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Chandigarh News: करोड़ों की मशीनें कबाड़ बनीं, नए उपकरणों को तरस रहे मरीज
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चंडीगढ़। पीजीआई में जहां हर दिन हजारों मरीज आधुनिक इलाज और अत्याधुनिक जांच सुविधाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं संस्थान के कई विभागों में करोड़ों रुपये के मेडिकल उपकरण वर्षों से बेकार पड़े धूल फांक रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें कई मशीनें कंडम घोषित होने के बाद भी विभागों से नहीं हटाई गईं। अब पीजीआई की ऑडिट रिपोर्ट ने इस गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से जवाब मांगा है।
ऑडिट में सामने आया है कि वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच संस्थान में करीब 4.22 करोड़ रुपये मूल्य के मेडिकल उपकरण समय पर निस्तारित नहीं किए गए। रिपोर्ट के अनुसार इन अनुपयोगी मशीनों के विभागों और प्रयोगशालाओं में पड़े रहने से न केवल सरकारी संपत्ति का मूल्य लगातार घट रहा है बल्कि नई मशीनें लगाने, प्रयोगशालाओं के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण में भी बाधा आ रही है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑडिट टीम की ओर से स्पष्टीकरण मांगने के बावजूद संस्थान की ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफआर)-2017 के तहत अनुपयोगी घोषित उपकरणों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य है लेकिन पीजीआई में इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई। इससे सरकारी संपत्ति का अवमूल्यन तो हो ही रहा है, साथ ही विभागों में नई तकनीक स्थापित करने के लिए जरूरी स्थान भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
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कंडम घोषित मशीन भी विभाग में पड़ी रही
ऑडिट में सबसे गंभीर मामला एडवांस्ड स्मॉल एनिमल रिसर्च फैसिलिटी का सामने आया। यहां लगा इंस्टेक स्टरलाइजर सितंबर 2024 में उच्च स्तरीय कंडेमनेशन बोर्ड द्वारा अनुपयोगी घोषित किया जा चुका था। इसकी बुक वैल्यू 13.98 लाख रुपये थी। इसके बावजूद दिसंबर 2025 तक यह मशीन विभाग में ही पड़ी मिली। ऑडिट ने इसे वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में करोड़ों की मशीनें बेकार
ऑडिट के अनुसार मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भी कई महंगे उपकरण वर्षों से निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं। इनमें एमएएलडीआई मास स्पेक्ट्रोमेट्री सिस्टम, डीएनए एक्सट्रैक्टर, बैक्टेक सिस्टम, वाइटेक सिस्टम, जेल इमेजिंग सिस्टम, सेंट्रीफ्यूज मशीनें, हॉट एयर ओवन, हॉट वॉटर बाथ, इन्क्यूबेटर समेत अनेक प्रयोगशाला उपकरण शामिल हैं। इनकी कुल बुक वैल्यू 4 करोड़ 22 लाख 34 हजार 483 रुपये तथा 3 लाख 16 हजार 810 अमेरिकी डॉलर बताई गई है। ऑडिट का कहना है कि इतने महंगे उपकरणों का वर्षों तक निष्प्रयोज्य पड़े रहना गंभीर वित्तीय लापरवाही है।
सुरक्षा शाखा में भी फंसी निस्तारण प्रक्रिया
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पीजीआई की सुरक्षा शाखा में 60 सेरेमोनियल ड्रेस सेट भी लंबे समय से अनुपयोगी पड़े हैं। इनके निस्तारण की प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की गई है। ऑडिट ने स्पष्ट किया है कि यदि ऐसी वस्तुओं का समय पर निस्तारण नहीं किया गया तो उनकी शेष कीमत भी समाप्त हो जाएगी और वे पूरी तरह कबाड़ बन जाएंगी।
मरीजों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पुराने उपकरणों का समय पर निस्तारण केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा है। जब अनुपयोगी मशीनें विभागों और स्टोर में जगह घेरती रहती हैं तो नई मशीनों की स्थापना, प्रयोगशालाओं के विस्तार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में अनावश्यक देरी होती है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली जांच और उपचार सेवाओं पर पड़ सकता है।
ऑडिट टीम ने पीजीआई प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों में पड़े अनुपयोगी उपकरणों की पहचान कर उनका जल्द निस्तारण किया जाए और इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस संबंध में पीजीआई के निदेशक, डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) और जनसंपर्क अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्रमुख उपकरण जिनका निस्तारण लंबित
इंस्टेक स्टरलाइजर – 13.98 लाख रुपये
एमएएलडीआई मास स्पेक्ट्रोमेट्री सिस्टम – 1,93,330 अमेरिकी डॉलर
