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Chandigarh News: डीआईजी भुल्लर को बड़ा झटका, डिस्चार्ज अर्जी खारिज<bha>;</bha> कोर्ट ने तय किए आरोप
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चंडीगढ़। रिश्वतखोरी के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और उनके कथित बिचौलिए कृष्णु शारदा को सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों की डिस्चार्ज (आरोपों से मुक्त करने) की अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही दोनों के खिलाफ आरोप भी तय कर दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
सीबीआई ने दोनों आरोपियों को पिछले साल 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। तब से दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन ने अपने-अपने तर्क रखे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए चार्ज फ्रेम करने के आदेश दिए।
पंजाब सरकार का अधिकारी, सीबीआई को एफआईआर का अधिकार नहीं
भुल्लर की ओर से दायर अर्जी में कहा गया कि वह पंजाब सरकार के अधीन कार्यरत अधिकारी हैं, इसलिए सीबीआई को उनके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं था। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए आरोपों से मुक्त करने की मांग भी की गई।
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दूसरी ओर सीबीआई ने अदालत में कहा कि पूरी कार्रवाई कानून और स्थापित प्रक्रिया के तहत की गई है तथा भ्रष्टाचार के मामलों में जांच करने का उसे पूरा अधिकार है। अदालत ने सीबीआई की दलीलों से सहमति जताते हुए आरोपियों की अर्जी खारिज कर दी।
मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी से मांगी थी रिश्वत
सीबीआई ने मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता की शिकायत पर दोनों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत मांगी गई थी। जांच के दौरान सेक्टर-40 स्थित भुल्लर के घर से करीब 7.5 करोड़ रुपये नकद, लगभग ढाई किलो सोना और महंगी घड़ियां बरामद हुई थीं। इसके बाद सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया, जबकि ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है।
सीबीआई ने दोनों आरोपियों को पिछले साल 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। तब से दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन ने अपने-अपने तर्क रखे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए चार्ज फ्रेम करने के आदेश दिए।
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पंजाब सरकार का अधिकारी, सीबीआई को एफआईआर का अधिकार नहीं
भुल्लर की ओर से दायर अर्जी में कहा गया कि वह पंजाब सरकार के अधीन कार्यरत अधिकारी हैं, इसलिए सीबीआई को उनके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं था। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए आरोपों से मुक्त करने की मांग भी की गई।
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दूसरी ओर सीबीआई ने अदालत में कहा कि पूरी कार्रवाई कानून और स्थापित प्रक्रिया के तहत की गई है तथा भ्रष्टाचार के मामलों में जांच करने का उसे पूरा अधिकार है। अदालत ने सीबीआई की दलीलों से सहमति जताते हुए आरोपियों की अर्जी खारिज कर दी।
मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी से मांगी थी रिश्वत
सीबीआई ने मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता की शिकायत पर दोनों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत मांगी गई थी। जांच के दौरान सेक्टर-40 स्थित भुल्लर के घर से करीब 7.5 करोड़ रुपये नकद, लगभग ढाई किलो सोना और महंगी घड़ियां बरामद हुई थीं। इसके बाद सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया, जबकि ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है।