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Chandigarh News: जलालाबाद मंडी शिफ्टिंग पर ब्रेक, आढ़तियों ने विधायक का प्रस्ताव ठुकराया
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जलालाबाद। जलालाबाद की अनाज मंडी को स्थानांतरित करने का मामला फिलहाल अधर में लटक गया है। मार्केट कमेटी कार्यालय में विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी और आढ़तियों के बीच हुई बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। विधायक द्वारा मंडी को बाहमनी वाला रोड पर शिफ्ट करने के प्रस्ताव को आढ़तियों ने साफ तौर पर खारिज कर दिया।
बैठक में विधायक गोल्डी ने कहा कि मौजूदा अनाज मंडी केवल 33 एकड़ में फैली है, जिससे खरीद सीजन के दौरान किसानों को फसल रखने में भारी परेशानी होती है। सीमित स्थान के कारण शहर में यातायात व्यवस्था भी चरमरा जाती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाहमनी वाला रोड पर 86 एकड़ जमीन का चयन किया है, जहां आधुनिक मंडी विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित मंडी में पक्के शेड, खुली पार्किंग और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थीं।
हालांकि, आढ़तियों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शहर के केंद्र में स्थित मौजूदा मंडी ही किसानों की प्राथमिक पसंद है। मंडी के बाहर शिफ्ट होने से किसानों और व्यापारियों दोनों पर अतिरिक्त परिवहन खर्च का बोझ पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नई मंडी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय मौजूदा मंडी के आसपास अतिरिक्त जमीन खरीदकर उसका विस्तार किया जाए और वहीं आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएं। आढ़तियों के कड़े रुख के बाद मंडी शिफ्टिंग से जुड़ा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। संवाद
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बैठक में विधायक गोल्डी ने कहा कि मौजूदा अनाज मंडी केवल 33 एकड़ में फैली है, जिससे खरीद सीजन के दौरान किसानों को फसल रखने में भारी परेशानी होती है। सीमित स्थान के कारण शहर में यातायात व्यवस्था भी चरमरा जाती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाहमनी वाला रोड पर 86 एकड़ जमीन का चयन किया है, जहां आधुनिक मंडी विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित मंडी में पक्के शेड, खुली पार्किंग और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थीं।
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हालांकि, आढ़तियों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शहर के केंद्र में स्थित मौजूदा मंडी ही किसानों की प्राथमिक पसंद है। मंडी के बाहर शिफ्ट होने से किसानों और व्यापारियों दोनों पर अतिरिक्त परिवहन खर्च का बोझ पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नई मंडी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय मौजूदा मंडी के आसपास अतिरिक्त जमीन खरीदकर उसका विस्तार किया जाए और वहीं आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएं। आढ़तियों के कड़े रुख के बाद मंडी शिफ्टिंग से जुड़ा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। संवाद