डीएनए एक्सट्रैक्टर – 1,23,280 अमेरिकी डॉलर
बैक्टेक सिस्टम – 19.11 लाख रुपये
वाइटेक सिस्टम – 8.33 लाख रुपये
जेल इमेजिंग सिस्टम – 6.35 लाख रुपये
सेंट्रीफ्यूज मशीनें – 4.22 लाख रुपये
हॉट एयर ओवन – 87,420 रुपये
हॉट वॉटर बाथ – 55,999 रुपये
ऑडिट में सामने आया है कि वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच संस्थान में करीब 4.22 करोड़ रुपये मूल्य के मेडिकल उपकरण समय पर निस्तारित नहीं किए गए। रिपोर्ट के अनुसार इन अनुपयोगी मशीनों के विभागों और प्रयोगशालाओं में पड़े रहने से न केवल सरकारी संपत्ति का मूल्य लगातार घट रहा है बल्कि नई मशीनें लगाने, प्रयोगशालाओं के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण में भी बाधा आ रही है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑडिट टीम की ओर से स्पष्टीकरण मांगने के बावजूद संस्थान की ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।
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ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफआर)-2017 के तहत अनुपयोगी घोषित उपकरणों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य है लेकिन पीजीआई में इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई। इससे सरकारी संपत्ति का अवमूल्यन तो हो ही रहा है, साथ ही विभागों में नई तकनीक स्थापित करने के लिए जरूरी स्थान भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
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कंडम घोषित मशीन भी विभाग में पड़ी रही
ऑडिट में सबसे गंभीर मामला एडवांस्ड स्मॉल एनिमल रिसर्च फैसिलिटी का सामने आया। यहां लगा इंस्टेक स्टरलाइजर सितंबर 2024 में उच्च स्तरीय कंडेमनेशन बोर्ड द्वारा अनुपयोगी घोषित किया जा चुका था। इसकी बुक वैल्यू 13.98 लाख रुपये थी। इसके बावजूद दिसंबर 2025 तक यह मशीन विभाग में ही पड़ी मिली। ऑडिट ने इसे वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में करोड़ों की मशीनें बेकार
ऑडिट के अनुसार मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भी कई महंगे उपकरण वर्षों से निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं। इनमें एमएएलडीआई मास स्पेक्ट्रोमेट्री सिस्टम, डीएनए एक्सट्रैक्टर, बैक्टेक सिस्टम, वाइटेक सिस्टम, जेल इमेजिंग सिस्टम, सेंट्रीफ्यूज मशीनें, हॉट एयर ओवन, हॉट वॉटर बाथ, इन्क्यूबेटर समेत अनेक प्रयोगशाला उपकरण शामिल हैं। इनकी कुल बुक वैल्यू 4 करोड़ 22 लाख 34 हजार 483 रुपये तथा 3 लाख 16 हजार 810 अमेरिकी डॉलर बताई गई है। ऑडिट का कहना है कि इतने महंगे उपकरणों का वर्षों तक निष्प्रयोज्य पड़े रहना गंभीर वित्तीय लापरवाही है।
सुरक्षा शाखा में भी फंसी निस्तारण प्रक्रिया
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पीजीआई की सुरक्षा शाखा में 60 सेरेमोनियल ड्रेस सेट भी लंबे समय से अनुपयोगी पड़े हैं। इनके निस्तारण की प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की गई है। ऑडिट ने स्पष्ट किया है कि यदि ऐसी वस्तुओं का समय पर निस्तारण नहीं किया गया तो उनकी शेष कीमत भी समाप्त हो जाएगी और वे पूरी तरह कबाड़ बन जाएंगी।
मरीजों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पुराने उपकरणों का समय पर निस्तारण केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा है। जब अनुपयोगी मशीनें विभागों और स्टोर में जगह घेरती रहती हैं तो नई मशीनों की स्थापना, प्रयोगशालाओं के विस्तार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में अनावश्यक देरी होती है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली जांच और उपचार सेवाओं पर पड़ सकता है।
ऑडिट टीम ने पीजीआई प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों में पड़े अनुपयोगी उपकरणों की पहचान कर उनका जल्द निस्तारण किया जाए और इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस संबंध में पीजीआई के निदेशक, डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) और जनसंपर्क अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्रमुख उपकरण जिनका निस्तारण लंबित
इंस्टेक स्टरलाइजर – 13.98 लाख रुपये
एमएएलडीआई मास स्पेक्ट्रोमेट्री सिस्टम – 1,93,330 अमेरिकी डॉलर
डीएनए एक्सट्रैक्टर – 1,23,280 अमेरिकी डॉलर
बैक्टेक सिस्टम – 19.11 लाख रुपये
वाइटेक सिस्टम – 8.33 लाख रुपये
जेल इमेजिंग सिस्टम – 6.35 लाख रुपये
सेंट्रीफ्यूज मशीनें – 4.22 लाख रुपये
हॉट एयर ओवन – 87,420 रुपये
हॉट वॉटर बाथ – 55,999 रुपये