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Chandigarh News: महाराष्ट्र के फैसले पर आईएमए का विरोध, कहा- मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी
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चंडीगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण देने की अनुमति दी गई है। आईएमए का कहना है कि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और ऐसे फैसले से मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
आईएमए चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है। बिना उचित कानूनी मंजूरी के दोहरी पंजीकरण व्यवस्था लागू करना भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमनीक सिंह बेदी ने कहा कि हर डॉक्टर को उसी चिकित्सा पद्धति में इलाज करना चाहिए, जिसके लिए वह प्रशिक्षित और पंजीकृत है।
डॉ. बेदी ने कहा कि भारत में एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी सभी पद्धतियों का अपना महत्व है। लेकिन हर पद्धति को उसके अपने वैज्ञानिक आधार, शिक्षा और शोध के साथ मजबूत किया जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस सीटों की संख्या काफी बढ़ी है। अब जरूरत केवल अधिक डॉक्टर बनाने की नहीं, बल्कि बेहतर इलाज, संक्रमण नियंत्रण, सही दवाओं के उपयोग, मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और नैतिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
आईएमए चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है। बिना उचित कानूनी मंजूरी के दोहरी पंजीकरण व्यवस्था लागू करना भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
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पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमनीक सिंह बेदी ने कहा कि हर डॉक्टर को उसी चिकित्सा पद्धति में इलाज करना चाहिए, जिसके लिए वह प्रशिक्षित और पंजीकृत है।
डॉ. बेदी ने कहा कि भारत में एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी सभी पद्धतियों का अपना महत्व है। लेकिन हर पद्धति को उसके अपने वैज्ञानिक आधार, शिक्षा और शोध के साथ मजबूत किया जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस सीटों की संख्या काफी बढ़ी है। अब जरूरत केवल अधिक डॉक्टर बनाने की नहीं, बल्कि बेहतर इलाज, संक्रमण नियंत्रण, सही दवाओं के उपयोग, मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और नैतिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।