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हैंड ग्रेनेड फेंकने के आरोपी को जमानत नहीं: HC ने कहा-पाकिस्तान कनेक्शन वाला ग्रेनेड हमला भय फैलाने वाला अपराध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:04 AM IST
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सार
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी है और वह मुख्य आरोपियों में शामिल है। इस स्तर पर साक्ष्यों की तकनीकी जांच करना उचित नहीं है। खासकर जब मामला इतने गंभीर अपराध से जुड़ा हो।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जालंधर में एक यूट्यूबर के घर पर हैंड ग्रेनेड फेंकने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल अपराध को अत्यंत गंभीर बना देता है और समाज में आतंक, भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है।
आरोप है कि यह हमला एक पाकिस्तान-आधारित प्रतिद्वंद्वी के इशारे पर किया गया। घटना जालंधर में यूट्यूबर नवदीप सिंह उर्फ रोजर संधू के घर पर हुई थी। गत वर्ष 15/16 मार्च की रात आरोपी हार्दिक कंबोज को सह-आरोपी शिकायतकर्ता के घर के बाहर ले गया था जहां उसने बालकनी की ओर हैंड ग्रेनेड फेंका। हालांकि, वह फटा नहीं। इस मामले में 16 मार्च 2025 को जालंधर के एक थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाने वालों में शामिल था और उसी ने ग्रेनेड फेंका। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि मामला केवल पुलिस की गुप्त सूचनाओं पर आधारित है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। यह साबित नहीं हुआ कि फेंकी गई वस्तु हैंड ग्रेनेड ही थी और केवल एक मोटरसाइकिल की बरामदगी हुई है।
राज्य की ओर से जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा गया कि यदि ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो यह कानून-व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। इस तरह के अपराधों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी है और वह मुख्य आरोपियों में शामिल है। इस स्तर पर साक्ष्यों की तकनीकी जांच करना उचित नहीं है। खासकर जब मामला इतने गंभीर अपराध से जुड़ा हो। हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल अपने आप में अपराध को जघन्य बनाता है।
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आरोप है कि यह हमला एक पाकिस्तान-आधारित प्रतिद्वंद्वी के इशारे पर किया गया। घटना जालंधर में यूट्यूबर नवदीप सिंह उर्फ रोजर संधू के घर पर हुई थी। गत वर्ष 15/16 मार्च की रात आरोपी हार्दिक कंबोज को सह-आरोपी शिकायतकर्ता के घर के बाहर ले गया था जहां उसने बालकनी की ओर हैंड ग्रेनेड फेंका। हालांकि, वह फटा नहीं। इस मामले में 16 मार्च 2025 को जालंधर के एक थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाने वालों में शामिल था और उसी ने ग्रेनेड फेंका। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि मामला केवल पुलिस की गुप्त सूचनाओं पर आधारित है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। यह साबित नहीं हुआ कि फेंकी गई वस्तु हैंड ग्रेनेड ही थी और केवल एक मोटरसाइकिल की बरामदगी हुई है।
राज्य की ओर से जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा गया कि यदि ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो यह कानून-व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। इस तरह के अपराधों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी है और वह मुख्य आरोपियों में शामिल है। इस स्तर पर साक्ष्यों की तकनीकी जांच करना उचित नहीं है। खासकर जब मामला इतने गंभीर अपराध से जुड़ा हो। हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल अपने आप में अपराध को जघन्य बनाता है।