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होमियोपैथी दिवस पर विशेष: हार्मोनल बदलाव से बढ़ता है माइग्रेन, होम्योपैथी से बेहतर समाधान की उम्मीद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 10 Apr 2026 11:42 AM IST
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सार

महिलाओं में माइग्रेन की अधिकता का मुख्य कारण एस्ट्रोजन हार्मोन में होने वाला उतार-चढ़ाव है। पीरियड्स से पहले, गर्भावस्था के दौरान और मेनोपॉज के समय हार्मोनल बदलाव माइग्रेन को बढ़ावा देते हैं।

Hormonal Changes Trigger Migraines Hopes for Better Solution Through Homeopathy
माइग्रेन - फोटो : फाइल
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विस्तार

सिरदर्द की सामान्य समस्या समझा जाने वाला माइग्रेन आज महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। खासकर 18 से 45 वर्ष की प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं में इसकी समस्या तेजी से बढ़ रही है। 
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इसकी बड़ी वजह हार्मोनल उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव और बदलती जीवनशैली को माना जा रहा है। ऐसे में होमियोपैथी कॉलेज एंड हॉस्पिटल के विशेषज्ञों का एक अध्ययन इस दिशा में राहत की उम्मीद लेकर आया है। इसमें होम्योपैथी को एक संभावित सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में सामने रखा गया है।
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अफ्रीकन जर्नल ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च में प्रकाशित इस अध्ययन में होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने माइग्रेन के प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका का विश्लेषण किया है। इस शोध का नेतृत्व डॉ अमृतप्रीत कौर ने किया, जबकि डॉ. विनय कुमार, डॉ. रूपिंदर कौर, डॉ. सुरुचि शारदा और डॉ. सोनिया भी इस अध्ययन में शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने अध्ययन के दौरान पबमेड, स्कोपस, कोचरने लाइब्रेरी और आयुष जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय डेटाबेस से 15 अध्ययनों को शामिल किया गया। इनमें जिनमें रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल, ऑब्जर्वेशनल स्टडी और केस रिपोर्ट शामिल थीं।

हर व्यक्ति के हिसाब से अलग-अलग दवा होती हैं प्रभावी

इन सभी के विश्लेषण से यह सामने आया कि व्यक्ति की जरूरत के आधार पर दी गई होम्योपैथिक दवाओं से माइग्रेन के लक्षणों में सुधार देखा गया। मरीजों में सिरदर्द के अटैक की संख्या और तीव्रता कम हुई, साथ ही अटैक की अवधि में भी कमी दर्ज की गई और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर हुई। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में माइग्रेन की अधिकता का मुख्य कारण एस्ट्रोजन हार्मोन में होने वाला उतार-चढ़ाव है। पीरियड्स से पहले, गर्भावस्था के दौरान और मेनोपॉज के समय हार्मोनल बदलाव माइग्रेन को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा तनाव, नींद की कमी और खान-पान की गड़बड़ी भी इस समस्या को बढ़ाती है।

दिमाग में बढ़ जाती है सीजीआरपी केमिकल्स की सक्रियता

रिसर्च में यह भी बताया गया है कि माइग्रेन के दौरान दिमाग में सीजीआरपी जैसे केमिकल्स की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे दर्द और सूजन की प्रक्रिया तेज हो जाती है। वर्तमान में माइग्रेन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं कई बार साइड इफेक्ट्स पैदा करती हैं, खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए ये जोखिम भरी हो सकती हैं। ऐसे में होम्योपैथी को एक सुरक्षित और व्यक्तिगत उपचार विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो मरीज की संपूर्ण स्थिति को ध्यान में रखकर उपचार प्रदान करता है।

बड़े स्तर पर और मल्टीसेंटर क्लिनिकल ट्रायल्स किए जाने की आवश्यकता

विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दिशा में अभी और व्यापक अध्ययन की जरूरत है, क्योंकि उपलब्ध डेटा सीमित है। इसलिए भविष्य में बड़े स्तर पर और मल्टीसेंटर क्लिनिकल ट्रायल्स किए जाने की आवश्यकता बताई गई है। यह अध्ययन माइग्रेन से परेशान महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन किसी भी इलाज को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
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