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Chandigarh News: प्रशासन के खिलाफ उतरे 22 गांवों के किसान
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ पेंडू विकास मंच के आह्वान पर सोमवार को शहर के 22 गांवों के किसानों ने सारंगपुर बैरियर पर प्रशासन के खिलाफ धरना दिया। धरने में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। किसानों ने मांग की कि चंडीगढ़ में भी पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई जाए।
धरने के दौरान किसानों ने लाल डोरा खत्म करने, गांवों को आपस में जोड़कर वार्ड बनाए जाने, कलेक्टर रेट को मार्केट रेट के बराबर करने और एग्रीकल्चर लैंड के मल्टीप्लाइंग फैक्टर को 1.25 से बढ़ाकर 2 करने की मांग भी उठाई। किसानों का कहना है कि इन मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
धरने की सूचना मिलने पर एसडीएम सेंट्रल नवीन मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने किसानों से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। किसानों का आरोप है कि चंडीगढ़ के गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने के बावजूद कृषि भूमि के लिए न तो लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई गई है और न ही चेंज इन लैंड यूज पॉलिसी लागू की गई है। किसानों का कहना है कि यदि लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू की जाती है तो लाल डोरा प्रणाली खत्म हो जाएगी और गांवों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
पेंडू विकास मंच के प्रधान सतिंदर सिद्धू ने कहा कि चंडीगढ़ के किसानों में दिन-प्रतिदिन नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की जमीनों पर चंडीगढ़ शहर बसाया गया, उन्हीं के लिए आज तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है, जबकि पंजाब और हरियाणा में किसानों के लिए ऐसी पॉलिसियां लागू हैं। धरने में पेंडू संघर्ष कमेटी के संरक्षक साधु सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एच.एस. लक्खी, रंजीत सिंह ढिल्लों मनीमाजरा, हरभजन सिंह कजहेड़ी, जीत सिंह बहलाना, चंडीगढ़ समूह गुरुद्वारा प्रबंधक संगठन के अध्यक्ष तारा सिंह, गुरजीत सिंह डड्डूमाजरा, रॉबिन, रामपाल, भूपिंदर मटुरिया समेत कई पूर्व सरपंच, पंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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धरने के दौरान किसानों ने लाल डोरा खत्म करने, गांवों को आपस में जोड़कर वार्ड बनाए जाने, कलेक्टर रेट को मार्केट रेट के बराबर करने और एग्रीकल्चर लैंड के मल्टीप्लाइंग फैक्टर को 1.25 से बढ़ाकर 2 करने की मांग भी उठाई। किसानों का कहना है कि इन मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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धरने की सूचना मिलने पर एसडीएम सेंट्रल नवीन मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने किसानों से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। किसानों का आरोप है कि चंडीगढ़ के गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने के बावजूद कृषि भूमि के लिए न तो लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई गई है और न ही चेंज इन लैंड यूज पॉलिसी लागू की गई है। किसानों का कहना है कि यदि लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू की जाती है तो लाल डोरा प्रणाली खत्म हो जाएगी और गांवों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
पेंडू विकास मंच के प्रधान सतिंदर सिद्धू ने कहा कि चंडीगढ़ के किसानों में दिन-प्रतिदिन नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की जमीनों पर चंडीगढ़ शहर बसाया गया, उन्हीं के लिए आज तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है, जबकि पंजाब और हरियाणा में किसानों के लिए ऐसी पॉलिसियां लागू हैं। धरने में पेंडू संघर्ष कमेटी के संरक्षक साधु सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एच.एस. लक्खी, रंजीत सिंह ढिल्लों मनीमाजरा, हरभजन सिंह कजहेड़ी, जीत सिंह बहलाना, चंडीगढ़ समूह गुरुद्वारा प्रबंधक संगठन के अध्यक्ष तारा सिंह, गुरजीत सिंह डड्डूमाजरा, रॉबिन, रामपाल, भूपिंदर मटुरिया समेत कई पूर्व सरपंच, पंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।