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चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला: अब नहीं रहेगी सीएलयू की जरूरत, उद्योग और निर्माण को मिलेगी रफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:35 AM IST
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सार
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाए जाने का सीधा असर सीएलयू की जरूरत खत्म होने पर पड़ेगा।
चंडीगढ़ में निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन शहर में निर्माण और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा सुधारात्मक कदम उठाने जा रहा है। डीरिगुलेशन 2.0 के तहत जून 2026 तक चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर शहर के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ेगा। प्रशासन का दावा है कि इससे आम नागरिकों, उद्योगपतियों, बिल्डरों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं तेज होंगी।
अब तक किसी भी आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक निर्माण से पहले सीएलयू लेना जरूरी था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जटिल मानी जाती थी जिसके कारण प्रोजेक्ट शुरू होने में महीनों की देरी हो जाती थी। अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने के चलते लागत भी बढ़ जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति की जरूरत खत्म हो जाएगी जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाए जाने का सीधा असर सीएलयू की जरूरत खत्म होने पर पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में एफएआर को मौजूदा 0.75 से बढ़ाकर 1.50 या 1.75 तक किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं, प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र फेज-3 में एफएआर 2.50 तक हो सकता है। बढ़े हुए एफएआर के साथ निर्माण की अधिक अनुमति मिलने से सीएलयू की बाध्यता समाप्त हो जाएगी।
प्रशासन ने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी प्रक्रिया को भी सरल और पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया है। बिजली कनेक्शन और अन्य बुनियादी सेवाओं के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कनेक्शन मिलने में देरी न हो। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए तत्काल सर्टिफिकेट देने की अनिवार्यता भी समाप्त करने की तैयारी है जिससे कामकाज और सुगम होगा।
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इस फैसले का सबसे बड़ा असर शहर के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ेगा। प्रशासन का दावा है कि इससे आम नागरिकों, उद्योगपतियों, बिल्डरों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं तेज होंगी।
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अब तक किसी भी आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक निर्माण से पहले सीएलयू लेना जरूरी था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जटिल मानी जाती थी जिसके कारण प्रोजेक्ट शुरू होने में महीनों की देरी हो जाती थी। अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने के चलते लागत भी बढ़ जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति की जरूरत खत्म हो जाएगी जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाए जाने का सीधा असर सीएलयू की जरूरत खत्म होने पर पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में एफएआर को मौजूदा 0.75 से बढ़ाकर 1.50 या 1.75 तक किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं, प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र फेज-3 में एफएआर 2.50 तक हो सकता है। बढ़े हुए एफएआर के साथ निर्माण की अधिक अनुमति मिलने से सीएलयू की बाध्यता समाप्त हो जाएगी।
प्रशासन ने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी प्रक्रिया को भी सरल और पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया है। बिजली कनेक्शन और अन्य बुनियादी सेवाओं के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कनेक्शन मिलने में देरी न हो। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए तत्काल सर्टिफिकेट देने की अनिवार्यता भी समाप्त करने की तैयारी है जिससे कामकाज और सुगम होगा।
