Chandigarh: 42 हजार मकानों में नीड बेस्ड चेंज का रास्ता साफ, मार्च के पहले सप्ताह में नई नोटिफिकेशन
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि चंडीगढ़ प्रशासन फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में किसी प्रकार की वृद्धि न करे और यथास्थिति बनाए रखे। इसके बाद नीति पर रोक लग गई थी। पिछले महीने 11 सदस्यीय समिति गठित कर नीति की समीक्षा की गई।
विस्तार
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के 42 हजार मकानों में किए गए नीड बेस्ड चेंज को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नई नीति को मंजूरी दे दी है। मार्च के पहले सप्ताह तक प्रशासन इस संबंध में नई अधिसूचना जारी कर सकता है।
शहर में सीएचबी के कुल 62 हजार मकान हैं जिनमें बड़ी संख्या में निवासियों ने जरूरत के अनुसार बदलाव किए हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन 3 जनवरी 2023 की अधिसूचना को ही दोबारा लागू करेगा जिसे 10 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थगित कर दिया गया था। हालांकि नए ड्राफ्ट में क्लॉज-20 और 22 को शामिल नहीं किया गया है। मुख्य सचिव व सीएचबी के चेयरमैन एच राजेश प्रसाद ने संशोधित ड्राफ्ट तैयार कर प्रशासक को भेजा था जिस पर मुहर लग चुकी है।
क्या थे क्लॉज-20 और 22
क्लॉज-20 के तहत आवंटियों को ओबीपीएएस (ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम) के माध्यम से सूचीबद्ध निजी वास्तुकार की ओर से स्व-प्रमाणन योजना के तहत लिफ्ट लगाने की अनुमति थी। इसके लिए ब्लॉक के अन्य आवंटियों को 15 दिन का नोटिस देकर आनुपातिक लागत में योगदान का विकल्प दिया जाता था। यह प्रावधान अब नई अधिसूचना में नहीं होगा। क्लॉज-22 में स्वतंत्र मकानों के लिए सीबीआर (अर्बन), 2017 के प्रावधान लागू करने का विकल्प था जिसके तहत भूखंडित मकानों को मरला मकानों के बराबर माना जा सकता था। यह प्रावधान भी हटाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि चंडीगढ़ प्रशासन फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में किसी प्रकार की वृद्धि न करे और यथास्थिति बनाए रखे। इसके बाद नीति पर रोक लग गई थी। पिछले महीने 11 सदस्यीय समिति गठित कर नीति की समीक्षा की गई। प्रशासक ने समिति की रिपोर्ट और प्रेजेंटेशन के बाद सैद्धांतिक मंजूरी दी। नई अधिसूचना में इंडिपेंडेंट मकानों को लेकर स्पष्ट किया गया है कि चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (अर्बन), 2017 को मरला मकानों की तरह एकरूपता से लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि सेक्टर-46, 43, 38 (वेस्ट) और मनीमाजरा के मकानों की संरचना अलग-अलग है।
लोगों की चिंता भी बरकरार
क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी का कहना है कि जरूरी बदलावों को नियमित करना स्वागत योग्य कदम है लेकिन पहले दी गई छूट को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। यदि नए प्रावधान लागू करने हैं तो उन्हें नई तारीख से लागू किया जाए। उनका कहना है कि अक्सर नई अधिसूचना के बाद पुराने मामलों में भी नोटिस भेजे जाते हैं जिससे आवंटियों में असमंजस की स्थिति बनती है। नीड बेस्ड चेंज पर प्रशासन की यह पहल हजारों आवंटियों को राहत दे सकती है, बशर्ते नई नीति स्पष्ट और विवादमुक्त तरीके से लागू की जाए।