सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Know About 80 year old Dr. Vishnu Pandey senior teacher of Chandigarh

शिक्षक दिवस: ज्ञान ही नहीं, जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं विष्णु सर; 100 फीसदी रिजल्ट इनकी पहचान

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 05 Sep 2025 09:52 AM IST
विज्ञापन
सार

1973 में बीएड में गोल्ड मेडलिस्ट रहे डॉ. पांडेय ने 14 साल टीजीटी, 18 साल पीजीटी पद व अन्य पदों पर सेवाएं दीं। 1987 में वह सेक्टर-18 स्थित जीजीएमएसएसएस स्कूल में पहले पुरुष संस्कृत शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए। उस समय वहां 115 लड़कियां पढ़ती थीं। उन्होंने 11 साल तक वहां पढ़ाया और संस्कृत के साथ टेबल टेनिस, वॉलीबॉल व कबड्डी भी सिखाई। मई 2005 में वह रिटायर हुए। 

Know About 80 year old Dr. Vishnu Pandey senior teacher of Chandigarh
डॉ. विष्णु पांडेय - फोटो : अमर उजाला/फाइल
विज्ञापन

विस्तार

चंडीगढ़ के वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षा विभाग के पहले संस्कृत लेक्चरर रहे 80 वर्षीय डॉ. विष्णु पांडेय ने अपने जीवन का लगभग पूरा हिस्सा शिक्षा को समर्पित किया। 

Trending Videos


वे स्कूल स्तर के पहले पीएचडी शिक्षक भी रहे और बाल संस्कार पर 18 किताबें लिखीं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कर चुके डॉ. पांडेय ने कहा कि बच्चों को तभी रुचि आती है जब शिक्षक खुद तैयारी के साथ पढ़ाए। पूरी किताब कंठस्थ याद दो। इस पेशे को नौकरी की तरह न ले।

विज्ञापन
विज्ञापन

शिक्षक पूरी तैयारी के साथ पढ़ाए

डॉ. पांडेय ने कहा कि बच्चों को तभी रुचि आती है जब शिक्षक खुद तैयारी के साथ पढ़ाए। अगर टीचर मेहनत नहीं करेगा तो बच्चों का परिणाम अच्छा नहीं आ सकता। कहा कि उन्होंने हमेशा मई में सिलेबस खत्म कराकर साल भर प्रैक्टिस कराई, जिसकी वजह से रिजल्ट 100 फीसदी आता था। वे कहते हैं कि पूरी किताब उन्हें कंठस्थ रहती थी और बिना किताब देखे पंक्तियां सुना देते थे। इससे बच्चों में भी पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ती थी। उनके पढ़ाए छात्र आज केंद्र सरकार के मंत्रालयों में वरिष्ठ पदों पर, यूटी प्रशासन में अधिकारी और विदेशों में डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं।

अमेरिका से मिलने अचानक स्कूल पहुंच गया छात्र

डॉ. विष्णु ने एक रोचक वाकया साझा किया। कहा कि कई साल पहले सेक्टर-18 स्कूल में पढ़ा रहा था, तभी अचानक एक छात्र आया और मेरे पैर छुए। नाम पूछा तो उसने करण बताया। डॉ पांडे ने तुरंत कहा कि करण तो पहले बड़ा सांवला था, ये इतना गोरा कैसे हो गया। इस पर छात्र ने हंसते हुए कहा कि वह कई साल से अमेरिका में रह रहा है और वहां का पानी लग गया है। डॉ. पांडेय को आज भी कई छात्रों के नाम और यहां तक कि रोल नंबर तक याद हैं। वह अपने पुराने छात्रों के व्हाट्सऐप ग्रुप में भी जुड़े हुए हैं।

बच्चों के सवालों का जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहे शिक्षक

डॉ. विष्णु ने कहा कि अगर किसी शिक्षक ने बच्चों को कुछ दिया होगा तो बच्चे जिंदगी भर याद रखेंगे। शिक्षकों की कई बातों को बच्चे जिंदगी भर अपने सीने से लगाए रहते हैं। आज बच्चों में बदलाव आया है तो शिक्षकों में भी आया है। सिर्फ एक पक्ष को दोष देना ठीक नहीं है। शिक्षकों को सिर्फ किताबी पाठन सामग्री नहीं, बाहर की कुछ जानकारियां भी दें, जिससे स्टूडेंट की रूची बढ़ सके। शिक्षक हमेशा तैयार रहे, क्योंकि छात्र कभी भी कहीं भी कोई भी सवाल पूछ सकता है। शिक्षक को ऐसा होना चाहिए कि जवाब को देकर बच्चों की जिज्ञासा को शांत करें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed