सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Punjab ›   kamal nath leaved punjab congress in-charge post

पंजाब में विरोध: कमलनाथ ने छोड़ा पंजाब कांग्रेस प्रभारी का पद

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 16 Jun 2016 06:07 PM IST
विज्ञापन
kamal nath leaved punjab congress in-charge post
कमलनाथ ने द‌िया इस्तीफा
विज्ञापन

चंद दिनों पहले बनाए गए पंजाब कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ ने बुधवार को अपना पद छोड़ दिया। उनकी नियुक्ति के बाद से ही लगातार उठ रहे विवाद और विपक्षी दलों के हमले के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पद छोड़ने की पेशकश की। उधर, पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कमलनाथ के आग्रह को स्वीकार करते हुए सोनिया गांधी ने उन्हें पंजाब प्रभारी के पद से मुक्त कर दिया। सोनिया गांधी के कमलनाथ की पेशकश स्वीकार करने के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने भी राहत की सांस ली है।

Trending Videos


सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस ने उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी है, उन्होंने हमेशा उसे निभाया है। लेकिन पंजाब प्रभारी के पद पर नियुक्ति के बाद पिछले कुछ दिनों से उन्हें 1984 के दंगों का आरोपी ठहराकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि 2005 तक उनके खिलाफ कभी भी कोई सार्वजनिक बयान, शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


1984 दंगों के 21 साल बाद पहली बार उनका नाम किसी फोरम में शामिल किया गया। एनडीए सरकार की ओर से स्थापित नानावती आयोग ने पूरी तरह जांच करने के बाद उन्हें इस केस से बरी कर दिया था। संसद में भी नानावती आयोग की रिपोर्ट पर बहस के दौरान तत्कालीन सांसद सुखबीर बादल सहित किसी भी अन्य अकाली या भाजपा सांसद ने उनका नाम नहीं उठाया, लेकिन अब कुछ राजनीतिक दल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस तरह के गलत आरोप लगा रहे हैं।

कमलनाथ ने पत्र में लिखा कि यूथ कांग्रेस से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने के बाद वह पार्टी के महासचिव पद तक पहुंचे। वह मंत्री पद पर भी रहे, लेकिन उनके नाम के साथ कभी कोई विवाद नहीं जुड़ा। लेकिन कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मुद्दे को उछाल रहे हैं। विवादों के बावजूद पंजाब के पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जिस तरह से उनका समर्थन किया, उससे वह भावुक हैं।

उन्होंने लिखा कि वह नेहरूवाद राजनीति के आदी रहे हैं और जिस तरह से उन पर विवाद लगे, वह सही नहीं है। वह चाहते हैं कि पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी लोगों, किसानों, युवाओं, कानून व्यवस्था, ड्रग्स जैसे मुद्दों को उठाकर चुनाव लड़े। इसलिए उन्हें इस पद से मुक्त किया जाए, ताकि पार्टी ज्वलंत मुद्दों से न भटक जाए। 
 
1984 के सिख दंगों के लगे हैं आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पर दिल्ली में हुए सिख दंगों के दौरान हुड़दंग करने और बेगुनाहों की हत्या करने वालों का नेतृत्व करने के आरोप लगते रहे हैं। एकमात्र चश्मदीद गवाह मुख्तार सिंह ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान हथियारों से लैस हमलावरों का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे, जिन्होंने रकाबगंज गुरुद्वारे में तोड़फोड़ की। हालांकि, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, जिससे साबित हो कि उन्होंने लोगों को उकसाया। इन हमलों में कई सिखों को जिंदा जला दिया गया था। कमलनाथ ने आयोग के सामने कहा था कि वह घटना के दिन शाम को गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे, ताकि लोगों को शांत कर सकें। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed