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पीजीआई केस स्टडी: खून में बढ़ा कैल्शियम हो सकता है जेनेटिक बीमारी का संकेत, सर्जरी तक की आ सकती है नाैबत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 30 Mar 2026 02:59 PM IST
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सार

फैमिलियल हाइपोकैल्सियूरिक हाइपरकैल्सीमिया एक दुर्लभ लेकिन सामान्यत हानिरहित आनुवंशिक बीमारी है। इसमें खून में कैल्शियम का स्तर थोड़ा बढ़ा रहता है, जबकि पेशाब के जरिए कैल्शियम कम निकलता है।

PGI Case Study Elevated Blood Calcium Levels May Signal Genetic Disorder
चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अक्सर लोग थकान, पेट दर्द या बदन दर्द जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पीजीआई की एक नई रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 

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विशेषज्ञों के अनुसार खून में हल्का बढ़ा कैल्शियम भी एक खास जेनेटिक बीमारी का संकेत हो सकता है। समय पर सही पहचान न होने पर मरीज को गलत इलाज या यहां तक कि अनावश्यक सर्जरी तक करानी पड़ सकती है। दिसंबर 2025 में आई जे ई एम में प्रकाशित एक केस स्टडी में पीजीआई के प्रो. संजय भड़ाडा, डॉ. जयादित्य घोष, डॉ. शीनम गर्ग, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. दुराईराज अर्जुनन और डॉ. पुनीत भारद्वाज की टीम ने एक अहम मामला साझा किया है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक फैमिलियल हाइपोकैल्सियूरिक हाइपरकैल्सीमिया एक दुर्लभ लेकिन सामान्यत हानिरहित आनुवंशिक बीमारी है। इसमें खून में कैल्शियम का स्तर थोड़ा बढ़ा रहता है, जबकि पेशाब के जरिए कैल्शियम कम निकलता है। यह स्टडी 25 वर्षीय युवक पर आधारित है, जिसे लंबे समय से शरीर में हल्का दर्द, पेट फूलना, कब्ज और दस्त जैसी समस्याएं थीं।

शुरुआत में मरीज को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम माना गया, लेकिन जांच के दौरान खून में कैल्शियम लगातार बढ़ा पाया गया। आगे की जांच में पैराथायरॉइड हार्मोन सामान्य से अधिक मिला, जबकि विटामिन डी सामान्य था और स्कैन में कोई गांठ नहीं दिखी। निर्णायक सुराग 24 घंटे की यूरिन जांच से मिला, जिसमें कैल्शियम का स्तर बेहद कम पाया गया। यहीं से फैमिलियल हाइपोकैल्सियूरिक हाइपरकैल्सीमिया का संदेह मजबूत हुआ।

बाद में जेनेटिक टेस्ट में सीएएसआर जीन में बदलाव की पुष्टि हुई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मरीज को फैमिलियल हाइपोकैल्सियूरिक हाइपरकैल्सीमिया टाइप-1 है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को अक्सर प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म समझ लिया जाता है, जिसमें सर्जरी तक करनी पड़ सकती है, जबकि इस स्थिति में आमतौर पर ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती।

छोटी दिखने वाली मेडिकल रिपोर्ट भी गंभीर बीमारी की ओर कर सकती है इशारा

डॉक्टरों ने मरीज को बीमारी की प्रकृति समझाई और लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवा दी। साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों की जांच की भी सलाह दी गई, क्योंकि यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस स्टडी इस बात का संकेत है कि छोटी दिखने वाली मेडिकल रिपोर्ट भी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती है। सही समय पर सटीक जांच न केवल मरीज को गलत इलाज से बचा सकती है, बल्कि पूरे परिवार को जागरूक करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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