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Chandigarh News: पीजीआई में जीनोमिक्स ट्रेनिंग का मौका, 6 अप्रैल तक करें आवेदन

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2026 02:21 AM IST
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Opportunity for Genomics Training at PGI, Apply by April 6
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चंडीगढ़। अगर आप मेडिकल फील्ड में हैं और जेनेटिक्स के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए शानदार अवसर है। पीजीआई ने फेलोशिप इन जेनेटिक डायग्नोस्टिक्स के तीसरे बैच के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह फेलोशिप जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डी बी टी), भारत सरकार का यूएमएम आई डी फेज-II के तहत चलाई जा रही है। उम्मीदवार 6 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म संबंधित ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर को ईमेल के जरिए भेजना होगा। साथ ही संस्थान के हेड के माध्यम से हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी।
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आज के जीनोमिक्स युग में बीमारियों की सटीक पहचान और इलाज के लिए जेनेटिक्स की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसको ध्यान में रखते हुए यह 6 महीने की फेलोशिप शुरू की गई है, जिसमें देशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नेशनल इनहेरिटेड डिसऑर्डर्स एडमिनिस्ट्रेशन केंद्र को मजबूत करना है, ताकि मरीजों को एक ही जगह पर जांच, इलाज, काउंसलिंग और प्रीनेटल टेस्टिंग जैसी सुविधाएं मिल सकें।
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फेलोशिप के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को साइटोजेनेटिक्स और मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स की आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे डॉक्टर अपने संस्थानों में जेनेटिक टेस्टिंग सुविधाएं विकसित कर सकेंगे। हर साल दो बैच में कुल चार-चार प्रशिक्षुओं का चयन किया जाएगा। तीसरा बैच 1 मई 2026 से शुरू होगा और अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

ये कर सकते हैं आवेदन

इस फेलोशिप के लिए एमडी/एमएस/डीएनबी डिग्री धारक डॉक्टर आवेदन कर सकते हैं, जो पीडियाट्रिक्स, मेडिसिन, गायनेकोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री समेत किसी भी क्लीनिकल या पैराक्लीनिकल स्पेशियलिटी से जुड़े हों। साथ ही उम्मीदवार का सरकारी मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में नियमित पद पर कार्यरत होना जरूरी है। चयन प्रक्रिया में आवेदन की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू शामिल होगा।
बाहर से आने वाले डॉक्टरों को 30,000 रुपये प्रतिमाह तक का डिस्प्लेसमेंट अलाउंस भी दिया जाएगा। मेडिकल छात्रों और युवा डॉक्टरों के लिए यह फेलोशिप सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि करियर को नई दिशा देने का मौका है। जेनेटिक्स जैसे हाई-डिमांड फील्ड में स्किल्स हासिल कर वे न सिर्फ मरीजों की बेहतर मदद कर पाएंगे, बल्कि अपने संस्थान में नई सुविधाएं शुरू करने का रास्ता भी खोल सकेंगे।
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