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चुनाव परिणाम 2019: पंजाब में पांच हॉट सीटों पर कड़ा है मुकाबला, कई का भविष्य लगा दांव पर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 23 May 2019 09:35 AM IST
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पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन
- फोटो : Amar Ujala
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पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। पांच हॉट सीटों पर कांटे की टक्कर होनी है। प्रदेश की पांच हॉट सीट संगरूर, गुरदासपुर, पटियाला, बठिंडा और फिरोजपुर पर ही सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है।
संगरूर संसदीय सीट पर आम आदमी पार्टी के मौजूदा सांसद भगवंत मान के मुकाबले कांग्रेस ने अपने सबसे अमीर प्रत्याशी केवल सिंह ढिल्लों को उतारा है। ढिल्लों मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। यहां अकाली-भाजपा गठबंधन ने पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा को और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) ने जस्सी जसराज को प्रत्याशी बनाया है। फिर भी मुख्य मुकाबला आप, कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन के बीच दिखाई दे रहा है।
भगवंत मान ने इस सीट के गांव-गांव तक अपनी पहुंच बना रखी है। मान का दावा है कि क्षेत्र के तीन लाख से अधिक मुस्लिम वोटरों का समर्थन उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस के केवल ढिल्लों स्थानीय पार्टी वर्करों के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल भी उनके पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच चुके हैं। परमिंदर सिंह ढींढसा का पैतृक गांव इसी संसदीय हलके में है और वे इस हलके के अच्छे जानकार भी हैं।
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संगरूर संसदीय सीट पर आम आदमी पार्टी के मौजूदा सांसद भगवंत मान के मुकाबले कांग्रेस ने अपने सबसे अमीर प्रत्याशी केवल सिंह ढिल्लों को उतारा है। ढिल्लों मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। यहां अकाली-भाजपा गठबंधन ने पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा को और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) ने जस्सी जसराज को प्रत्याशी बनाया है। फिर भी मुख्य मुकाबला आप, कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन के बीच दिखाई दे रहा है।
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भगवंत मान ने इस सीट के गांव-गांव तक अपनी पहुंच बना रखी है। मान का दावा है कि क्षेत्र के तीन लाख से अधिक मुस्लिम वोटरों का समर्थन उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस के केवल ढिल्लों स्थानीय पार्टी वर्करों के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल भी उनके पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच चुके हैं। परमिंदर सिंह ढींढसा का पैतृक गांव इसी संसदीय हलके में है और वे इस हलके के अच्छे जानकार भी हैं।
गुरदासपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव जीतकर सांसद बने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ की राह तब तक बहुत आसान दिखाई दे रही थी, जब तक भाजपा अपना उम्मीदवार तय नहीं कर सकी। अब भाजपा ने बालीवुड अभिनेता सनी देओल को टिकट देकर जाखड़ को कड़े संघर्ष के लिए मजबूर कर दिया है। सनी देओल के रोड शो जैसी भीड़ उमड़ रही है, उससे कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है।
हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि रैलियों में दिखाई दे रही भीड़ भाजपा के लिए वोट में परिवर्तित होगी या नहीं। लेकिन माना जा रहा है कि गुरदासपुर में सनी देओल युवा वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, कांग्रेस के लिए खास बात यह है कि इस हलके के अधीन सात विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के ही विधायक हैं। इन विधायकों ने अगर सुनील जाखड़ के लिए कैंपेन में व्यक्तिगत तौर पर रुचि दिखाई और कांग्रेस की जीत आसान हो सकती है।
हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि रैलियों में दिखाई दे रही भीड़ भाजपा के लिए वोट में परिवर्तित होगी या नहीं। लेकिन माना जा रहा है कि गुरदासपुर में सनी देओल युवा वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, कांग्रेस के लिए खास बात यह है कि इस हलके के अधीन सात विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के ही विधायक हैं। इन विधायकों ने अगर सुनील जाखड़ के लिए कैंपेन में व्यक्तिगत तौर पर रुचि दिखाई और कांग्रेस की जीत आसान हो सकती है।
पटियाला संसदीय सीट कैप्टन अमरिंदर सिंह का गृह हलका है। 2014 में आम आदमी पार्टी के डा. धरमवीर गांधी ने परनीत कौर को शिकस्त दी थी। परनीत कौर को इस बार भी मुख्य चुनौती डा. गांधी से ही मिल रही है। हालांकि इस सीट पर अकाली-भाजपा गठबंधन की ओर से सुरजीत सिंह रखड़ा और आम आदमी पार्टी ने नीना मित्तल के उतारा है।
परनीत कौर को पटियाला शहर से भरपूर समर्थन मिल रहा है लेकिन डा. गांधी इस संसदीय सीट के नाभा व साथ लगते ग्रामीण इलाकों में अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं। किसानों को अफीम उगाने की अनुमति दिए जाने की उनकी मांग को किसान बहुत पसंद कर रहे हैं। वहीं आप की नीना मित्तल डेराबस्सी, राजपुरा क्षेत्र में मतदाताओं के संपर्क में हैं जोकि अकाली दल का क्षेत्र भी रहा है।
परनीत कौर को पटियाला शहर से भरपूर समर्थन मिल रहा है लेकिन डा. गांधी इस संसदीय सीट के नाभा व साथ लगते ग्रामीण इलाकों में अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं। किसानों को अफीम उगाने की अनुमति दिए जाने की उनकी मांग को किसान बहुत पसंद कर रहे हैं। वहीं आप की नीना मित्तल डेराबस्सी, राजपुरा क्षेत्र में मतदाताओं के संपर्क में हैं जोकि अकाली दल का क्षेत्र भी रहा है।
बंठिडा और फिरोजपुर संसदीय सीटें अकाली दल के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी हैं। बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के सामने कांग्रेस के विधायक राजा वड़िंग हैं तो आप की विधायक बलजिंदर कौर और पीडीए के सुखपाल खैरा भी चुनौती बने हैं।
लेकिन माना जा रहा है कि हरसिमरत बादल अगर अकाली दल के फिक्स वोट भी हासिल कर लेती हैं तो उनकी जीत आसान हो जाएगी क्योंकि प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस, आप और पीडीए के प्रत्याशियों में वोट बंटने से इन तीनों पार्टियों को नुकसान हो सकता है। यहीं कारण है कि कांग्रेस ने इस हलके में बेअदबी और कोटकपुरा गोलीकांड को मुख्य मुद्दा बनाते हुए अकाली दल को घेरने की मुहिम छेड़ रखी है।
लेकिन माना जा रहा है कि हरसिमरत बादल अगर अकाली दल के फिक्स वोट भी हासिल कर लेती हैं तो उनकी जीत आसान हो जाएगी क्योंकि प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस, आप और पीडीए के प्रत्याशियों में वोट बंटने से इन तीनों पार्टियों को नुकसान हो सकता है। यहीं कारण है कि कांग्रेस ने इस हलके में बेअदबी और कोटकपुरा गोलीकांड को मुख्य मुद्दा बनाते हुए अकाली दल को घेरने की मुहिम छेड़ रखी है।
उधर, फिरोजपुर संसदीय सीट से मौजूदा सांसद शेर सिंह घुबाया के इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में उतरने से न सिर्फ राय सिख बिरादरी का एक वर्ग नाराज है, स्थानीय कांग्रेसी भी बाहरी प्रत्याशी के तौर पर उन्हें हजम नहीं कर पा रहे। वहीं, यह संसदीय सीट बीते 25 साल के अकालियों के कब्जे में रही है।
इस लिहाज से इसे सुरक्षित सीट मानते हुए अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल चुनाव मैदान में उतरे हैं। देखना होगा कि अकाली नेता के रूप में शेर सिंह घुबाया को मिलते रहे वोट, इस बार घुबाया को ही मिलेंगे या फिर मतदाता पार्टी को तरजीह देते हुए अकाली दल के साथ जाएंगे।
इस लिहाज से इसे सुरक्षित सीट मानते हुए अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल चुनाव मैदान में उतरे हैं। देखना होगा कि अकाली नेता के रूप में शेर सिंह घुबाया को मिलते रहे वोट, इस बार घुबाया को ही मिलेंगे या फिर मतदाता पार्टी को तरजीह देते हुए अकाली दल के साथ जाएंगे।