुसार बची हुई करीब 2500 एकड़ जमीन में से लगभग 700 से 800 एकड़ जमीन को ग्रीन एरिया के रूप में सुरक्षित रखना अनिवार्य है ताकि शहर का पर्यावरण संतुलन और हरित क्षेत्र बना रहे। इसके अलावा मास्टर प्लान के अनुसार करीब 250 से 300 एकड़ जमीन रेजिडेंशियल जोन के लिए निर्धारित की गई है। वहीं लगभग 700 एकड़ जमीन संस्थानों, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, कॉमर्शियल प्रोजेक्ट और अन्य विकास कार्यों के लिए चिन्हित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जब जमीन के उपयोग को लेकर पहले से ही विस्तृत योजना तैयार है, तो ऐसी स्थिति में लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करना आसान नहीं है।
मुख्य सचिव के बयान के बाद तेज हुआ विरोध
प्रशासन का रुख साफ होने के बाद किसानों का विरोध और तेज हो गया है। किसानों का आरोप है कि शहर के विकास के नाम पर वर्षों से उनकी जमीनें अधिग्रहित की जाती रही हैं लेकिन उन्हें उसका उचित लाभ नहीं मिल पाया। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कमेटी बनाकर लैंड पूलिंग पॉलिसी पर चर्चा शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी
लैंड पूलिंग पॉलिसी एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार या विकास प्राधिकरण किसानों/जमीन मालिकों की जमीन को एक साथ (पूल) लेकर उसका योजनाबद्ध तरीके से विकास करता है। इसमें सड़क, पार्क, सीवरेज, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाती हैं। विकास कार्य पूरा होने के बाद जमीन का एक हिस्सा मालिकों को वापस दिया जाता है जबकि बाकी जमीन का उपयोग सड़क, पार्क, संस्थान या सरकारी परियोजनाओं के लिए किया जाता है। इस योजना में किसानों को अपनी जमीन का विकसित हिस्सा प्लॉट के रूप में वापस मिलता है जिसकी कीमत पहले से अधिक हो जाती है।
पंजाब में व्यवस्था
पंजाब में कई शहरों में इस नीति के तहत किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित रिहायशी या कमर्शियल प्लॉट दिए जाते हैं। इससे किसानों को जमीन की बढ़ी हुई कीमत का लाभ मिलता है और शहरों का योजनाबद्ध विकास होता है।
हरियाणा में व्यवस्था
हरियाणा में भी इस मॉडल पर कुछ क्षेत्रों में काम हुआ है। यहां किसानों को जमीन के बदले विकसित प्लॉट या फ्लोर एरिया का हिस्सा मिलता है। इस नीति का उद्देश्य किसानों को बेहतर मुआवजा देना और शहरी विकास को तेज करना है।
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